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गहलोत सरकार का बड़ा फैसला: जेलों में लंबे समय से सजा भुगत रहे बंदियों की होगी रिहाई, प्रस्ताव को मिली मंजूरी

Tue, 21 Dec 2021 11:29 PM IST
Jeet Kumar एजेंसी, जयपुर।
एजेंसी, जयपुर। Published by: Jeet Kumar Updated Tue, 21 Dec 2021 11:29 PM IST
सार

आजीवन कारावास से दंडित ऐसे बंदी जिन्होंने 14 वर्ष की सजा भुगत ली है औह ढाई वर्ष का परिहार प्राप्त कर लिया है। साथ ही, विगत दो वर्षों में जेल में उनका आचरण संतोषप्रद रहा है और किसी जेल दंड से दंडित नहीं किया गया है। ऐसे बंदियों को भी रिहा किया जा सकेगा।

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ashok Gehlot government big decision to release the prisoners who have been serving a long sentence in jails
राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजस्थान की जेलों में लंबे समय से सजा भुगत रहे ऐसे बंदियों जिन्होंने सदाचार पूर्वक अपनी अधिकांश सजा भुगत ली है अथवा गंभीर बीमारियों से ग्रसित एवं वृद्ध हैं, उन्हें समय से पहले रिहा करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस पहल से ऐसे परिवारों को खुशियां मिलेंगी, जिनके परिजन आजीवन कारावास की सजा का अधिकांश हिस्सा भुगत चुके हैं।

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प्रस्ताव के अनुसार, आजीवन कारावास से भिन्न अवधि के कारावास की सजा से दंडित वृद्ध एवं गंभीर बीमारियों से ग्रसित ऐसे कैदियों को समय पूर्व रिहा किया जा सकेगा, जो कैंसर, एड्स, कुष्ठ और अन्य गंभीर रोगों से ग्रसित हैं अथवा दृष्टिहीन या विकलांग हैं और अपने दैनिक क्रियाकलापों के लिए दूसरों पर निर्भर हैं। साथ ही, ऐसे वृद्ध पुरूष, जिनकी आयु 70 वर्ष तथा महिलाएं, जिनकी आयु 65 वर्ष या इससे अधिक है और सजा का एक तिहाई भाग भुगत चुके हैं, उन्हें समय पूर्व रिहाई मिल सकेगी।
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सजा का अधिकांश हिस्सा भुगत चुके बंदियों को भी राहत
आजीवन कारावास से दंडित ऐसे बंदी जिन्होंने 14 वर्ष की सजा भुगत ली है एवं ढाई वर्ष का परिहार प्राप्त कर लिया है। साथ ही, विगत दो वर्षों में जेल में उनका आचरण संतोषप्रद रहा है और किसी जेल दंड से दंडित नहीं किया गया है। ऐसे बंदियों को भी रिहा किया जा सकेगा। इसके अलावा आजीवन कारावास से भिन्न अवधि की सजा भुगत रहे ऐसे बंदी जिनकी सजा का दो तिहाई भाग पूरा हो गया है और विगत दो वर्ष से आचरण संतोषप्रद रहा है, उन्हें भी समय पूर्व रिहा किया जा सकेगा। साथ ही, ऐसे बंदी जिन्हें न्यायालयों से तीन माह या इससे कम अवधि की सजा से दंडित किया गया है, उन्हें भी रिहा किया जा सकेगा। 
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इन्हें मिल सकेगा राज्य परिहार
राजस्थान के न्यायालयों द्वारा दंडित बंदियों को राज्य परिहार दिए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। प्रस्ताव के अनुसार, आजीवन या 10 वर्ष से अधिक के कारावास के बंदियों को 6 माह, 5 वर्ष या इससे अधिक 10 वर्ष तक के बंदियों को 4 माह, 2 वर्ष या इससे अधिक 5 वर्ष तक के बंदियों को दो माह और 2 वर्ष से कम के कारावास के बंदियों को 1 माह का परिहार दिया जा सकेगा। 


इन श्रेणियों के अपराधियों को नहीं मिलेगी राहत
दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम-1946 या दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 से भिन्न किसी केन्द्रीय अधिनियम के तहत सजायाफ्ता बंदी, अभ्यस्त अपराधी, साधारण कारावास से दण्डित, जमानत नहीं देने या जुर्माने का भुगतान नहीं करने के कारण कारावास भुगत रहे बंदी, बलात्कार, ऑनर किलिंग, मॉब लिंचिंग, पॉक्सो एक्ट, तेजाब हमले से संबंधित अपराध, आर्म्स एक्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, एनडीपीएस एक्ट, आबकारी अधिनियम, पीसीपीएनडीटी एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, गौवंश अधिनियम, आवश्यक वस्तु अधिनियम, सीमा शुल्क अधिनियम इत्यादि के तहत सजा भुगत रहे बंदियों सहित 28 विभिन्न श्रेणियों के जघन्य अपराधों में लिप्त अपराधियों को कोई राहत नहीं मिलेगी।

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