Rajasthan: दिव्यांग लड़कियों को सरकारी शिक्षिका सिखा रही सेल्फ डिफेंस, अब तक 300 से अधिक को दी ट्रेनिंग
जयपुर में 6 से 15 अक्टूबर तक सरकारी प्रशिक्षण शिविर में शिक्षिका सुमन लड़कियों को सेल्फ डिफेंस सिखा रही हैं। शिविर में आई लड़कियों ने बताया कि सेल्फ डिफेंस सीखना बहुत आसान था। अब वह आत्मविश्वास से लबरेज हैं कि वो अपनी रक्षा कर सकती हैं।
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राजस्थान के अलवर जिले में एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका दिव्यांग लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे रही हैं। शिक्षिका आशा सुमन का कहना है कि दिव्यांग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न होने का अधिक खतरा होता है। इसलिए महत्वपूर्ण है कि उन्हें सेल्फ डिफेंस सिखाया जाए। जिससे वे अपनी रक्षा कर सकें।
सुमन अलवर जिले के खरखदा, राजगढ़ में एक प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाती हैं। 40 साल की सुमन ने 2015 में विभिन्न दिव्यांग लड़कियों विशेष रूप से जो लड़कियां देख नहीं सकती, उन्हें प्रशिक्षण देना शुरू किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद राज्य पुलिस से आत्मरक्षा का प्रशिक्षण लिया। हालांकि, वह 2019 में विशेष प्रशिक्षण के लिए मुंबई चली गईं। जिससे वो दिव्यांग लड़कियों को सेल्फ डिफेंस सिखाने के गुर सिखा सके। जो लड़कियां देख नहीं सकती, उनके यौन हिंसा के शिकार होने की संभावना अधिक होती हैं।
डेली एक्टिविटी से सिखाते हैं डिफेंस के गुर
उन्होंने बताया कि सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग के तहत पंच, किक, फॉरवर्ड और बैकवर्ड हैंड मूवमेंट आदि सिखाया जाता है, जो न केवल लड़कियों को परिस्थितियों का सामना करने के लिए सशक्त बनाता है बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। दैनिक गतिविधियों जैसे कि वे कैसे एक दरवाजा खोलते हैं, अपने दांत ब्रश करते हैं, सीढ़ियां चढ़ते हैं आदि से डिफेंस गुर सिखाए जाते हैं। इस पद्धति के माध्यम से, वे बहुत जल्दी सीखती हैं और 10-12 दिनों की अवधि में ही पूरी तरह से प्रशिक्षित हो जाती है। हालांकि, विभिन्न अक्षमताओं के ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तकनीक सिखाई जाती हैं।
जयपुर के प्रशिक्षिण शिविर में दे रही ट्रेनिंग
सुमन ने पिछले तीन साल में राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से 300 से अधिक लड़कियों को प्रशिक्षित किया है। सुमन ने बताया कि जयपुर में 6 से 15 अक्टूबर तक सरकारी प्रशिक्षण शिविर में 11 दृष्टिबाधित लड़कियों सहित कुल 55 विकलांग लड़कियों को प्रशिक्षण दिया है। उन्होंने पिछले तीन साल में राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से 300 से अधिक लड़कियों को प्रशिक्षित किया है।
दिव्यांग की मां ने कहा- अब मेरी बेटी अपनी रक्षा कर सकती है
प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने जोधपुर से आई पूजा गोस्वामी ने बताया कि सेल्फ डिफेंस सीखना बहुत आसान था और अब वह आत्मविश्वास से लबरेज हैं। पूजा की मां ने कहा कि जब वह अकेली बाहर जाती थी तो पूजा की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंतित रहती थी लेकिन अब मुझे लगता है कि वह अपनी रक्षा कर सकती है।
अलवर जिले की 12वीं कक्षा की छात्रा मोनिका ने कहा कि मैं देख नहीं सकती लेकिन फिर भी मैं अपनी रक्षा कर सकती हूं। अगर हमलावर मुझे पीछे से मारता है, तो मैं अपनी कोहनी से उस पर हमला कर सकती हूं। अगर हमलावर सामने से हमला करता है, तो मैं हथेली से मारकर अपनी रक्षा कर सकता हूं। उन्होंने कहा कि मैंने खुद को बचाने के गुर सीखे हैं।