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कभी सुना है... 5000 किताबों वाला अनोखा श्मशान

Sun, 11 Jun 2017 03:31 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Sun, 11 Jun 2017 03:31 PM IST
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A unique crematorium in Bhilwara
कई तरह की सुविधाएं हैं इस मुक्तिधाम में - फोटो : अमर उजाला
भीलवाड़ा में एक श्मशान ऐसा है जहां लोग केवल दाह संस्कार करने ही नहीं आते बल्कि जिमिंग और स्टडी के लिए भी आते हैं। यहां योगा क्लासेज भी चलती है, तो पांच हजार किताबों की समृद्ध लाइब्रेरी भी है। सुबह की सैर से लेकर शाम को बच्चों के खेल, इस मुक्तिधाम के रोज के नजारे हैं। हम बात कर रहे हैं भीलवाड़ा शहर के पंचमुखी मुक्तिधाम की।
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यह मुक्तिधाम करीब पन्द्रह बीघा भूमि में बना है। इस पूरे मुक्तिधाम की देखरेख पंचमुखी धाम ट्रस्ट करता है। इस मुक्तिधाम की जिम्मेदारी समाजसेवी व पर्यावरण प्रेमी बाबूलाल जाजू ने संभाल रखी है।
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एक आम श्मशान के अनोखे मुक्तिधाम बनने का सफर की कहानी भी अनोखी है। बाबूलाल जाजू कुछ साल पहले गुजरात गए थे। गुजरात के जामनगर में एक मुक्तिधाम में इस तरह का नजारा लेकर उन्हें लगा कि भीलवाड़ा में भी इसी तरह का मुक्तिधाम होना चाहिए। उसके बाद भीलवाड़ा आकर इस पर काम शुरू किया।
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इस मुक्तिधाम में सफाई पानी के पूरे इंतजाम है। यहां कई तरह के पेड़ लगाए गए हैं। इनमें नीम, बरगद जैसे छायादार पेड़ हैं तो वहीं गुलमोहर के फूलदार पेड़ भी हैं, जो यहां सुंदरता को दोगुनी करते हैं। इस मुक्तिधाम में आठ बरामदे, वेटिंग हॉल, स्नानघर भी हैं। यहां लाइब्रेरी है जहां पर बच्चे और बुजुर्ग रोज पढ़ने आते हैं, इस लाइब्रेरी में पांच हजार किताबें हैं। यहां जिम भी है, योग की क्लासेज भी लगाई जाती है। लोग इनका लाभ भी उठाते हैं। इस मुक्तिधाम में अत्याधुनिक एलपीजी चलित शवदाह गृह भी है। इन सभी सुविधाओं के जन सहयोग से चलाया जाता है।

 
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