रेप पीड़िता से जज ने पूछे न पूछने वाले सवाल, खतरे में नौकरी
- रेप पीड़िता को अदालत से न्याय की आस थी
- महिला जज ने बेशर्मी भरे सवाल दाग दिए
- जज ने रेप पीड़ता से न पूछने वाले सवाल पूछे
- पीड़िता ने जज के खिलाफ भी मुकदमा ठोंका
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गर्भ में पल रहा चार महीने का बच्चा रह-रहकर उसे उसके साथ हुई हैवानियत की याद तो दिलाता ही है, कानून के दरवाजे पर मिली जिल्लत उसे हर पल घोर निराशा और अपमान के भंवर धकेल देती है। यौन हिंसा के गुनहगार के खिलाफ पीड़िता अदालत पहुंची तो जज ने न्याय करने बजाय उसके हालातों पर चुटकी लेना शुरू कर दिया।
दुष्कर्मी से मिली शारीरिक पीड़ाओं से वो उबर भी जाए लेकिन जज के सवालों से मानसिक तौर हुए नुकसान की भरपाई शायद ताउम्र नहीं हो पाएगी। जज ने रेप पीड़िता से पूछा, ''रेप होते वक्त अपने पैरों को सही से बंद किया था?'', ''नाजुक अंगों को भाली-भांति छिपाया था या नहीं?"
विडंबना देखिए कानून के मंदिर में न्याय के सिंहासन पर सवार जज भी महिला ही थी, जो संवेदनहीनता की हद पार कर गई और पद और गरिमा भी ख्याल नहीं रहा।
डेलीमेल की खबर के मुताबिक बेहद चौकाने वाला मामला स्पेन के बेस्क कंट्री का है। एक स्पेन की महिला जज मारिया डेल कारमेन मोलिना मैंसिला पर रेप पीड़िता से गैर जरूरी और अमर्यादित सवाल पूछकर उसे मानसिक पीड़ा पहुंचाने का आरोप लगा है।
महिला जज के रेप पीड़िता से बेशर्मी भरे सवाल
सुनवाई बेस्क कंट्री के विटोरिया कोर्ट में हो रही थी। उस वक्त लोग दातों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर हो गए जब जज ने रेप पीड़िता से पूछा कि रेप होते वक्त उसने अपने नाजुक अंगों छिपाने की कोशिश की थी?
जज ने रेप पीड़िता से पूछा कि क्या उसने रेप के दौरान अपने पैरों को सही से बंद किया था?
जज के इस अभद्र व्यवहार के खिलाफ भी रेप पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई है।
महिलाओं के खिलाफ होने वाले उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाली संस्था द क्लारा कैंपोआमोर एसोसियशन' पीड़िता के समर्थन में आगे आई है और जज के निलंबित कर कार्रवाई की मांग कर रही है।
संस्था की एक प्रवक्ता ब्लैंका एस्ट्रेला रियूज ने मीडिया का बताया कि जज ने पीड़िता के साथ अपमानजनक बर्ताव कर उसकी मर्यादा को भंग किया है। जज ने रेप पीड़िता को बोलने नहीं दिया और बेतुके सवाल पर सवाल करती गई जो बेहद अमानवीय और घिनौने थे।
ऐसे गैर जरूरी सवाल पूरी तरह से पीड़िता की मर्यादा को नुकसान पहुंचाते हैं।
वहीं संस्था ने ये भी दावा किया कि महिला जज के खिलाफ पहले भी कई दफा रेप पीड़ितों से भद्दे कमेंट करने और उनका मजाक उड़ाने की शिकायतें रही हैं। उनकी संस्था पीड़िता को न्याय दिलाकर ही रहेगी।