संकट में घिरे आईएलएंडएफएस समूह से वापस ली गई जोजिला सुरंग प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी
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बुरी तरह कर्ज में फंसकर आर्थिक संकट से जूझ रहे आईएलएंडएफएस समूह से जोजिला सुरंग के निर्माण की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। श्रीनगर, लेह और कारगिल के बीच पूरे साल हर मौसम में संपर्क बनाए रखने वाली सामरिक महत्व की इस परियोजना से जुड़ा आईएलएंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन का अनुबंध एनएचआईडीसीएल ने 15 जनवरी को रद्द कर दिया।
आईएलएंडएफएस को 6800 करोड़ रुपये की इस परियोजना से हटाए जाने का निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यहां काम शुरू करने के महज 8 महीने बाद लिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना के लिए अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की इकाई नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) नए सिरे से निविदा जारी करेगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आईएलएंडएफएस का अनुबंध इस परियोजना पर काम के पूरी तरह बंद हो जाने और इस कंपनी के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने के कारण लिया गया है। आईएलएंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन ने भी बांबे स्टॉक एक्सचेंज को भेजी जानकारी में अनुबंध रद्द होने की जानकारी दी है। यह दूसरा मौका है, जब एनएचआईडीसीएल ने इस सुरंग परियोजना से जुड़ा कोई अनुबंध रद्द किया है।
इससे पहले आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर का अनुबंध रद्द किया गया था, जिसके बाद 2017 में आईएलएंडएफएस को नई निविदा प्रक्रिया के जरिए सुरंग निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बता दें कि आईएलएंडएफएस समूह अपने वित्तीय कुप्रबंधन के कारण कर्जों को समय पर नहीं चुका पाने के कारण संकट से गुजर रहा है। समूह पर 8 अक्तूबर तक 94,215.6 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसके बाद सरकार ने समूह के बोर्ड को भंग कर इसे पुनर्जीवित करने के लिए नए सदस्यों की नियुक्ति की थी।
3.5 घंटे का सफर महज 15 मिनट में होगा पूरा
जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर-कारगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर समुंद्र तल से करीब 11,578 फुट की ऊंचाई पर जोजिला दर्रे में बन रही इस 14.15 किलोमीटर लंबी दो लेन सड़क वाली सुरंग के बनने के बाद 3.5 घंटे का रास्ता महज 15 मिनट में पूरा हो जाएगा। यह एशिया की सबसे लंबी दोहरी दिशा में जाने वाली सुरंग है। फिलहाल यह रास्ता सर्दी में भारी बर्फबारी से बंद हो जाता है, जिसे लद्दाख का संपर्क पूरे कश्मीर से कई महीने के लिए कट जाता है।