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Hindi News ›   India News ›   Zakia Jafri widow of former Congress MP Ehsan Jafri killed in 2002 Gujarat riots, dies in Ahmedabad

Zakia Jafri: जकिया जाफरी का 86 साल की उम्र में निधन, पति एहसान जाफरी की गुजरात दंगो में हुई थी मौत

Sat, 01 Feb 2025 02:23 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 01 Feb 2025 02:23 PM IST
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Zakia Jafri widow of former Congress MP Ehsan Jafri killed in 2002 Gujarat riots, dies in Ahmedabad
जकिया जाफरी का इंतकाल। - फोटो : ani

गुजरात दंगों में मारे गए पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी का शनिवार को अहमदाबाद में 86 साल की उम्र में निधन हो गया। एहसान जाफरी 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद के मुस्लिम इलाके गुलबर्ग सोसाइटी के अंदर मारे गए 69 लोगों में शामिल थे। जकिया राष्ट्रीय स्तर पर गोधरा ट्रेन आगजनी की घटना के बाद हुए दंगों के लिए शीर्ष राजनीतिक नेताओं को जिम्मेदार ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ने पर सुर्खियों में आई थीं।

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बेटे तनवीर जाफरी ने सोशल मीडिया पर अपनी मां की मौत की खबर साझा करते हुए लिखा, मां अहमदाबाद में मेरी बहन के घर जा रही थीं। उन्होंने अपनी रोजाना की सुबह की दिनचर्या के बाद सामान्य तौर से परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने बेचैनी की शिकायत की। घर पर उन्हें दिखाने के लिए बुलाए गए डॉक्टर ने लगभग 11:30 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने जाफरी को मानवाधिकार समुदाय की एक दयालु नेता कहा।
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क्या था जकिया जाफरी मामला
 एहसान जाफरी गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार में मारे गए थे। शीर्ष अदालत के समक्ष याचिका में 2017 के गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने मामले में एसआईटी द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने के मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखा था।  गुजरात दंगों के बाद जकिया जाफरी ने 2006 में गुजरात के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक के समक्ष एक शिकायत दर्ज की थी जिसमें हत्या(धारा-302) सहित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी। शिकायत मोदी सहित विभिन्न नौकरशाहों और राजनेताओं के खिलाफ की गई थी। उस समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। 
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जाफरी ने एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ के साथ दी थी चुनौती
वर्ष 2008 में शीर्ष अदालत ने एसआईटी का गठन कर दंगों के संबंध में कई ट्रायल पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा था। बाद में एसआईटी को जाफरी द्वारा दायर शिकायत की जांच करने का भी आदेश दिया था। एसआईटी की रिपोर्ट ने मोदी को क्लीन चिट दे दी। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने अपनी क्लोजर रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया और याचिकाकर्ता को उक्त रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां दर्ज करने की स्वतंत्रता दी गई। वर्ष 2013 में याचिकाकर्ता ने क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करते हुए एक याचिका दायर की। मजिस्ट्रेट ने एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट को बरकरार रखा और जाफरी की याचिका खारिज कर दी। जिसके बाद जाकिया ने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने वर्ष 2017 में मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखा और जाफरी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। जाफरी ने एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ के साथ एसआईटी की क्लीन चिट को स्वीकार करने के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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