आजकल कम सो रहे हैं दुनिया के युवा, शोध में पता चली इसकी वजह
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क्या आपकी दुनिया मोबाइल में सिमट गई है? क्या आप हर वक्त फोन पर लगे रहते हैं ? देर रात सोशल मीडिया पर चैट करते हैं ? या फिर दुनिया भर की दिलचस्प चीजों को ब्राऊज करने के चक्कर में बिस्तर पर भी फोन से ही चिपके रहते हैं? अगर ये सारे काम आप कभी-कभी या हमेशा करते हैं तो जरा संभल जाइये । तेज ब्रॉडबैंड और मोबाइल इंटरनेट आपकी बेशकीमती नींद आपसे ना सिर्फ चुरा रही है बल्कि आपके सेहत को भी नुकसान पहुंचा रही है।
वौज्ञानिकों के एक शोध ने ये पता लगाया है कि तेज गति वाले ब्रॉडबैंड और मोबाइल इंटरनेट की वजह से ज्यादा देर तक मोबाइल में लगे रहने वालो की नींद 25 मिनट तक घटती है। इटली के बोकोनी विश्वविद्यालय के शोध में ये देखा गया कि ज्यदातर युवा तेज गति के ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल करते हैं और सोने के समय भी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं।
इटली के मिलान में बोकोनी विश्वविद्यालय ने अपने शोध में पाया है कि जिन लोगों के इंटरनेट की स्पीड अच्छी होती है वे ऑनलाइन ज्यादा समय बिताते हैं। अच्छी स्पीड की वजह से वे सोने की बजाय रात में देर तक वीडियो देखने, गेम खेलने या सोशल मीडिया पर चैट करने में लगे रहते हैं। इस आदत की वजह से करीब लाखों लोग देर से सो रहे हैं जिससे औसतन आधे घंटे की नींद वो रोज खो रहे हैं। अगले दिन ऑफिस, स्कूल या कॉलेज जाने की वजह से उन्हें जल्दी उठना पड़ता है। इससे उनकी नींद के घंटे कम होते जा रहे हैं।
इंटरनेट की लत
शोध में पाया गया कि जिन लोगों के पास अच्छी इंटरनेट सेवा है, उनके लिए कम से कम 7 घंटे की नींद लेना भी मुश्किल हो गया है। शोधकर्त्ताओं ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जर्मनी में ब्रॉडबैंड स्पीड और लोगों की नींद से जुड़ी आदतों के सर्वे की समीक्षा की है। प्रोजेक्ट प्रमुख फ्रांसिस्को बिलारी का कहना है कि डिजिटल लालच की वजह से लोग बिस्तर पर जाकर भी नहीं सोते और लेटे-लेटे ही मोबाइल से चिपके रहते हैं। इसकी भरपाई वे सुबह देर तक सो कर भी नहीं कर सकते, क्योंकि उनकी दिनचर्या इसकी अनुमति नहीं देती। नतीजतन रोजाना देर से सोकर जल्दी उठना उनकी मजबूरी हो गई है।
भारत से जुड़े आंकड़े
93% - भारतीय नींद की कमी के शिकार
20% - बढ़ गया है नींद से जुड़ी थैरेपी का बाजार।
58% - भारतीयों का काम नींद की वजह से हुआ प्रभावित।
बेडरूम में इंटरनेट है वजह
अमेरिका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के मुताबिक एक-तिहाई लोगों का कहना है कि वे रोजाना भरपूर नींद नहीं ले पाते। ब्रिटेन में 93 प्रतिशत घरों में अच्छी इंटरनेट सेवा है, जिससे लोग देर से सोते हैं। शोधकर्त्ताओं का यह भी कहना है कि बैडरूम का डिजिटलाइजेशन होना एक चिंता की बात है। खासतौर से इससे बच्चों की नींद प्रभावित होने की आशंका ज्यादा है और इसका सीधा प्रभाव उनकी पढ़ाई पर पड़ता है। इकोनॉमिक बिहेवियर एंड आर्गेनाइजेशन जर्नल में छपे शोध में यह सामने आया है कि 13 से 30 साल के लोगों को सोशल मीडिया ज्यादा पसंद है। 31 से 59 साल के लोगों को इंटरनेट पर सर्च करना ज्यादा पसंद है।
इंटरनेट का बाजार
- इंटरनेट उपयोग में भारत दूसरे नंंबर पर
- 50 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्त्ता हैं भारत में
- 29.5 करोड़ शहरी लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं
- 75 करोड़ के करीब उपयोगकर्त्ता चीन में।
इस शोध से साफ पता चलता है कि आधुनिक युग में खराब लाइफ स्टाइल को बढ़ावा बड़े पैमाने पर मोबाइल की वजह से मिल रहा है। युवा और बच्चे भी नींद से जुड़ी कई तरह की बीमारियां और मानसिक रोग से ग्रसित हो रहे हैं। इसलिए मोबाइल से रात में ब्रेक लेना भी आपके लिए बेहद फायदेमंद होगा ताकि आप नियमित नींद ले कर तरोताजा रहें और स्वस्थ रहें।