नई राजनीति में बदली मुद्दों की रवायत: किसान, जवान और युवाओं की धुरी पर घूमती चुनावी सियासत
खेती-किसान और नौजवानों का सवाल अक्सर पार्टियों की राजनीतिक नाभिकीय केंद्र से दूर ही रहा, मगर इस लोकसभा चुनाव में जवान किसान और युवाओं के नाम पर सियासी जंग की तस्वीर बनती दिख रही है। चुनाव से ठीक पहले इन वर्गों को साधने की होड़ से लगता है, मानो नई सदी में शुरू हुई नई तरह की राजनीति में पुराने मुद्दों को नहीं हटाने की कवायद चल रही है।
हाल के वर्षों में किसानों की बदहाली को लेकर अलग-अलग राज्यों में आंदोलनों के एजेंडे में ग्रामीण भारत और किसान प्रमुखता से जगह बना चुके हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इस मुद्दे को भी चुकी है। इसके बाद मोदी सरकार ने किसानों को सीधा नकद देने की शुरुआत की। चार साल तक छाए रहे मुद्दे चुनाव से ठीक पहले नेपथ्य में जाते दिख रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद जनभावनाओं का ज्वार बन चुका है। हालांकि पूरा चुनाव अभियान इसी के इर्द गिर्द रहेगा, ऐसा कहा नहीं जा सकता।
पुलवामा दक्षिण भारत की तुलना में हिंदी भाषी क्षेत्रों की 225 सीटों पर ज्यादा चर्चा में है। राज्यों में बन रहे गठबंधन और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस राफेल, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और शिक्षण संस्थानों की नौकरियों में आरक्षण से छेड़छाड़ के आरोप लगा भाजपा को घेरने का प्रयास कर रही है। वहीं भाजपा पीएम मोदी की मजबूत छवि को आगे रख कर विपक्ष को महत्व ही नहीं देना चाहती। साथ ही गांधी परिवार पर लगे आरोपों के बहाने कांग्रेस पर लगातार प्रहार कर रही है।
भाजपा के दांव
- हर गांव में बिजली, उज्जवला
- आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत
- सवर्ण आरक्षण, तीन तलाक
- किसानों को सीधे नकदी मदद
- विदेशों में देश की मजबूत छवि
- शानदार अर्थव्यवस्था
- अगस्ता वेस्लैंड, जमीन सौदे
- सर्जिकल और एयर स्ट्राइक
विपक्ष के तीर
- राफेल विमान सौदा
- देश में बढ़ती बेरोजगारी
- किसानों की बदहाली
- विदेश गए आर्थिक भगोड़ै
- असहिष्णुता, मॉब लिंचिंग
- नोटबंदी के कारण परेशानी
- जीएसटी से आई समस्याएं
- सीबीआई जैसी संस्थाओं में दखल
इन मुद्दों पर बिछेगी सत्ता की चौसर
पुलवामा हमला और एयर स्ट्राइक सब मुद्दों पर हावी
पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकी हमलों ने आम चुनाव से ठीक पहले कई मुद्दों को फिलहाल पटरी से उतार दिया है। पुलवामा में आतंकी हमले में 40 जवानों की शहादत के बाद इसके जवाब में पाकिस्तान में आतंकी ठिकाने तबाह करने की एयर स्ट्राइक ने विपक्षी मुद्दों को भी ढेर कर दिया है। हालांकि विपक्ष इस ऑपरेशन से जुड़े कुछ सवाल उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
किसान 17 साल में 45,000 करोड़ों का नुकसान
एक रिपोर्ट बताती है कि 17 साल में किसानों ने 45,000 करोड़ों का नुकसान झेला है। घाटे के कारण किसान खेती छोड़ना चाहते हैं। कर्ज के बोझ से होने वाली आत्महत्या रुक नहीं रही। दो दशक में तीन लाख किसानों ने जान दी हैं। वह भी तब, जबकि 2008 में मनमोहन सरकार ने कर्ज माफी की और उसके बाद आई भाजपा सरकार ने फसल की लागत का डेढ़ गुना कीमत देने का दावा किया। अब तो सम्मान निधि योजना से किसानों के खाते में सीधे राशि जानी शुरू हो गई है।
युवा 282 सीटों पर निर्णायक हैं फर्स्ट टाइम वोटर
इस बार 543 में 282 सीटें ऐसी हैं, जहां पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं की औसत संख्या करीब डेढ़ लाख है। पिछले लोकसभा चुनाव में 297 सीटों पर जीत का अंतर इससे कम ही था। ऐसे में निर्णायक युवा आबादी सभी दलों की प्राथमिकता है।आंकड़े बताते हैं कि 2005 से 2015 तक जरूरत 12 करोड़ रोजगार की थी, लेकिन डेढ़ करोड़ ही नौकरियां मिलीं।