{"_id":"676959b5686e1e7b580d0a6b","slug":"young-poet-chandan-acharya-honored-with-sukanta-smriti-award-in-dumdum-2024-12-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"West Bengal: दमदम में युवा कवि चंदन आचार्य 'सुकांत स्मृति पुरस्कार' से सम्मानित, कवितामयी रही शाम","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
West Bengal: दमदम में युवा कवि चंदन आचार्य 'सुकांत स्मृति पुरस्कार' से सम्मानित, कवितामयी रही शाम
सार
पश्चिम बंगाल के युवा कवि चंदन आचार्य को इस वर्ष के प्रतिष्ठित 'सुकांत स्मृति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
युवा कवि चंदन आचार्य 'सुकांत स्मृति पुरस्कार' से सम्मानित
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम बंगाल के युवा कवि चंदन आचार्य को इस वर्ष के प्रतिष्ठित 'सुकांत स्मृति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। एक सांस्कृतिक संध्या में कोलकाता के दमदम में उनको साहित्यिक पत्रिका 'पूषा' ने 2024 के लिए उनके 'आमार ईश्वर' काव्य संग्रह के लिए इस वर्ष के सुकांत स्मृति पुरस्कार से नवाजा। इस इस मौके पर पत्रिका 'पूषा' के प्रमुख संपादक और साहित्यकार गोपाल विश्वास ने वर्तमान बांग्ला साहित्य और पत्रिका के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन
पुरस्कार मिलना मेरे लिए गर्व की बात: आचार्य
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद चंदन आचार्य ने कहा, सुकांत स्मृति पुरस्कार मिलना मेरे लिए गर्व की बात है। यह सम्मान मेरे जीवन में बहुत महत्व रखता है। साहित्य के प्रति मुझे और आधिक काम करने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा, मैंने 'आमार ईश्वर' (मेरे भगवान) काव्य संग्रह को विज्ञान और अध्यात्म के बीच की कड़ी की बात की है। उन्हें यह सम्मान प्रसिद्ध
विज्ञापन
साहित्यकार नलिनी बेरा ने प्रदान किया।
इस दौरान दमदम मतीझिल साइंस कॉलेज ऑडिटोरियम में 'पूषा' पत्रिका द्वारा एक भव्य कविता महोत्सव आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध कथा लेखक नलिनी बेरा, प्रबंधक डॉ. दिनेशचंद्र भट्टाचार्य, फिल्म निर्माता राज बैनर्जी और गणमान्य लोग उपस्थित थे।
विज्ञापन
बांग्ला साहित्य और पत्रिका के उद्देश्य पर एक सुंदर चर्चा
कार्यक्रम की शुरुआत में सुकांत बसु संगीतमय प्रस्तुत से हुआ, जिसने सभी का दिल जीत लिया। 'पूषा' साहित्य परिवार के प्रमुख संपादक और साहित्यकार गोपाल विश्वास ने अपने भाषण में वर्तमान बांग्ला साहित्य और पत्रिका के उद्देश्य पर एक सुंदर चर्चा की।
वर्तमान युग में साहित्यिक अभ्यास पर, साहित्यकार नलिनी बेरा ने अपने शब्दों में बृहदारण्यक उपनिषद का 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' अर्थात मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का संदेश प्रस्तुत किया।
हिंदी अमर उजाला पत्रिका के प्रसिद्ध पत्रकार अर्जुन निराला ने सर्वप्रथम रवींद्रनाथ ठाकुर को प्रणाम करते हुए बांग्ला साहित्य की श्रेष्ठता की बात की। उन्होंने बांग्ला कविता के हिंदी अनुवाद पर विशेष बल दिया। इसके अलावा, फिल्म निर्माता राज बैनर्जी और साहित्यकार कपिलकृष्ण ठाकुर ने भी अपने मूल्यवान विचार प्रस्तुत किए। इसके बाद कवितापाठ का सिलसिला लंबा चला।
यह लोग रहे मौजूद
इस दौरान कवि जगदीश मंडल, समर शंकर चट्टोपाध्याय, प्रियजीत भौमिक, तनिमा मुखोपाध्याय, आवा सरकार मंडल, सुपर्णा बोस, सोमा मुखोपाध्याय, और बर्त्ती चक्रवर्ती सहित लगभग चालीस कवियों ने अपनी कविताएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन कवि और वाचिक कलाकार अभिजीत विश्वास ने किया।