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Yakub Memon: 29 साल पहले जिसने मुंबई को दहलाया उसकी 'कब्र' पर बवाल, जानें आतंकी याकूब मेमन के आंतक की कहानी
Thu, 08 Sep 2022 08:15 PM IST
जयदेव सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जयदेव सिंह
Updated Thu, 08 Sep 2022 08:15 PM IST
सार
1993 के मुंबई बम धमाकों में मुख्य साजिशकर्ता दाऊद इब्राहिम, याकूब मेमन और उसके भाई टाइगर मेमन को 27 जुलाई 2007 को टाडा कोर्ट ने दोषी ठहराया था। 30 जुलाई 2015 की सुबह करीब साढ़े छह बजे उसे फांसी पर लटका दिया गया था।
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याकूब मेमन (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
1993 मुंबई बम धमाके के दोषी आतंकी याकूब मेमन की कब्र को लेकर महाराष्ट्र में सियासी बवाल मच गया है। भाजपा विधायक राम कदम ने पिछली उद्धव ठाकरे सरकार पर कब्र को मजार में बदलने का आरोप लगाया है। राम कदम के आरोपों पर शिवसेना विधायक आदित्य ठाकरे ने भी पलटवार किया है। उन्होंने सवाल पूछा कि जैसे ओसामा बिन लादेन को समुद्र में दफनाया गया था, वैसे ही याकूब मेमन को समुद्र में क्यों नहीं दफनाया गया? जब दफनाया गया तब वहां किसकी सरकार थी? उन्होंने कहा कि बीएमसी चुनाव की वजह से भाजपा यह राजनीति कर रही है।
इस राजनीति के बीच एक बार फिर मुंबई के बम धमाके और याकूब मेमन चर्चा में हैं। आइये जानते हैं आतंकी याकूब मेमन कौन था? कैसे वह सीए से आतंकी बना? कैसे मुंबई बम धमाकों को अंजाम दिया गया? किस तरह से उसे सजा सुनाई गई? और कैसे उसे फांसी दी गई?
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इस राजनीति के बीच एक बार फिर मुंबई के बम धमाके और याकूब मेमन चर्चा में हैं। आइये जानते हैं आतंकी याकूब मेमन कौन था? कैसे वह सीए से आतंकी बना? कैसे मुंबई बम धमाकों को अंजाम दिया गया? किस तरह से उसे सजा सुनाई गई? और कैसे उसे फांसी दी गई?
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याकूब मेमन की कब्र जिस पर निर्माण होने पर हो रहा बवाल।
- फोटो : ANI
1993 में क्या हुआ था?
12 मार्च 1993 को मुंबई में एक के बाद एक 12 बम धमाके हुए थे। इन धमकों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा 713 लोग घायल हुए थे। दोपहर लगभग 1:28 पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की पार्किंग में बम धमाका हुआ था, जिसमें 84 लोगों की मौत और 217 लोग घायल हो जए थे। दादर के लक्की पेट्रोल पंप पर 2:30 पर ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 4 लोगों की मौत और 50 लोग घायल हो गए थे। एयर इंडिया के ऑफिस पर दोपहर के लगभग 2:33 पर धमाका हुआ। इस धमाके में 20 लोगों की जान चली गई, जबकि 87 लोग घायल हो गए। प्लाजा सिनेमा पर 3:13 पर हमला हुआ था। इस ब्लास्ट में 13 लोग मारे गए थे और 37 लोग घायल हो गए थे। जुहू में होटल ट्यूलिप स्टार के पास 3:20 पर ब्लास्ट हुआ था। जिसमें तीन लोग घायल हो गए थे। झवेरी बाजार में हुए बम धमाके में 17 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 57 लोग इसमें घायल हो गए थे।
12 मार्च 1993 को मुंबई में एक के बाद एक 12 बम धमाके हुए थे। इन धमकों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा 713 लोग घायल हुए थे। दोपहर लगभग 1:28 पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की पार्किंग में बम धमाका हुआ था, जिसमें 84 लोगों की मौत और 217 लोग घायल हो जए थे। दादर के लक्की पेट्रोल पंप पर 2:30 पर ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 4 लोगों की मौत और 50 लोग घायल हो गए थे। एयर इंडिया के ऑफिस पर दोपहर के लगभग 2:33 पर धमाका हुआ। इस धमाके में 20 लोगों की जान चली गई, जबकि 87 लोग घायल हो गए। प्लाजा सिनेमा पर 3:13 पर हमला हुआ था। इस ब्लास्ट में 13 लोग मारे गए थे और 37 लोग घायल हो गए थे। जुहू में होटल ट्यूलिप स्टार के पास 3:20 पर ब्लास्ट हुआ था। जिसमें तीन लोग घायल हो गए थे। झवेरी बाजार में हुए बम धमाके में 17 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 57 लोग इसमें घायल हो गए थे।
कौन था याकूब मेमन, उसका इन धमाकों से क्या कनेक्शन था?
इन बम धमाकों का मास्टर माइंड दाऊद इब्राहिम था। याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन 1993 में हुए मुंबई बम धमाके में शामिल आरोपियों में से एक था। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट याकूब मुंबई धमाकों के मुख्य आरोपी इब्राहिम मुश्ताक 'टाइगर' मेमन का भाई था। 30 जुलाई 1962 को पैदा हुआ याकूब बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज था। मेमन परिवार में याकूब ही एक ऐसा इंसान था जो सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा था। 1993 में हुए मुंबई बम धमाके के बाद वह वहां से भाग गया जिसे बाद में नेपाल पुलिस ने काठमांडू हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर भारत को सौंप दिया था। तब से लेकर फांसी होने तक याकूब जेल में ही बंद रहा।
याकूब की अकाउंटिंग कंपनी उसके भाई टाइगर मेमन के दो नंबर के धंधे और गैरकानूनी तरीके से हुई कमाई का हिसाब-किताब रखती थी। याकूब ने इस काम से बहुत पैसा कमाया। इसी कमाई से उसने अल हुसैनी इमारत में छह फ्लैट खरीदे। इसी इमारत में टाइगर ने भी पहले से ही दो ड्यूप्लेक्स ले रखे थे।
इन बम धमाकों का मास्टर माइंड दाऊद इब्राहिम था। याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन 1993 में हुए मुंबई बम धमाके में शामिल आरोपियों में से एक था। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट याकूब मुंबई धमाकों के मुख्य आरोपी इब्राहिम मुश्ताक 'टाइगर' मेमन का भाई था। 30 जुलाई 1962 को पैदा हुआ याकूब बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज था। मेमन परिवार में याकूब ही एक ऐसा इंसान था जो सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा था। 1993 में हुए मुंबई बम धमाके के बाद वह वहां से भाग गया जिसे बाद में नेपाल पुलिस ने काठमांडू हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर भारत को सौंप दिया था। तब से लेकर फांसी होने तक याकूब जेल में ही बंद रहा।
याकूब की अकाउंटिंग कंपनी उसके भाई टाइगर मेमन के दो नंबर के धंधे और गैरकानूनी तरीके से हुई कमाई का हिसाब-किताब रखती थी। याकूब ने इस काम से बहुत पैसा कमाया। इसी कमाई से उसने अल हुसैनी इमारत में छह फ्लैट खरीदे। इसी इमारत में टाइगर ने भी पहले से ही दो ड्यूप्लेक्स ले रखे थे।
कैसे हुई याकूब को फांसी?
1993 के मुंबई बम धमाकों में मुख्य साजिशकर्ता दाऊद इब्राहिम, याकूब मेमन और उसके भाई टाइगर मेमन को 27 जुलाई 2007 को टाडा कोर्ट ने दोषी ठहराया था। कोर्ट ने याकूब को आतंकवाद और विनाशक गतिविधि रोकथाम कानून (टाडा) के तहत फांसी की सजा सुनाई गई। 21 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने भी याकूब मेमन को दोषी करार दिया और उसकी फांसी की सजा बरकार रखी। 30 जुलाई 2015 की सुबह करीब साढ़े छह बजे उसे फांसी पर लटका दिया गया। टाडा की धारा 3 के तहत आतंकवादियों को सहायता और सुविधा पहुंचाने वाले को अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। याकूब को ब्लास्ट करने वाले सैयद अल्ताफ अली मुश्ताक अली को हवाई टिकट उपलब्ध कराने और अन्य लोगों को यातायात सुविधा मुहैया कराने का दोषी पाया गया था।
1993 के मुंबई बम धमाकों में मुख्य साजिशकर्ता दाऊद इब्राहिम, याकूब मेमन और उसके भाई टाइगर मेमन को 27 जुलाई 2007 को टाडा कोर्ट ने दोषी ठहराया था। कोर्ट ने याकूब को आतंकवाद और विनाशक गतिविधि रोकथाम कानून (टाडा) के तहत फांसी की सजा सुनाई गई। 21 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने भी याकूब मेमन को दोषी करार दिया और उसकी फांसी की सजा बरकार रखी। 30 जुलाई 2015 की सुबह करीब साढ़े छह बजे उसे फांसी पर लटका दिया गया। टाडा की धारा 3 के तहत आतंकवादियों को सहायता और सुविधा पहुंचाने वाले को अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। याकूब को ब्लास्ट करने वाले सैयद अल्ताफ अली मुश्ताक अली को हवाई टिकट उपलब्ध कराने और अन्य लोगों को यातायात सुविधा मुहैया कराने का दोषी पाया गया था।