पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री की पोती फातिमा भुट्टो ने की भारतीय पायलट की रिहाई की मांग
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की पोती और लेखिका फातिमा भुट्टो ने बुधवार को पाकिस्तान की इमरान खान सरकार से भारतीय वायुसेना के उस पायलट को रिहा करने के लिए कहा, जिसे एक हवाई संघर्ष के बाद पाकिस्तान ने पकड़ लेने का दावा किया है।
I and many other young Pakistanis have called upon our country to release the captured Indian pilot as a gesture of our commitment to peace, humanity and dignity. My piece in @nytimes https://t.co/Vmd7EWlDvX
— fatima bhutto (@fbhutto) February 27, 2019विज्ञापन
पायलट अभिनंदन को बुधवार को उस समय कथित रूप से पकड़ लिया गया जब वह अपने मिग 21 बाइसन विमान से सुरक्षित बाहर निकल गए थे। हालांकि वह नियंत्रण रेखा पार करके पाकिस्तान की ओर गिरे। भारत ने जिस पायलट के लापता होने की बात कही थी, वह अभिनंदन ही थे।
फातिमा भुट्टो ने न्यूयार्क टाइम्स के लेख में लिखा कि मैं और कई अन्य युवा पाकिस्तानी हमारे देश से आग्रह करते हैं कि शांति, मानवता और प्रतिष्ठा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के एक संकेत के तौर पर भारतीय पायलट को रिहा कर दिया जाए, जिसे पकड़ा गया है।
Pakistan must maintain this profoundly moral stand. It would be an important gesture to release the captured Indian airforce pilot. Our commitment at this moment must be to peace and humanity.
— fatima bhutto (@fbhutto) February 27, 2019
फातिमा ने न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख में लिखा है कि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु सैन्य शक्ति वाले देश हैं, जोकि 1947 में विभाजन के बाद से कई युद्ध कर चुके हैं। हमारी(पाकिस्तान की) सेना 1965, 1971 और 1999 युद्ध का सामना कर चुकी है। इन युद्धों के बीच सैकड़ों बार झड़पें हुई हैं, सीमा पार से हमले और आतंकवाद को गुप्त समर्थन के आरोप लगे हैं।
'ट्विटर वार और सेलिब्रेशन से हतप्रभ हूं'
आगे लिखा है कि उन्होंने कभी अपने देश(पाकिस्तान) और पड़ोसी के बीच शांति नहीं देखा है। लेकिन इस बार की तरह परमाणु शक्ति वाले दोनों देशों के बीच ऐसा ट्विटर वार भी नहीं देखा है। उन्होंने लिखा है कि उन्हें आश्चर्य हो रहा है कि कैसे लोग अपने सोशल एकाउंट्स पर और जगह—जगह प्रदर्शन कर युद्ध जैसी स्थिति को सेलिब्रेट कर रहे हैं।उन्होंने अंत में शांति का समर्थन करते हुए लिखा है कि उनकी पीढ़ी के नौजवानों ने पाकिस्तान में बोलने के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी है और सबसे जरुरी चीज 'शांति' के लिए आवाज उठाते हुए उन्हें कोई डर नहीं। शांति!
(इनपुट: भाषा)