Wrestlers Protest: कुश्ती खिलाड़ियों और सरकार में क्या निकला फॉर्मूला, आंदोलन खत्म कराने की पहल कितनी सफल हुई?
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विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की शनिवार शाम कुश्ती खिलाड़ियों से हुई मुलाकात के बाद यह माना जाने लगा था कि खिलाड़ियों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है। साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया के रेलवे में अपने काम पर वापस लौटने से भी यह माना गया कि आंदोलन वापस हो चुका है। लेकिन सोमवार को खिलाड़ियों ने साफ कर दिया कि वे आंदोलन से वापस नहीं हटे हैं। उनकी मांगों पर विचार हुए बिना आंदोलन वापस नहीं होगा। इसी बीच राकेश टिकैत ने खिलाड़ियों और सरकार के बीच वार्ता को देखते हुए 9 जून को महापंचायत के लिए दिल्ली कूच करने का निर्णय स्थगित कर दिया है।
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भाजपा सूत्रों के मुताबिक, खिलाड़ियों और सरकार में कई मुद्दों पर गतिरोध अभी भी बरकरार है। इसमें खिलाड़ी बृज भूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। खिलाड़ियों ने बृजभूषण शरण सिंह पर से पॉक्सो का मामला वापस लेने से भी इनकार कर दिया है, जबकि सरकार खिलाड़ियों पर पॉक्सो का मामला वापस लेने के लिए कह रही है।
लेकिन इस बात पर सहमति बनी
सरकार और खिलाड़ियों के बीच फिलहाल इस बात पर सहमति बन गई है कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने से बचेंगे। वे अपने कामकाज और खेल की प्रैक्टिस पर लौटेंगे और मामले को तूल देने से बचेंगे। सरकार ने खिलाड़ियों को उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उनके आरोपों पर गंभीरता से जांच करने का आश्वासन दिया है।
इसी बीच बृजभूषण शरण सिंह भी किसी तरह की आपत्तिजनक बयानबाजी नहीं करेंगे और मीडिया में खिलाड़ियों से जुड़ा कोई बयान नहीं देंगे। खिलाड़ियों की इसी सोच को ध्यान में रखते हुए उनकी अयोध्या में 05 जून को होने वाली रैली रद्द कराई गई थी। सरकार बृजभूषण शरण सिंह पर मामला चलाए जाने के बिल्कुल खिलाफ नहीं है। वह उन पर अदालती प्रक्रिया से गुजरते हुए उसके परिणाम पर छोड़ना चाहती है।
भाजपा में भी बृजभूषण को बचाने को लेकर मतभेद
भाजपा के अंदर भी बृजभूषण शरण सिंह पर सरकार के रुख को लेकर चिंता है। विशेषकर उत्तर प्रदेश से जुड़े पार्टी नेता और कार्यकर्ता बृजभूषण शरण सिंह के मामले को लेकर चिंतित हैं क्योंकि इससे पार्टी की छवि खराब हो रही है और इसका आने वाले चुनावों पर असर पड़ सकता है।