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न्यूज डायरी: वंदे भारत में एग्जीक्यूटिव क्लास से हटेंगी 180 डिग्री घूमने वाली सीटें, रेलवे ने दिया प्रस्ताव
Thu, 03 Sep 2026 03:39 AM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 03 Sep 2026 03:39 AM IST
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देश की प्रीमियम सेमी-हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस की लग्जरी में बदलाव की तैयारी चल रही है। रेलवे के वरिष्ठ इंजीनियरों ने एग्जीक्यूटिव क्लास (ईसी) कोच से 180 डिग्री घूमने वाली (रोटेटिंग) सीटों को हटाने का प्रस्ताव दिया है। हाल में हुई प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियरों के सम्मेलन में यह सुझाव दिया गया है।
मौजूदा व्यवस्था में यात्री अपनी सुविधा के अनुसार सीट को घुमा सकते हैं, लेकिन रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन कुर्सियों में बार-बार खराबी आ जाती है। इसके रख-रखाव में काफी दिक्कत आती है। सीटें स्थायी होने से कोच में अतिरिक्त जगह बचेगी, जिससे हर एग्जीक्यूटिव कोच में एक और नई कतार जोड़ी जा सकेगी। इससे यात्रियों की क्षमता और रेलवे की कमाई में इजाफा होगा।
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मौजूदा व्यवस्था में यात्री अपनी सुविधा के अनुसार सीट को घुमा सकते हैं, लेकिन रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन कुर्सियों में बार-बार खराबी आ जाती है। इसके रख-रखाव में काफी दिक्कत आती है। सीटें स्थायी होने से कोच में अतिरिक्त जगह बचेगी, जिससे हर एग्जीक्यूटिव कोच में एक और नई कतार जोड़ी जा सकेगी। इससे यात्रियों की क्षमता और रेलवे की कमाई में इजाफा होगा।
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सरकार ने सभी आईआईटी से पूछा-छात्रों की मेंटल वेलनेस के लिए क्या कदम उठाए
दिग्गज व पुराने आईआईटी दिल्ली का मामला अभी गरमाया है, इसी बीच नए जमाने के आईआईटी मंडी के वरिष्ठ छात्र ने मानसिक तनाव के बाद अपने जीवन को समाप्त कर लिया। ऐसे में केंद्र सरकार की चिंता बढ़ गई है। दिग्गज प्रौद्योगिकी संस्थानों में आत्महत्या के बढ़ते आंकड़ों पर सरकार ने आईआईटी मंडी समेत सभी आईआईटी से रिपोर्ट तलब की है। इसमें पूछा है कि छात्रों का तनाव दूर करने पर उन्होंने क्या-क्या ठोस कदम उठाए हैं।
आईआईटी मंडी का छात्र मानसिक तनाव में था और शिक्षक पता लगाने में नाकाम रहे। क्योंकि, नए सत्र को शुरू हुए डेढ़ महीना हुआ है और छह मौत हो चुकी हैं। सभी कैंपस में मेंटल वेलनेस पर काम करना अनिवार्य है। आईआईटी और एनआईटी कैंपस में छात्रों को तनाव से रोकने के लिए शिक्षकों को मेंटल वेलनेस की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक, नए आईआईटी में छात्र और शिक्षकों के बीच दूरियां नहीं थी। क्योंकि छोटा कैंपस, दूरदराज के इलाकों में बने कैंपस में छात्रों की संख्या कम होने के कारण सभी एक-दूसरे से जुड़े रहते थे। जबकि, बड़े और पुराने आईआईटी में छात्रों की संख्या अधिक और अत्यधिक रिसर्च प्रेशर के कारण शिक्षक हर छात्र की गतिविधि पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। लेकिन इस मामले में पूरानी सभी रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। इसीलिए, सभी आईआईटी से फिर रिपोर्ट मांगी है। ताकि कमियों के आधार पर सुधार किया जा सके।
भाषा, जाति, आर्थिक और घरेलू कारण बड़ी दिक्कत
सुप्रीम कोर्ट की टॉस्क फोर्स की प्रांरभिक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रौद्योगिकी संस्थानों में अंग्रेजी भाषा में दिक्कत, आर्थिक और घरेलू तनाव का बड़ा कारण है। इससे, ग्रामीण व वचिंत वर्ग के छात्रों में आत्मविश्वास कम होता है। वे कैंपस में खुद को अजनबी महूसस करते हैं। इससे कक्षाओं में पिछड़ने लगते हैं।
दिग्गज व पुराने आईआईटी दिल्ली का मामला अभी गरमाया है, इसी बीच नए जमाने के आईआईटी मंडी के वरिष्ठ छात्र ने मानसिक तनाव के बाद अपने जीवन को समाप्त कर लिया। ऐसे में केंद्र सरकार की चिंता बढ़ गई है। दिग्गज प्रौद्योगिकी संस्थानों में आत्महत्या के बढ़ते आंकड़ों पर सरकार ने आईआईटी मंडी समेत सभी आईआईटी से रिपोर्ट तलब की है। इसमें पूछा है कि छात्रों का तनाव दूर करने पर उन्होंने क्या-क्या ठोस कदम उठाए हैं।
आईआईटी मंडी का छात्र मानसिक तनाव में था और शिक्षक पता लगाने में नाकाम रहे। क्योंकि, नए सत्र को शुरू हुए डेढ़ महीना हुआ है और छह मौत हो चुकी हैं। सभी कैंपस में मेंटल वेलनेस पर काम करना अनिवार्य है। आईआईटी और एनआईटी कैंपस में छात्रों को तनाव से रोकने के लिए शिक्षकों को मेंटल वेलनेस की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक, नए आईआईटी में छात्र और शिक्षकों के बीच दूरियां नहीं थी। क्योंकि छोटा कैंपस, दूरदराज के इलाकों में बने कैंपस में छात्रों की संख्या कम होने के कारण सभी एक-दूसरे से जुड़े रहते थे। जबकि, बड़े और पुराने आईआईटी में छात्रों की संख्या अधिक और अत्यधिक रिसर्च प्रेशर के कारण शिक्षक हर छात्र की गतिविधि पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। लेकिन इस मामले में पूरानी सभी रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। इसीलिए, सभी आईआईटी से फिर रिपोर्ट मांगी है। ताकि कमियों के आधार पर सुधार किया जा सके।
भाषा, जाति, आर्थिक और घरेलू कारण बड़ी दिक्कत
सुप्रीम कोर्ट की टॉस्क फोर्स की प्रांरभिक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रौद्योगिकी संस्थानों में अंग्रेजी भाषा में दिक्कत, आर्थिक और घरेलू तनाव का बड़ा कारण है। इससे, ग्रामीण व वचिंत वर्ग के छात्रों में आत्मविश्वास कम होता है। वे कैंपस में खुद को अजनबी महूसस करते हैं। इससे कक्षाओं में पिछड़ने लगते हैं।