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चिंताजनक: भारत सहित सात देशों की 20 नामचीन कंपनियों के उत्पादों का अध्ययन, ब्रांडेड खाद्य उत्पाद कर रहे बीमार

Tue, 05 Dec 2023 06:29 AM IST
यशोधन शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Tue, 05 Dec 2023 06:29 AM IST
सार

शोधकर्ताओं ने कहा कि शीर्ष 20 खाद्य उत्पादों में चीनी, वसा और नमक की मात्रा अधिक होती है। वहीं भारत के पास किसी उत्पाद को अस्वास्थ्यकर या स्वस्थ लेबल करने के लिए कोई पोषक तत्व प्रोफाइल नहीं है।

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Worrying Branded food products are making people sick, 89 percent of 35 thousand samples failed
Packed food - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत सहित दुनिया के सात देशों की 20 नामचीन कंपनियों के 35 हजार खाद्य उत्पादों के नमूने जांच में फेल मिले हैं। ये कंपनियां विज्ञापनों के दम पर इंसानों के स्वास्थ्य को जोखिम में डाल रहे हैं। इनमें शीतल पेय, कन्फेक्शनरी और स्नैक्स जैसे उत्पाद भी शामिल हैं, जो घर-घर में पहुंचकर बच्चों से लेकर वयस्क तक में बीमारियों का जोखिम बढ़ा रहे हैं।

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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन मेडिकल जर्नल ग्लोबलाइजेशन एंड हेल्थ में प्रकाशित हुआ है।  शोधकर्ताओं ने भारत सहित सात देशों ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, यूके और अमेरिका कीं नामचीन 20 कंपनियों के 1294 ब्रांड के कुल 35,550 उत्पादों की जांच की, जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के तय मानकों के अनुसार 89% नमूने फेल साबित हुए, जो स्वास्थ्य के लिहाज से नुकसानदायक हैं। 
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ऊर्जा प्रदान करने वाले अधिकतर उत्पाद पहुंचा रहे सेहत को नुकसान
जनहित में पोषण वकालत (एनएपीआई) के सदस्य डॉ. अरुण गुप्ता ने वैज्ञानिक तथ्यों का इस्तेमाल करते हुए नामचीन कंपनियों के उत्पादों को स्वस्थ और अस्वस्थ रूप में वर्गीकृत किया है। भारत में हम लगातार चॉकलेट या चीनी कन्फेक्शनरी जैसे उत्पादों की मार्केटिंग लगातार बढ़ते देख रहे हैं। जूस से लेकर आइसक्रीम और केक से लेकर ऊर्जा प्रदान करने वाले पेय पदार्थ तक बच्चों से लेकर वयस्कों की दैनिक जीवनशैली में प्रमुखता से शामिल हो रहे हैं, जो सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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सख्ती जरूरी
शोधकर्ताओं ने कहा कि शीर्ष 20 खाद्य उत्पादों में चीनी, वसा और नमक की मात्रा अधिक होती है। वहीं भारत के पास किसी उत्पाद को अस्वास्थ्यकर या स्वस्थ लेबल करने के लिए कोई पोषक तत्व प्रोफाइल नहीं है। अस्वास्थ्यकर उत्पादों पर चेतावनी होनी चाहिए और इनके विज्ञापनों और विपणन को लेकर भी सख्ती होना आवश्यक है।


युवाओं में बढ़ रहा हृदयाघात
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. राजीव कुमार का कहना है कि अगर हम युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक, पोस्ट और लॉन्ग कोविड स्वास्थ्य चुनौतियों की चर्चा करते हैं तो हमें खाद्य उत्पादों के बारे में भी सोचने की जरूरत है। इन उत्पादों के सेवन से शरीर में चर्बी बढ़ती है। खून में खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है और फिर यही हार्ट अटैक या फिर कोरोनरी ब्लॉकेज का कारण भी बनते हैं। उन्होंने एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि आज भारत में लगभग चार में से एक वयस्क को अधिक वजन वाला यानी मोटा माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह जंक फूड का सेवन है। स्कूली बच्चे, कॉलेज छात्र और नौकरीपेशा वाले वयस्क जंक फूड की चपेट में सबसे ज्यादा हैं।

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