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असंभव ऑपरेशन को संभव बनाने वाले आईटीबीपी के डेयरडेविल्स को दुनिया कर रही सलाम

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 08 Jul 2019 08:00 PM IST
आईटीबीपी 'डेयरडेविल्स' टीम
आईटीबीपी 'डेयरडेविल्स' टीम - फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड के नंदा देवी (ईस्ट) के निकट से लापता हुए आठ पर्वतारोहियों के शवों को तलाशना और उन्हें बेस कैंप तक ले आना, इस असंभव रेस्क्यू ऑपरेशन को संभव बनाने वाले आईटीबीपी के जवानों को आज दुनिया सलाम कर रही है। एक ऐसा रेस्क्यू ऑपरेशन, जिसमें मशीनरी यानी हेलीकॉप्टर और सभी तरह के दूसरे उपकरण जवाब दे गए। उम्मीद केवल मानव शरीर और उसके हौसले से थी। आईटीबीपी के जवानों ने दम दिखाते हुए 500 घंटे में आठ पर्वतारोहियों में से सात के पार्थिव शरीर खोज निकाले। नंदा देवी चोटी से करीब 7500 फुट की गहराई में पड़े शवों को बेस कैंप तक लाने के लिए जवानों ने जिस बहादुरी का परिचय दिया, वह इतिहास में अनूठा है।
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आईटीबीपी के डीजी एसएस देसवाल ने सोमवार को रेस्क्यू टीम के सभी 15 'डेयरडेविल्स' सदस्यों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस दल में पर्वतारोही रतन सिंह सोनाल, द्वितीय कमान (खोजी दल के नेता), अनूप कुमार, उप सेनानी (खोजी दल के उपनेता), निरीक्षक (जीडी) हेमंत गोस्वापमी, हैड कांस्टे्बल (जीडी) देवेन्द्र सिंह, हैड कांस्टेबल (जीडी) कलम सिंह, सिपाही (जीडी) कपिल देव, सिपाही (जीडी) प्रदीप पंवार, सिपाही (जीडी) भरत लाल, सिपाही (जीडी) जयप्रकाश सिंह, सिपाही (जीडी) संजय सिंह, सिपाही (जीडी) सुरेंद्र सिंह, एवं स्टाफ सिपाही (मेडिक्स) धीरेंद्र प्रताप, सिपाही (कुक) देवेंद्र सिंह, सिपाही (कुक) मंजीत सिंह एवं हेड कांस्टेबल (टेली) भाग्यशाली मीणा शामिल थे। 

यह रेस्क्यू ऑपरेशन 14 जून को शुरू हुआ था। एपीएस निम्बडिया, डीआइजी आईटीबीपी सेक्टर बरेली ने इस संपूर्ण अभियान की देखरेख की और दल को हर संभव सहायता पहुंचाई। देशवाल के मुताबिक, यह ऑपरेशन विश्व के कठिनतम भू-भाग पर सबसे मुश्किल खोज व पार्थिव शरीरों को नीचे लाने वाले सफल अभियान के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इस प्रकार के रेस्क्यू ऑपरेशनों की आवश्यकताओं के मद्देनजर आईटीबीपी के ट्रेंड पर्वतारोहियों की देखरेख में 05 राज्यों (जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम व अरुणाचल प्रदेश प्रत्येक में 01) के उच्च तुंगता वाले क्षेत्रों में 05 विशेषज्ञ टीमों का गठन किया जाएगा। आईटीबीपी हिमालय में आपदा की परिस्थितियों के लिए फर्स्ट रेस्पोंडर है। बल को इस प्रकार के अभियानों में विशेषज्ञता हासिल है।

ये है आईटीबीपी का 'डेयरडेविल्स' रेस्क्यू ऑपरेशन... 

इस अभियान में ब्रिटेन, अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया के पर्वतारोहियों की मृत्यु हुई है। आईटीबीपी ने शवों को पर्वतारोहण कौशल से सफलतापूर्वक निकालकर प्रशासन को सौंप दिया। 08 पर्वतारोहियों में 04 ब्रिटिश (मार्टिन मोरान-अभियान के नेता, जोहन मेकलारेन, रूपर्ट व्हीवेल व रिचर्ड पेयने), 02 अमेरिकन (एन्थोनी सुडेकुम व रोनॉल्ड बेईमेल), और एक-एक ऑस्ट्रेपलिया (रूथ मैककेन्स) और भारत (चेतन पाण्डेय, संपर्क अधिकारी, भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन) से थे। 04 ब्रिटिश पर्वतारोहियों को 2 जून को हेलीकॉप्टर से सकुशल बाहर निकाल लिया गया, जबकि 03 जून, 2019 को एरियल रैकी के दौरान कुछ पर्वतारोहियों के शरीरों को देखा गयाI 5 जून को हेलीकॉप्टर से वहां उतरने का प्रयास किया गया, लेकिन अत्यधिक हवा गति, वातावरण की सीमाएं, और विषम भू-भाग के कारण यह सफल नहीं हुआ। इसके बाद आईटीबीपी के पर्वतारोहियों की एक रेस्क्यू टीम का गठन किया गया, जिसमें कुल 11 पर्वतारोही दल समेत 15 सदस्य शमिल थे।
 
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