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चिंताजनक: साइबर असुरक्षा और आय असमानता के साथ आर्थिक मंदी भारत के लिए बड़े जोखिम

Thu, 15 Jan 2026 04:55 AM IST
देवेश त्रिपाठी अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 15 Jan 2026 04:55 AM IST
सार

विश्व आर्थिक मंच ने जारी अपनी सालाना वैश्विक जोखिम रिपोर्ट में डीपफेक पर कहा कि इसका प्रसार शुरू हो गया है और राजनीति एवं चुनावी प्रक्रियाओं पर इसका प्रभाव बढ़ रहा है। इसका दुरुपयोग राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ाने के साथ सामाजिक उथल-पुथल मचा सकती है।

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World Economic Forum report Cybersecurity and income inequality with economic slowdown major risks for India
विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

देशों के बीच चल रहे आर्थिक टकराव इस साल दुनिया के लिए सबसे बड़े जोखिम के रूप में सामने आ रहे हैं। हालांकि, भारत के लिए साइबर असुरक्षा सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। इनके साथ आय असमानता, कम सार्वजनिक सेवाएं-सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक मंदी और राज्य आधारित सशस्त्र संघर्ष भी समस्याओं वाले कारण हैं।

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दावोस वार्षिक सम्मेलन से पहले विश्व आर्थिक मंच ने जारी अपनी सालाना वैश्विक जोखिम रिपोर्ट में कहा, भू-आर्थिक टकराव दो वर्षों के लिए सबसे बड़ा जोखिम है। इसमें सालाना आधार पर आठ पायदान का उछाल आया है। इसके बाद गलत सूचना एवं दुष्प्रचार, सामाजिक ध्रुवीकरण, चरम मौसम और अंतरराज्यीय संघर्ष दुनिया के लिए चुनौती बने रहेंगे। 10 वर्षों की लंबी अवधि में मौसम की घटनाएं सबसे बड़ा जोखिम हैं। जैव विविधता का नुकसान व पारिस्थितिकी तंत्र का पतन, पृथ्वी प्रणालियों में परिवर्तन, गलत सूचना और दुष्प्रचार व कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकियों के विपरीत परिणाम भी प्रमुख खतरे के रूप में तेजी से उभर रहे हैं।
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सोशल मीडिया और डीपफेक से भी खतरा
रिपोर्ट में कहा गया है, अमेरिका, आयरलैंड, नीदरलैंड, जापान, भारत, पाकिस्तान व अर्जेंटीना में हाल में हुए चुनावों में सोशल मीडिया पर इस तरह की मनगढ़ंत सामग्री का सामना करना पड़ा है। इसमें काल्पनिक घटनाओं का चित्रण किया गया या राजनीतिक उम्मीदवारों को बदनाम किया गया है। अगले सप्ताह दावोस में होने वाली डब्ल्यूईएफ वार्षिक बैठक में इसके निष्कर्षों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
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दो वर्षों में अशांत रहेगी दुनिया
सर्वेक्षण में शामिल आधे लोगों ने कहा, अगले दो वर्षों में दुनिया अशांत या तूफानी रहेगी। यह पिछले वर्ष की तुलना में 14 फीसदी अधिक है। 40 प्रतिशत ने माना स्थिति कम से कम अस्थिर रहेगी। अगले 10 वर्षों में 57 फीसदी लोग अशांत या तूफानी दुनिया की उम्मीद करते हैं। 32 फीसदी अस्थिरता की उम्मीद करते हैं। प्रमुख शक्तियां अपने हितों के क्षेत्रों को सुरक्षित करने की कोशिश कर रही हैं, जिससे एक नई प्रतिस्पर्धी व्यवस्था आकार ले रही है।

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यूपीआई की तारीफ: दुनियाभर की सरकारों के लिए बड़ा उदाहरण
विश्व आर्थिक मंच ने यूपीआई की तारीफ करते हुए इसे दुनियाभर की सरकारों के लिए अच्छा उदाहरण बताया। साथ ही कहा, इसकी मदद से वे अपने बैंकिंग सिस्टम को अधिक आकर्षक और भविष्य में संभावित वैश्विक ऋण या वित्तीय संकटों के सामने अधिक लचीला बनाने के लिए कदम उठा सकते हैं। 

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