विश्व मधुमेह दिवस: ज्यादा मोटी कमर वाली महिलाओं में डायबिटीज का खतरा
अगर किसी महिला की कमर 31 इंच यानी तकरीबन 80 सेंटीमीटर से ज्यादा है तो उसे मधुमेह हो सकता है। कमर और हिप अनुपात के जरिये इसका अनुमान भी लगाया जा सकता है। यह मधुमेह के प्रमुख लक्षणों में से एक है। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों के युवाओं में मधुमेह का टाइप-2 भी देखने को मिल रहा है। मंगलवार को विश्व मधुमेह दिवस है।
इस पर साउथ एशियन फेडरेशन ऑफ एंडोक्राइन सोसायटी के उपाध्यक्ष डॉ. संजय कालरा का कहना है कि मधुमेह का पता चलते ही महिलाओं में मानसिक और मनोवैज्ञानिक आघात देखने को मिलते हैं। जो कि उनके लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। इसलिए जीवनशैली में बदलाव लाकर सामान्य जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।
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तेजी से बढ़ रहे हैं मरीज
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 5 करोड़ मधुमेह मरीज हैं। जबकि दुनिया भर में इनकी तादाद 42 करोड़ तक पहुंच चुकी है। नेशनल हेल्थ सर्वे 2016 के अनुसार, भारतीय महिलाओं में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2005 तक 12.6 फीसदी महिलाएं इसका शिकार थी। लेकिन अब यह आंकड़ा 20.7 फीसदी पर पहुंच चुका है।
मरीजों को पायरिया का संकट
साउथ एक्स डेंटल की वरिष्ठ डॉक्टर उन्नति गुप्ता बताती हैं कि मधुमेह मरीजों के दांतों में पायरिया फैलने की आशंका सामान्य से कई गुना ज्यादा होती है। रक्त में शुगर ज्यादा होने से मुंह में कीटाणु पनपने के लिए उपयुक्त माहौल बन जाता है।
इन बातों पर तत्काल अमल करें
ब्लड प्रेशर को कम और धूम्रपान को तुरंत छोड़ दें।
मधुमेह से पहले शुगर और कोलेस्ट्रोल को नियंत्रण में करना जरूरी है।
प्रतिदिन सुबह या शाम आधा घंटा पैदल जरूर चलें।
प्रतिदिन 8 घंटे की नींद आवश्यक है, सुबह उठते ही प्राणायाम करें।
रोजाना 8 से 10 गिलास पानी पीएं और खाली पेट बिल्कुल नहीं रहना चाहिए।
दिनभर में थोड़ी-थोड़ी देर से आहर लेते हैं, तो काफी फायदेमंद हो सकता है।
मधुमेह मरीजों में आयुर्वेद कारगर
मधुमेह से लोगों को बचाने के लिए हर्बल चिकित्सा काफी अहम भूमिका निभा रही है। हाल ही में विज्ञान मंत्रालय के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की आयुर्वेद दवा बीजीआर-34 को देश में टॉप 20 का दर्जा प्राप्त हुआ है।
लखनऊ स्थित सीएसआईआर की प्रयोगशाला नेशनल बॉटनीकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) के वैज्ञानिक डॉ. ए. के. एस. रावत ने बताया कि फार्मास्युटिक मार्केट रिसर्च आर्गेनाइजेशन एआईओसीडी अवाक्स की ताजा रिपोर्ट में पिछले दो सालों के भीतर बाजार में आने वाले 6414 दवा ब्रांडों में से टॉप-20 को चुना गया था, जिसमें सीएसआईआर की मधुमेह रोधी दवा बीजीआर-34 को भी शामिल किया है।
डॉ. रावत ने बताया कि हर्बल चिकित्सा की उपयोगिता, प्रभावकारिता और मांग बढ़ी है, जिससे यह कहना गलत नहीं कि मधुमेह ग्रस्त मरीजों में आयुर्वेद की ओर रुझान काफी बढ़ा है। एमिल फार्मास्युटिकल के कार्यकारी निदेशक संचित शर्मा ने कहा कि दवा विपणन के साथ-साथ लोगों में मधुमेह के खिलाफ जागरूकता पैदा करने के लिए शिविरों का भी आयोजन किया जा रहा है।