World Blood Donor Day: मजबूर नहीं, मजबूत रक्तदाता बनें, 450 मिलीलीटर खून बचा सकता है चार जिंदगियां
रक्तदाता दो तरह के होते हैं...एक जो मजबूरी में रक्तदान करते हैं। इन्हें रिप्लेसमेंट डोनर कहा जाता है और दूसरे वो, जो मजबूत इच्छा शक्ति के साथ रक्तदान करते हैं। इन्हें वाॅलंटियर डोनर कहा जाता है। आपका एक यूनिट खून चार लोगों का जीवन बचा सकता है, इसलिए विश्व रक्तदाता दिवस पर एक मजबूत रक्तदाता बनने का संकल्प लीजिए। रक्तदान के महत्व को बताती परीक्षित निर्भय की यह रिपोर्ट...
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विस्तार
14 जून को कार्ल लैंडस्टीनर का जन्म हुआ था। यही वे वैज्ञानिक हैं, जिन्हें ए, बी और ओ रक्त समूह खोजने का श्रेय दिया जाता है। इस खोज के लिए ही लैंडस्टीनर को वर्ष 1930 में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी खोज चिकित्सा की दुनिया में मील का पत्थर मानी जाती है, क्योंकि इसके बाद जरूरतमंद मरीज को रक्त चढ़ाने की शुरुआत हुई...और इसीलिए 2004 से लैंडस्टीनर के जन्मदिन को हर साल विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है...रक्त दो, प्लाज्मा दो, जीवन में हिस्सा दो।
इसलिए जरूरी है रक्तदान
दिल्ली एम्स में नर्सिंग अधिकारी और अब तक 100 से भी ज्यादा शिविर में 25 हजार से अधिक यूनिट रक्त एकत्रित करने वाले कनिष्क बताते हैं कि देश के बड़े अस्पतालों में अक्सर बाहरी मरीजों के लिए रक्तदाता लाना बहुत मुश्किल होता है। कई बार रक्त का इंतजार काफी लंबा भी होता है। वाॅलंटियर डोनर बनने से आप उनके इस इंतजार को कम कर सकते हैं।
दिल्ली जैसे शहरों के लिए बड़ी परेशानी
इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी की डॉ. वानश्री सिंह बताती हैं कि दिल्ली जैसे बड़े महानगरों के लिए रक्त की आपूर्ति बहुत बड़ी परेशानी है। यह इसलिए क्योंकि इन शहरों में मरीजों की संख्या काफी अधिक है। उदाहरण के लिए दिल्ली एम्स है, जहां आठ से भी ज्यादा राज्यों के मरीज इलाज कराने आते हैं। इन्हें जब रक्त की जरूरत पड़ती है, तो रिश्तेदार या दोस्तों की मदद लेनी पड़ती है। हालांकि, हरियाणा या फिर अन्य राज्य की स्थिति देखें तो वहां किसी भी तरह काम चल जाता है। लेकिन बड़े शहरों के लिए यह मुश्किल होता है।
छह दशकों से कर रहीं रक्तदान
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार, जोसफीन माइकलुक ने अपने पूरे जीवन में 203 यूनिट रक्तदान किया है, जिससे अनगिनत अन्य लोगों की जान बची है। वह लगभग छह दशकों से नियमित रूप से रक्तदान कर रही हैं, जिसकी शुरुआत 1965 से 22 वर्ष की उम्र में हुई थी।
रक्तदान से पहले नींद पूरी होना जरूरी
कनिष्क बताते हैं कि शहरी जीवनशैली में नींद पूरी न ले पाना एक बड़ी परेशानी बन रहा है। लेकिन, रक्तदान से पहले जरूरी है कि आपने अच्छे से नींद ली हो। इसी तरह, शराब सेवन के 48 घंटे के भीतर भी रक्तदान नहीं करना चाहिए।
2.50 लाख ग्राम पंचायतों में होगा रक्तदान
हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को पत्र लिख 14 जून को सभी ग्राम पंचायतों में रक्तदान शिविर लगाने की अपील की है। साथ ही, कहा है कि पंचायत के सरपंच कार्यक्रम के दौरान लोगों को जीवन में आगे भी रक्तदान करने का संकल्प दिलाएंगे।
कौन-कौन कर सकता है रक्तदान?
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली के डॉ. अजय शुक्ला का कहना है कि 18 से 65 वर्ष के बीच उम्र का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति, जिसका हीमोग्लोबिन 12.5 फीसदी से ज्यादा और वजन कम से कम 45 किलोग्राम हो, रक्तदान कर सकता है। अगर शुगर स्तर 225 तक है और व्यक्ति इंसुलिन नहीं लेता तो वह भी रक्तदान कर सकता है। रक्तदाता के लिए यह भी जरूरी है कि वह लंबे समय से किसी दवा का सेवन न कर रहा हो। हाल में कोई ऑपरेशन, चोट न लगी हो और रक्त से संबंधित कोई बीमारी न हो।
रक्तदान...इसलिए है महादान
रक्त कृत्रिम तौर पर बनाया नहीं जा सकता। एक व्यक्ति के शरीर में 5 से 6 लीटर रक्त होता है। वह हर 90 दिन में रक्तदान कर सकता है। रक्त से लाल कणिकाएं, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और क्रायोप्रेसिपिटेट अलग कर उपयोग किए जाते हैं। प्लाज्मा 24 से 48 घंटे, लाल रक्त कोशिकाएं तीन सप्ताह और प्लेटलेट्स व श्वेत रक्त कोशिकाएं मिनटों में फिर बन जाती हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े
- देश में करीब 3300 ब्लड बैंक हैं जिनमें से 1100 राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण सोसायटी (नाको) के अधीन हैं। सभी ब्लड बैंक रक्त की 78% आपूर्ति स्वैच्छिक रक्तदाताओं से प्राप्त करते हैं।
- देश में करीब 80 से 90 लाख यूनिट रक्त दान में मिलता है। करीब एक लाख थैलेसीमिया मरीज ऐसे हैं, जिन्हें महीने में दो से चार यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है।
- दिल्ली-एनसीआर की बात करें तो यहां हर वर्ष करीब 40 हजार यूनिट रक्त एकत्रित किया
- जाता है।
- 36 हजार से ज्यादा रक्त एकत्रित करने पर पिछले साल केंद्र की ओर से मध्य प्रदेश को पहला पुरस्कार भी मिला है।
- रक्तदान से कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि इसके कई फायदे हैं। यह दिल के दौरे के खतरे को कम करता है।
- रक्तदान करने से आयरन के स्तर को संतुलित रखने में भी मदद मिलती है।