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Report: प्राकृतिक गैस की बर्बादी ऊर्जा का अपव्यय, जलवायु पर संकट; 17 वर्षों के रिकॉर्ड स्तर पर गैस फ्लेरिंग

Mon, 04 Aug 2025 05:14 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 04 Aug 2025 05:14 AM IST
सार

वर्ल्ड बैंक की नई रिपोर्ट ‘ग्लोबल गैस फ्लेरिंग ट्रैकर 2025’ के अनुसार बीते वर्ष 151 अरब घन मीटर गैस फ्लेयर की गई, जिससे 38.9 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हुआ। इस स्तर की गैस फ्लेरिंग न केवल जलवायु परिवर्तन को भड़काने वाली है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा असमानता को भी और गहरा करती है। 

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World Bank report: Burning of natural gas released during oil production 17-year high
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik

विस्तार

एक ओर जब दुनिया के करोड़ों लोग ऊर्जा की मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं तो दूसरी ओर गैस फ्लेरिंग, अर्थात तेल उत्पादन के दौरान निकलने वाली प्राकृतिक गैस को जलाकर बर्बाद करना, 2024 में अपने 17 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

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वर्ल्ड बैंक की नई रिपोर्ट ‘ग्लोबल गैस फ्लेरिंग ट्रैकर 2025’ के अनुसार बीते वर्ष 151 अरब घन मीटर गैस फ्लेयर की गई, जिससे 38.9 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हुआ। इस स्तर की गैस फ्लेरिंग न केवल जलवायु परिवर्तन को भड़काने वाली है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा असमानता को भी और गहरा करती है। 2000 के दशक की शुरुआत में जो सुधार की उम्मीद दिख रही थी, अब वह रुक सी गई है। यह दरअसल तकनीक और नीति की असफलता का प्रतीक है। 2024 में हुई कुल गैस फ्लेरिंग का 76% हिस्सा केवल 9 देशों से आया। रूस, ईरान, इराक, अमेरिका, वेनेजुएला, अल्जीरिया, लीबिया, मैक्सिको और नाइजीरिया। रूस, ईरान और इराक मिलकर कुल फ्लेरिंग का 46% हिस्सा करते हैं। रूस और ईरान में फ्लेरिंग में लगातार वृद्धि देखी गई है। अमेरिका में फ्लेरिंग इंटेंसिटी में 50% की कमी हुई है, जो अब दुनिया में सबसे कम है। 2012 में इन 9 देशों की संयुक्त हिस्सेदारी 65% थी, जो अब बढ़कर 76% हो चुकी है। यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर समस्या कुछ ही देशों में केंद्रित होती जा रही है।
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वर्ल्ड बैंक ने दिखाई राह, नीतिगत बदलाव लाए असर
वर्ल्ड बैंक की पहल से जुड़े देशों ने 2012 से अब तक फ्लेरिंग इंटेंसिटी में औसतन 12% की गिरावट दर्ज की है, जबकि गैर-सदस्य देशों में यह 25% बढ़ी है। इनमें ब्राजील, कोलंबिया, मिस्र, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान जैसे देशों ने न केवल गैस फ्लेरिंग घटाई बल्कि इसे ऊर्जा, रोजगार और सतत विकास में तब्दील करने की दिशा में भी कार्य किया है।


मीथेन अदृश्य लेकिन खतरनाक
रिपोर्ट के सबसे चौंकाने वाले आंकड़ों में शामिल है गैस फ्लेरिंग से निकली 4.6 करोड़ टन मीथेन गैस, जो कार्बन डाइऑक्साइड से कई गुना अधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है। इसकी मौजूदगी तापमान वृद्धि को और तीव्र बनाती है। साथ ही यह स्थानीय प्रदूषण बढ़ाकर मानव स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती है।

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ऊर्जा का अपव्यय नहीं अवसर का दोहन चाहिए
गैस फ्लेरिंग एक तकनीकी या आर्थिक चुनौती नहीं, नीतिगत इच्छा शक्ति की परीक्षा है। यदि सरकारें और कंपनियां संकल्प लें तो यह अपशिष्ट गैस आने वाले वर्षों में नवाचार और विकास का ईंधन बन सकती है। रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है। गैस फ्लेरिंग रोकी जा सकती है। इसके लिए चाहिए मजबूत पर्यावरण नीति, प्रभावी तकनीकी समाधान। अगर यह अपव्यय रोका जाए तो न केवल प्रदूषण घटेगा बल्कि ऊर्जा की उपलब्धता, रोजगार सृजन और स्थायी विकास के नए द्वार खुलेंगे।

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