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वर्ल्ड ऑथराइटिस डे : चिकनगुनिया से बढ़ेगी देश में ऑथाराइटिस मरीजों की संख्या

Wed, 12 Oct 2016 12:28 AM IST
पवन कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
पवन कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Oct 2016 12:28 AM IST
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World Arthritis Day : arthritis patients number will increase in the country due to  Chikungunya
- फोटो : getty images

चिकनगुनिया के बढ़ते मरीजों की वजह से देश में ऑथराइटिस मरीजों की संख्या बढ़ना तय है। चिकनगुनिया के करीब 20 से 40 फीसदी मरीजों में भविष्य में ऑथराइटिस का खतरा है। वैसे मरीज जिनको चिकनगुनिया की वजह से शरीर में करीब एक माह तक दर्द रहा हो वैसे मरीजों में बीमारी का खतरा ज्यादा है। इस वर्ष अब तक देश में आधिकारिक तौर पर चिकनगुनिया के 26,385 मरीज पंजीकृत हुए हैं। 

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की रिमोट््यॉड ऑथराइटिस विभाग की प्रमुख डॉ.उमा कुमार ने बताया कि चिकनगुनिया में जोड़ों का तेज दर्द होता है और लंबे समय तक रहता है। ऐसे मरीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी हो जाती है जिसकी वजह से भविष्य में ऐसे मरीजों में ऑथराइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है। अलग-अलग सर्वे के अनुसार देश की करीब आठ से 18 फीसदी आबादी ऑथराइटिस की बीमारी से पीड़ित है। 
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डॉ.कुमार ने बताया कि देश-विदेश में हुअए अलग-अलग शोध से स्पष्ट हुआ है कि धूम्रपान, प्रदूषण, मोटापा, दांतों में संक्रमण ऑथराइटिस की एक बड़ी वजह है। डॉ.कुमार ने बताया कि करीब 200 तरह की ऑथराइटिस होती है जिसमें देश में सबसे आम रिमोट्यॉड ऑथराइटिस है। 

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ऑथराइटिस में दर्द सुबह के समय सबसे ज्यादा होता है

World Arthritis Day : arthritis patients number will increase in the country due to  Chikungunya
मैक्स अस्पताल के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के निदेशक डॉ.रमणीक महाजन ने बताया कि ऑथराइटिस में दर्द सुबह के समय सबसे ज्यादा होता है। यही नहीं गर्मी की तुलना में सर्दी के मौसम में ऑथराइटिस मरीजों की परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है। 

आरएफ और एसीपीए जांच से रिमोट्यॉड ऑथराइटिस से बचाव 
एम्स की रिमोट्यॉड ऑथराइटिस विभाग की प्रमुख डॉ.उमा कुमार ने बताया कि शुरुआती दौर में ही खून में रिमोट्यॉड फैक्टर (आरएफ) और एंटी सिट्रूलिनेट प्रोटिन एंटीबॉडीटेस्ट (एवीपीए) कर बीमारी का पता लगाया जा सकता है और बीमारी होने से पहले ही उस पर काबू पाया जा सकता है। 

लक्षण
जोड़ों में सूजन और दर्द, लंबे समय तक बुखार रहना, मुंह और आंख में सूखापन, थूक अथवा कफ के साथ खून आना इसके अलावा भी लक्षण हो सकते हैं। 
कारण
धूम्रपान, मोटापा, दांतों में संक्रमण, प्रदूषित हवा में अधिक समय तक रहना, कंप्यूटर पर अधिक समय तक खराब तरीके से बैठना, खान-पान में कमी, विटामिन डी की कमी, शारीरिक श्रम कम करना व कुछ अन्य कारण। 
बचाव
पौष्टिक आहार का सेवन, नियमित व्यायाम, सूर्य की रोशनी में रहना जरूरी, ज्यादा चीनी और नमक से परहेज, मोटापा पर नियंत्रण रखने से बहुत हद तक बीमारी से बचाव संभव है। 
 
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