{"_id":"68836f302b32fa8a90088bd7","slug":"wont-accept-any-government-post-after-retirement-cji-bhushan-gavai-at-event-in-native-village-in-maharashtra-2025-07-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"CJI Bhushan Gavai: 'सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं करूंगा', मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई का बयान","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
CJI Bhushan Gavai: 'सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं करूंगा', मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई का बयान
Fri, 25 Jul 2025 05:19 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Fri, 25 Jul 2025 05:19 PM IST
सार
सीजेआई गवई ने दारापुर जाने वाले रास्ते में आरएस गवई के नाम पर बनने वाले एक भव्य द्वार की आधारशिला भी रखी। उन्होंने अमरावती जिले के दरियापुर कस्बे में एक न्यायालय भवन का उद्घाटन भी किया। अब शनिवार को वह अमरावती जिला एवं सत्र न्यायालय में स्वर्गीय टीआर गिल्डा स्मारक ई-लाइब्रेरी का उद्घाटन करेंगे।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई
- फोटो : ANI
विस्तार
महाराष्ट्र के अमरावती जिले में अपने पैतृक गांव में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने बड़ी बात कह दी। सीजेआई बीआर गवई ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं करूंगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'मैंने निर्णय लिया है कि सेवानिवृत्ति के बाद मैं कोई भी सरकारी पद स्वीकार नहीं करूंगा। सेवानिवृत्ति के बाद मुझे और समय मिलेगा। इसलिए मैं दारापुर, अमरावती और नागपुर में अधिक समय बिताने का प्रयास करूंगा। सीजेआई गवई इस साल नवंबर में सेवानिवृत्त होंगे।
विज्ञापन
इससे पहले गांव पहुंचने पर भारी संख्या में लोगों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश का स्वागत किया। उन्होंने अपने पिता, केरल और बिहार के पूर्व राज्यपाल आरएस गवई की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की और कुछ पारिवारिक सदस्यों के साथ उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुए।
विज्ञापन
'न्याय को घर-द्वार तक पहुंचाने के लिए न्यायपालिका का विकेंद्रीकरण जरूरी'
सीजेआई गवई ने वादियों के घर-द्वार तक न्याय पहुंचाने के लिए न्यायपालिका के विकेंद्रीकरण का सुझाव दिया। दरियापुर कस्बे में एक न्यायालय भवन का उद्घाटन करने के बाद एक समारोह में बोलते हुए मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि न्यायिक अवसंरचना समिति के प्रमुख के रूप में उन्होंने नए तालुका और जिला-स्तरीय न्यायालयों की स्थापना का एक मॉडल तैयार किया है। यह काम हो रहा है, लेकिन अदालतों और सरकार में लालफीताशाही एक जैसी है।
विज्ञापन
करियर बनाने से पहले प्रशिक्षुता प्राप्त करें
उन्होंने कनिष्ठ वकीलों को सलाह दी कि वे अपना करियर बनाने से पहले प्रशिक्षुता प्राप्त करें। उन्होंने आगाह करते हुए कहा, 'अगर कोई बिना किसी अनुभव के अदालतों में बहस करना चाहता है और छह महीने में मर्सिडीज या बीएमडब्ल्यू का मालिक बनना चाहता है, तो उसे उनके उद्देश्य को समझने की जरूरत है।'
पद और प्रतिष्ठा को दिमाग पर हावी न होने दें
मुख्य न्यायाधीश गवई ने नए विधि स्नातकों को सलाह दी कि वे वकीलों से जुड़े पद और प्रतिष्ठा को अपने दिमाग पर हावी न होने दें। उन्होंने कहा, 'मैंने देखा है कि कनिष्ठ वकील अपने वरिष्ठों को सीट नहीं देते। इसी तरह एक ऐसा मामला भी आया जब एक कनिष्ठ वकील को न्यायाधीश द्वारा बर्खास्त किए जाने पर अदालत में बेहोश हो गया। न्यायाधीश और वकील दोनों समान भागीदार हैं। कुर्सी लोगों की सेवा के लिए है और इससे जुड़ी शक्ति को उनके दिमाग पर हावी नहीं होने देना चाहिए।'