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महिला वोट बैंक की जबर्दस्त ताकत: रिटर्न गिफ्ट मॉडल ने बदले समीकरण, बिहार में आधी आबादी ने लिखा नया जनादेश
Sat, 15 Nov 2025 06:11 AM IST
शिवम गर्ग
हिमांशु मिश्र
हिमांशु मिश्र
Published by: शिवम गर्ग
Updated Sat, 15 Nov 2025 06:11 AM IST
सार
बिहार चुनाव 2025 में महिलाओं ने रिकॉर्ड मतदान कर सियासत की नई पटकथा लिखी। सीएम स्वरोजगार योजना, मुफ्त सुविधाओं और महिला-केंद्रित योजनाओं ने आधी आबादी को सबसे बड़ा वोट बैंक बना दिया।
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मतदान के समय केंद्रों पर लगी महिलाओं की लंबी कतारों ने परिणाम की ओर इशारा कर दिया था।
- फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
विस्तार
बिहार चुनाव के जरिए महिलाओं ने सियासत की नई पटकथा लिखी है। आधी आबादी ने जनादेश के जरिये साफ कर दिया है कि वह अब सियासत का सबसे भरोसेमंद, सबसे मजबूत और सबसे नया वोट बैंक है। ऐसा वोट बैंक, जो अपने जीवन की राह आसान करने वाले फैसलों, नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं का जाति-धर्म के बंधन से ऊपर उठकर तत्काल, सुनिश्चित और जबर्दस्त रिटर्न गिफ्ट देता है। लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के चुनावों और अब बिहार के नतीजों ने इसे साबित किया है।
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पिछले विधानसभा चुनाव में, जब इन्हीं महिला मतदाताओं को लगा कि नीतीश सरकार संकट में है, तो वे उसके समर्थन में चट्टान की तरह डट गईं। यही आधी आबादी इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रचंड बहुमत का कारण बनी। सीएम स्वरोजगार योजना के तहत 1.20 करोड़ महिलाओं को मिली दस हजार रुपये की सहायता और जीविका दीदी-सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि के फैसले के बाद महिलाओं ने एनडीए को तीन चौथाई बहुमत का रिटर्न गिफ्ट दिया। जाति-धर्म की डोर तोड़ते हुए पुरुषों के मुकाबले नौ फीसदी अधिक मतदान कर सत्तारूढ़ एनडीए की जीत पर उठ रहे सवालों को पीछे छोड़ दिया।
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हर योजना का योगदान
महिलाओं को सशक्त वोट बैंक बनाने में कई योजनाओं ने अहम भूमिका निभाई। मसलन, शराबबंदी योजना से राज्य में घरेलू हिंसा में कमी आई। मुफ्त बिजली, मुफ्त अनाज, मुफ्त शौचालय, सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि में बढ़ोतरी ने महिलाओं के जीवन को आसान बनाया।
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महिला मतदाता केंद्रित प्रयोग हर राज्य में रहा सफल
महिला मतदाताओं को अलग से साधने का सिलसिला मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना से शुरू हुआ। इसकी सफलता के बाद यह मॉडल कई राज्यों ने अपनाया। हरियाणा में नायबसिंह सैनी सरकार की दीनदयाल लाडो योजना और महाराष्ट्र में शिंदे सरकार की लाडकी बहिन योजना गेमचेंजर साबित हुई। 2024 में ही झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार की मैया सम्मान योजना के कारण भाजपा पूरी ताकत लगा कर भी सत्ता परिवर्तन नहीं करा सकी। अब बिहार ने भी महिला हितैषी योजनाओं से वही परिणाम दोहराए हैं।
यूं ही नहीं हुआ भरोसा
जाति आधारित राजनीति की जकड़न में फंसे बिहार में महिलाओं को एक अलग वोट बैंक बनाने का श्रेय नीतीश कुमार को जाता है। पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने साइकिल योजना और छात्राओं के लिए विशेष छात्रवृत्ति की शुरुआत की थी। इसके बाद उनकी सरकार ने सरकारी नौकरियों, पंचायत चुनावों और योजनाओं में महिला आरक्षण का मार्ग प्रशस्त कर आधी आबादी का भरोसा जीता। इस चुनाव में नीतीश के लिए सीएम स्वरोजगार योजना वरदान साबित हुई।