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Supreme Court: 'महिलाओं को जल्द मिले मुआवजा', यौन उत्पीड़न मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया सख्त निर्देश

Thu, 07 Nov 2024 04:40 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 07 Nov 2024 04:40 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने यौन उत्पीड़न ममले में अपना सख्त रवैया अनाया है। SC ने सभी ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वे महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े यौन उत्पीड़न व शारीरिक चोटों के मामलों में फैसला देते समय पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दें।

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Women should get compensation soon', Supreme Court issued strict instructions in sexual harassment case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सभी ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वे महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े यौन उत्पीड़न व शारीरिक चोटों के मामलों में फैसला देते समय पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दें। साथ ही, कोर्ट ने जिला एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों को आदेश दिया कि वे निर्देशों का तेजी से क्रियान्वयन करें, ताकि ऐसे मामलों में पीड़ितों को जल्द से जल्द मुआवजा मिल सके।
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जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस पंकज मित्थल की पीठ ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के प्रावधानों के तहत दुष्कर्म और हमले के दोषी व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। पीठ ने कहा, ऐसे मामलों में ट्रायल कोर्ट तथ्यों व परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और मौजूद सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते या बरी करते हुए समय पीड़ित को मुआवजा देने का आदेश दें।
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ट्रायल कोर्ट को दिया निर्देश
संदर्भित मामले में ट्रायल कोर्ट ने दोषी व्यक्ति को नाबालिग पीड़िता को मुआवजा देने के लिए निर्देश नहीं दिया था। पीठ ने कहा, इस तरह की चूक से सीआरपीसी की धारा 357ए के तहत किसी भी मुआवजे के भुगतान में देरी होगी। लिहाजा, फैसला देते वक्त ही मुआवजे का आदेश करना चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया कि अंतरिम मुआवजे के भुगतान के लिए भी निर्देश दिया जा सकता है।
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वहीं इस मामले में हाईकोर्ट और जिला अदालतों को भेजें आदेश : सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को आदेश भेजने का निर्देश दिया। उनसे अनुरोध किया कि वे सभी जिला व सत्र न्यायालय के न्यायाधीशों को आदेश भेजें।
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