Women's Day 2024: बुरहान वानी का एनकाउंटर करने वाली एसीपी शाहिदा परवीन बोलीं- मैंने कभी चूड़ियां नहीं पहनीं
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विस्तार
कश्मीर के दुर्दांत आतंकी बुरहान वानी को एक एनकाउंटर में मौत की नींद सुलाने वाली एसीपी शाहिदा परवीन पहले कभी चूड़ी नहीं पहनती थीं। उन्हें 'चूड़ी पहनने वाली औरत' बनना पसंद नहीं था। वे चाहती थीं कि कोई उन्हें किसी भी तरीके से कमजोर न समझे। यही कारण है कि वे कभी चूड़ी नहीं पहनती थीं। हालांकि, अब वे कभी-कभी चूड़ियां पहन लेती हैं।
शाहिदा परवीन ने अमर उजाला से कहा कि जब वे एनकाउंटर के लिए जाती थीं, तो कई बार एक ही स्थान पर लगातार कई घंटों तक बिना कुछ खाए-पिए रहना पड़ता था, लगातार चलना पड़ता था। लेकिन इस दौरान वे कभी कमजोर नहीं पड़ती थीं. कभी बैठती तक नहीं थीं। केवल यह सोचकर कि यदि वे बैठ गईं, तो एनकाउंटर में शामिल उनके अन्य साथी यही समझेंगे कि औरत होने के कारण कमजोर पड़ गई। लेकिन वे किसी भी तरह औरत के कमजोर होने का संदेश नहीं देना चाहती थीं, यही कारण है कि बिना कुछ खाए-पिये भी वे लगातार चलती रहती थीं।
उनके पुरुष सहयोगी अकसर पूछते थे कि वे ऐसा कैसे कर लेती हैं, जबकि वे तो थक जाते थे। उनके एक सीनियर ने कहा था, आखिर हम कैसे रुकें, जब एक महिला होकर वह (शाहिदा परवीन) बिना खाए-पिए लगातार आगे बढ़ रही है, आतंकियों से मुकाबला कर रही है, तो आखिर वे कैसे रुक जाएं। इस जज्बे के साथ एनकाउंटर पूरे किए जाते थे।
शाहिदा परवीन के पति भी सेना में एक महत्त्वपूर्ण पद पर हैं। वे भी कश्मीर में एनकाउंटर करने के लिए अपनी यूनिट की तरफ से जाते थे। उन्हें भी एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अधिकारी के रूप में जाना जाता है।
जिंदगी आसान नहीं
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के संदर्भ में शाहिदा परवीन ने कहा कि महिलाओं को यह समझ लेना चाहिए कि जिंदगी आसान नहीं है। चाहे पुरुष हो या महिला, हर मोर्चे पर सबको संघर्ष करना पड़ता है। महिला होने के कारण यह संघर्ष कुछ ज्यादा बढ़ जाता है। लेकिन आज की लड़कियां सौभाग्यशाली हैं कि उनके पास बहुत सारे विकल्प हैं। वे कई अलग दिशाओं में अपना करियर बना सकती हैं, जबकि उनके समय में महिलाओं के पास डॉक्टर और टीचर बनने जैसे विकल्प ही थे।
उन्होंने कहा कि उन्हें अपने लिए यह विकल्प पसंद नहीं था। वे कुछ अलग करना चाहती थीं। पुंछ जिले की रहने वाली शाहिदा परवीन ने कहा कि कश्मीर के परंपरागत समाज में लड़कियों-महिलाओं का शिक्षा हासिल करना ही बहुत चुनौतीपूर्ण था। उसके बाद डॉक्टर-टीचर से अलग विकल्प अपनाना बहुत कठिन था, लेकिन सौभाग्य से वे यह कर पाईं और आज पूरे देश में उनकी अलग पहचान है।
नीचे के लोगों को देखिए
उन्होंने कहा कि जीवन में निराश नहीं होना चाहिए। अपने आपको मोटिवेटेड बनाए रखने के लिए अपने से नीचे स्तर के लोगों को देखना चाहिए। आप पाएंगे कि जिस चीज के लिए लाखों लोगों को कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है, वह आपके लिए सहज उपलब्ध हैं। मोटिवेटेड होने के लिए यह बहुत पर्याप्त कारण है। उन्होंने कहा कि जब चार साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खोया था, तो उनका जीवन बहुत कठिन हो गया था, लेकिन मजबूत इरादों के कारण आज वे इस मंजिल तक पहुंच सकी हैं।
अब भी कर रहीं अपना विकास
शाहिदा परवीन ने कहा कि वे इस मुकाम पर पहुंचकर भी अपना विकास जारी रखे हुए हैं। वे यौगिक क्रियाओं को लेकर बहुत उत्साहित रहती थीं। स्वयं को शारीरिक-मानसिक तौर पर फिट रखने के लिए योग बहुत लाभकारी है। वे बहुत पहले से योग का अभ्यास करती थीं। बाद में उन्होंने यौगिक साइंस में परास्नातक की डिग्री ली। वे पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों करके खुद को सक्रिय बनाए रखती थीं।