Politics: नई विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी एक-तिहाई से बहुत दूर, संख्या के हिसाब से मप्र में सबसे ज्यादा
हिंदी पट्टी के 230 विधानसभा वाले राज्य मध्य प्रदेश से इस बार 27 महिलाएं निर्वाचित होकर सदन पहुंची हैं। 2018 में यहां से केवल 21 ही सदन में जगह बना सकीं। 2013 में 30 महिलाएं चुनी गई थीं।
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संसद में भले ही महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मध्य प्रदेश विधानसभाओं में नवनिर्वाचित महिला विधायकों की संख्या एक-तिहाई के आंकड़े से काफी दूर रही है। थिंक टैंक पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में महिला विधायकों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है, जबकि राजस्थान में घट गई है। नवनिर्वाचित विधायकों में 21 प्रतिशत महिलाओं के साथ छत्तीसगढ़ सभी चार राज्यों में सबसे आगे रहा है।
मध्यप्रदेश में बढ़ी संख्या: हिंदी पट्टी के 230 विधानसभा वाले राज्य मध्य प्रदेश से इस बार 27 महिलाएं निर्वाचित होकर सदन पहुंची हैं। 2018 में यहां से केवल 21 ही सदन में जगह बना सकीं। 2013 में 30 महिलाएं चुनी गई थीं।
छत्तीसगढ़ में 19 महिलाएं: 90 सीटों वाले छत्तीसगढ़ में इस बार 19 महिलाएं जीतकर विधानसभा पहुंचीं। 2018 में छत्तीसगढ़ में 13 महिला विधायक (मात्र 14 फीसदी) थीं।
राजस्थान में कम हुई भागीदारी: 200 सीटों वाले राजस्थान में अबकी सिर्फ 20 महिलाएं ही विधानसभा में पहुंचीं। वर्ष 2018 में महिला विधायकों की संख्या 24 थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्थान विधानसभा में महिललों की संख्या कभी भी 15 प्रतिशत से अधिक नहीं रही।
तेलंगाना में आठ फीसदी महिलाएं: तेलंगाना में महिला विधायकों की संख्या 10 यानी कुल विधायकों का आठ फीसदी है। 2018 में राज्य ने छह महिलाओं को अपनी विधानसभा में भेजा था।