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Plastic: प्लास्टिक की चाय की छन्नी का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला, राजस्थान की महिलाओं ने दिखाई नई राह

Tue, 01 Jul 2025 01:02 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 01 Jul 2025 01:02 PM IST
सार

यह पहल देश के प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई। चौधरी चरण सिंह की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में राजस्थान के डूंगरगढ़ इलाके के एक गांव की महिलाओं ने अब प्लास्टिक की चाय की छन्नी का इस्तेमाल न करने की शपथ ली।

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Women of Rajasthan show new path by deciding not to use plastic tea strainers Know all about it
चौधरी चरण सिंह की याद में आयोजित कार्यक्रम में शामिल लोग। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्लास्टिक हमारे खून से लेकर हमारे दिल और फेफड़ों तक पहुंच चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि चाय के प्लास्टिक के कप, गिलास, थाली और खिलौनों के माध्यम से हमारे शरीर के अंदर पहुंच रहा यह माइक्रोप्लास्टिक लोगों की अकाल मौत का कारण भी बन रहा है। ऐसे में राजस्थान की महिलाओं का एक फैसला पूरे देश को नई राह दिखा सकता है। राजस्थान के एक गांव लोढ़ेरा की महिलाओं ने अब चाय की छन्नी का इस्तेमाल न करने का निर्णय लिया है, क्योंकि चाय की छन्नी से पिघलता प्लास्टिक लोगों के शरीर में पहुंचकर उन्हें बीमार बना रहा है।  

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प्लास्टिक चाय छलनी के बहिष्कार का हुआ आगाज
दरअसल, यह पहल देश के प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई। चौधरी चरण सिंह की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में राजस्थान के डूंगरगढ़ इलाके के एक गांव की महिलाओं ने अब प्लास्टिक की चाय की छन्नी का इस्तेमाल न करने की शपथ ली है। इस अवसर पर चौधरी चरण सिंह विचार मंच कार्यकर्ता कविता ज्याणी ने बताया कि हम घरों में अधिकतर प्लास्टिक की चाय छलनी का उपयोग करते हैं। तीन-चार महीनों में ही गर्म चाय-दूध छानने से छलनी फट जाती है, क्योंकि गर्म चाय-दूध के साथ प्लास्टिक पिघल कर घुलता जाता है और ये घुला हुआ प्लास्टिक सीधा हमारे शरीर में जाता है। माइक्रो प्लास्टिक के ये कण हमारे स्वास्थ्य को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। लोढ़ेरा गांव से शुरू हुआ प्लास्टिक मुक्ति का यह अभियान चौधरी चरण सिंह विचार मंच द्वारा अब लगातार चलाया जाएगा।
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चौधरी चरण सिंह की स्मृति में भव्य कार्यक्रम
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की 125वीं जयंती 2027 में मनाई जाएगी। इस अवसर को एक यादगार दिवस बनाने के लिए इस वर्ष में पूरे देश में 125 स्मृति वन स्थापित किए जाने की योजना है। इसके अलावा चौधरी चरण सिंह को याद करते हुए किसानों के घरों पर एक करोड़ पौधे लगाने की योजना है। इसी क्रम में एक राष्ट्रीय स्तर की पहल के तहत बीकानेर जिले के लोढ़ेरा गाँव में एक विशाल सामुदायिक पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें गाँव की 8 बीघा श्मशान भूमि पर चौथा चौधरी चरण सिंह स्मृति संस्थागत वन विकसित किया गया। 
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संयुक्त राष्ट्र द्वारा भूमि संरक्षण के सर्वोच्च सम्मान 'लैंड फॉर लाइफ अवार्ड' से सम्मानित पर्यावरणविद प्रोफेसर श्यामसुंदर ज्याणी के मार्गदर्शन में आयोजित इस सामूहिक पौधारोपण कार्यक्रम में पूरे गांव व आस-पास से शामिल पर्यावरण प्रेमियों ने खेजड़ी, गुंदी, करंज, आवंला, पीपल, बड़, नीम, शहतूत, अमलतास, जामुन, गुलमोहर, सहजन, बोगनबेल, बकायन, शीशम आदि के 1100 पेड़ों का रोपण किया। इस अवसर पर आयोजित भूमि संवाद में प्रोफेसर ज्याणी ने जलवायु परिवर्तन सहित पर्यावरण असंतुलन के विभिन्न पक्षों, उनके संरक्षण में स्थानीय वनस्पति के योगदान, चौधरी चरण सिंह के गांव-किसानों की बेहतरी हेतु किए गए प्रयासों, उनके जीवन मूल्यों के बारे में विस्तार से बताया। 

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