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शोध: महिलाओं में लिगामेंट चोट का खतरा पुरुषों से कई गुना अधिक, हार्मोनल बदलाव भी संभावित कारक

Mon, 23 Feb 2026 04:20 AM IST
लव गौर अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: लव गौर Updated Mon, 23 Feb 2026 04:20 AM IST
सार

पुरुषों की तुलना में महिलाओं को लिगामेंट इंजरी का खतरा अधिक होता है। नेशनल ज्योग्राफिक के अनुसार एसीएल घुटने का एक महत्वपूर्ण लिगामेंट है, जो जांघ की हड्डी को पिंडली की हड्डी से जोड़ता है और घुटने को स्थिरता प्रदान करता है।

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Women are at higher risk of ligament injury than men with hormonal changes also possible factor
महिला एथलीट। (फाइल फोटो) - फोटो : अजय वर्मा

विस्तार

खेल विज्ञान की दुनिया में एक सवाल लगातार गूंज रहा है आखिर महिला एथलीट एसीएल यानी एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट की चोट का शिकार पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक क्यों होती हैं? उपलब्ध शोध बताते हैं कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अपने एसीएल को फाड़ने के मामले में आठ गुना तक अधिक जोखिम में हो सकती हैं।
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हालांकि, इस गंभीर अंतर के पीछे के कारणों पर अब भी सीमित शोध हुआ है और विशेषज्ञ यह भी जांच रहे हैं कि क्या एसीएल चोट और मासिक धर्म चक्र के बीच कोई संबंध है। नेशनल ज्योग्राफिक के अनुसार एसीएल घुटने का एक महत्वपूर्ण लिगामेंट है, जो जांघ की हड्डी को पिंडली की हड्डी से जोड़ता है और घुटने को स्थिरता प्रदान करता है। फुटबॉल, बास्केटबॉल, स्कीइंग व जिम्नास्टिक्स जैसे खेलों में अचानक दिशा बदलने, कूदने या तेजी से रुकने के दौरान इस लिगामेंट पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
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आंकड़े बताते हैं कि महिला खिलाड़ियों में एसीएल फटने की घटनाएं पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक दर्ज की जाती हैं। कुछ अध्ययनों में यह अंतर आठ गुना तक बताया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतर के पीछे कई जैविक और शारीरिक कारण हो सकते हैं। महिलाओं और पुरुषों की शारीरिक संरचना में अंतर, जैसे कूल्हों की चौड़ाई, घुटने के कोण और मांसपेशियों की मजबूती, एसीएल पर पड़ने वाले दबाव को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव भी एक संभावित कारक माने जा रहे हैं।
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मासिक धर्म चक्र और चोट का संभावित संबंध
वैज्ञानिक यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या एसीएल चोट और मासिक धर्म चक्र के बीच कोई संबंध है। कुछ प्रारंभिक शोध संकेत देते हैं कि मासिक धर्म चक्र के विशेष चरणों में हार्मोन स्तर में बदलाव के कारण लिगामेंट अपेक्षाकृत अधिक ढीले हो सकते हैं, जिससे चोट की आशंका बढ़ती है। हालांकि, इस विषय पर अब तक सीमित और असंगत शोध उपलब्ध है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस संभावित संबंध को समझने के लिए बड़े और व्यवस्थित अध्ययनों की आवश्यकता है।


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आने वाले वर्षों में प्रिवेंटिव स्क्रीनिंग संभव
एसीएल चोट के जोखिम को समझने में अब शोध केवल क्यों होता है तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कब और किसे ज्यादा खतरा है जैसे व्यावहारिक सवालों पर केंद्रित हो रहा है। कई लैब अब मोशन- कैप्चर तकनीक, मसल एक्टिवेशन सेंसर और एआई आधारित मूवमेंट एनालिसिस के जरिए खिलाड़ियों के दौड़ने और उतरने के पैटर्न का अध्ययन कर रही हैं, ताकि पहले से चेतावनी देने वाले संकेत पकड़े जा सकें। इसके साथ ही हार्मोन प्रोफाइलिंग और पर्सनलाइज्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम पर भी काम चल रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में प्रिवेंटिव स्क्रीनिंग संभव हो सकती है, लेकिन फिलहाल यह तकनीक शोध स्तर पर है और क्लिनिकल उपयोग से अभी कुछ दूरी बनी हुई है।

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