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शोध: गणित में संघर्ष कर रहे बच्चों में गलती से सीखने की आदत भी कमजोर, अध्ययन ने खोला राज
Sat, 21 Feb 2026 05:00 AM IST
लव गौर
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: लव गौर
Updated Sat, 21 Feb 2026 05:00 AM IST
सार
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता हायसांग चांग के नेतृत्व में किए गए इस शोध में बच्चों की सोचने की प्रक्रिया और दिमागी गतिविधियों का गहराई से विश्लेषण किया गया। अब तक आम धारणा यही रही है कि गणित में कमजोर बच्चे संख्याओं को ठीक से नहीं समझ पाते लेकिन इस अध्ययन ने बताया कि असली समस्या कई मामलों में इससे अलग है।
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स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के नए न्यूरोसाइंस अध्ययन में खुलासा
- फोटो : AI
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विस्तार
मेहनत के बावजूद अगर कोई बच्चा बार-बार गणित में पिछड़ रहा है, तो इसकी वजह केवल अंकों की कमजोर समझ नहीं हो सकती। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के नए न्यूरोसाइंस अध्ययन में सामने आया है कि ऐसे बच्चों में अक्सर गलती से सीखने और अपनी रणनीति बदलने की क्षमता कमजोर होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यही मानसिक आदत बच्चों की गणितीय प्रगति में सबसे बड़ी रुकावट बनती है।
यह अध्ययन सोसाइटी फॉर न्यूरोसाइंस द्वारा साझा किया गया है और प्रतिष्ठित पीयर-रिव्यू जर्नल जे-न्यूरोसाइ में प्रकाशित हुआ है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता हायसांग चांग के नेतृत्व में किए गए इस शोध में बच्चों की सोचने की प्रक्रिया और दिमागी गतिविधियों का गहराई से विश्लेषण किया गया। अब तक आम धारणा यही रही है कि गणित में कमजोर बच्चे संख्याओं को ठीक से नहीं समझ पाते लेकिन इस अध्ययन ने बताया कि असली समस्या कई मामलों में इससे अलग है। शोध का उद्देश्य यह समझना था कि बच्चे समय के साथ कैसे सीखते हैं और क्या वे अपनी गलतियों से रणनीति सुधार पाते हैं।
अध्ययन के दौरान बच्चों को सरल तुलना वाले सवाल दिए गए। हर बार उन्हें तय करना होता था कि दो में से कौन-सी मात्रा बड़ी है। कुछ सवालों में लिखे हुए अंक दिखाए गए, जैसे 4 और 7। वहीं कुछ मामलों में डॉट्स के समूह दिखाकर अनुमान लगाने को कहा गया कि किस समूह में ज्यादा बिंदु हैं। इस तरह शोधकर्ताओं ने प्रतीकात्मक संख्या समझ और मूल मात्रा पहचान दोनों की जांच की। साथ ही एक गणितीय मॉडल के जरिये यह देखा गया कि कई प्रयासों के दौरान बच्चों का प्रदर्शन कैसे बदलता है और वे गलती के बाद अपना तरीका सुधारते हैं या नहीं।
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ब्रेन स्कैन से सामने आई दिमागी वजह
शोधकर्ताओं ने ब्रेन इमेजिंग तकनीक का उपयोग कर यह भी देखा कि सवाल हल करते समय बच्चों के दिमाग में क्या गतिविधियां हो रही हैं। स्कैन में पाया गया कि गणित में संघर्ष कर रहे बच्चों के दिमाग के उन हिस्सों में गतिविधि कमजोर थी, जो गलती पहचानने और व्यवहार बदलने में मदद करते हैं। ये क्षेत्र कॉग्निटिव कंट्रोल से जुड़े होते हैं, यानी गलती समझना, रणनीति बदलना और नई जानकारी के अनुसार खुद को ढालना। महत्वपूर्ण बात यह रही कि इन हिस्सों की कम सक्रियता पहले ही संकेत दे देती थी कि कौन-सा बच्चा आगे चलकर गणित में संघर्ष करेगा।
ये भी पढ़ें: खोज: 25 नहीं, 30 की उम्र तक पूरी तरह विकसित होता है दिमाग; नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने तोड़ा फ्रंटल लोब मिथ
सोच न बदलना बना बड़ा अंतर
परिणामों में स्पष्ट अंतर दिखा। जिन बच्चों को गणित में ज्यादा परेशानी थी, वे गलत जवाब देने के बाद भी अपनी रणनीति बदलने की संभावना बहुत कम दिखाते थे। अलग-अलग तरह की गलतियां होने के बावजूद वे वही तरीका दोहराते रहे। इसके विपरीत, जिन बच्चों की गणितीय क्षमता सामान्य थी, वे गलती के बाद अपनी सोच अपडेट करते और अगली बार नया तरीका अपनाते। यही फर्क दोनों समूहों के बीच निर्णायक साबित हुआ।
अन्य वीडियो
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यह अध्ययन सोसाइटी फॉर न्यूरोसाइंस द्वारा साझा किया गया है और प्रतिष्ठित पीयर-रिव्यू जर्नल जे-न्यूरोसाइ में प्रकाशित हुआ है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता हायसांग चांग के नेतृत्व में किए गए इस शोध में बच्चों की सोचने की प्रक्रिया और दिमागी गतिविधियों का गहराई से विश्लेषण किया गया। अब तक आम धारणा यही रही है कि गणित में कमजोर बच्चे संख्याओं को ठीक से नहीं समझ पाते लेकिन इस अध्ययन ने बताया कि असली समस्या कई मामलों में इससे अलग है। शोध का उद्देश्य यह समझना था कि बच्चे समय के साथ कैसे सीखते हैं और क्या वे अपनी गलतियों से रणनीति सुधार पाते हैं।
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अध्ययन के दौरान बच्चों को सरल तुलना वाले सवाल दिए गए। हर बार उन्हें तय करना होता था कि दो में से कौन-सी मात्रा बड़ी है। कुछ सवालों में लिखे हुए अंक दिखाए गए, जैसे 4 और 7। वहीं कुछ मामलों में डॉट्स के समूह दिखाकर अनुमान लगाने को कहा गया कि किस समूह में ज्यादा बिंदु हैं। इस तरह शोधकर्ताओं ने प्रतीकात्मक संख्या समझ और मूल मात्रा पहचान दोनों की जांच की। साथ ही एक गणितीय मॉडल के जरिये यह देखा गया कि कई प्रयासों के दौरान बच्चों का प्रदर्शन कैसे बदलता है और वे गलती के बाद अपना तरीका सुधारते हैं या नहीं।
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ब्रेन स्कैन से सामने आई दिमागी वजह
शोधकर्ताओं ने ब्रेन इमेजिंग तकनीक का उपयोग कर यह भी देखा कि सवाल हल करते समय बच्चों के दिमाग में क्या गतिविधियां हो रही हैं। स्कैन में पाया गया कि गणित में संघर्ष कर रहे बच्चों के दिमाग के उन हिस्सों में गतिविधि कमजोर थी, जो गलती पहचानने और व्यवहार बदलने में मदद करते हैं। ये क्षेत्र कॉग्निटिव कंट्रोल से जुड़े होते हैं, यानी गलती समझना, रणनीति बदलना और नई जानकारी के अनुसार खुद को ढालना। महत्वपूर्ण बात यह रही कि इन हिस्सों की कम सक्रियता पहले ही संकेत दे देती थी कि कौन-सा बच्चा आगे चलकर गणित में संघर्ष करेगा।
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सोच न बदलना बना बड़ा अंतर
परिणामों में स्पष्ट अंतर दिखा। जिन बच्चों को गणित में ज्यादा परेशानी थी, वे गलत जवाब देने के बाद भी अपनी रणनीति बदलने की संभावना बहुत कम दिखाते थे। अलग-अलग तरह की गलतियां होने के बावजूद वे वही तरीका दोहराते रहे। इसके विपरीत, जिन बच्चों की गणितीय क्षमता सामान्य थी, वे गलती के बाद अपनी सोच अपडेट करते और अगली बार नया तरीका अपनाते। यही फर्क दोनों समूहों के बीच निर्णायक साबित हुआ।
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