फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Winter Session IPC CrPC Evidence Act Amendment Rajya Sabha Parliamentary panel reports

Rajya Sabha: शीतकालीन सत्र में IPC, Cr.PC व साक्ष्य कानून में बदलाव होंगे, समिति ने सभापति धनखड़ को दी रिपोर्ट

Fri, 10 Nov 2023 04:46 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 10 Nov 2023 04:46 PM IST
सार

संसद के शीतकालीन सत्र में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) में बदलाव की तैयारियां हो रही हैं। तीनों विधेयकों पर संसदीय पैनल की रिपोर्ट राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ को सौंपी गई।

विज्ञापन
Winter Session IPC CrPC Evidence Act Amendment Rajya Sabha Parliamentary panel reports
संसद भवन और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ (फाइल) - फोटो : social media

विस्तार

केंद्र सरकार आपराधिक और प्रक्रियात्मक कानूनों को बदलने की तैयारी कर रही है। शीतकालीन सत्र चार दिसंबर से शुरू होने वाला है। इससे पहले तीन विधेयकों पर संसदीय समिति की रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को सौंपी गई। बता दें कि शुक्रवार को गृह मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष बृज लाल ने संसद में धनखड़ से मुलाकात की। उन्होंने उपराष्ट्रपति सचिवालय में धनखड़ को तीनों विधेयकों पर रिपोर्ट सौंपी।
विज्ञापन


किन अधिनियमों में बदलाव की तैयारी?
बता दें कि सरकार ने ब्रिटिश हुकूमत के दौर में बने कानून- भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य कानून में बदलाव की पहल की है। बीते अगस्त में संसद के मॉनसून सत्र के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता (IPC), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Cr.PC) और भारतीय साक्ष्य विधेयक (Indian Evidence Act) पेश किया था। उन्होंने सभापति से विधेयकों में बदलाव की विस्तृत जांच के लिए इसे स्थायी समिति के पास भेजने का आग्रह किया था।
विज्ञापन


प्रस्तावित कानूनों से न्याय को प्रधानता
शाह ने आपराधिक न्यायशास्त्र को निर्देशित करने वाले वर्तमान कानूनों को औपनिवेशिक विरासत करार दिया था। ब्रिटिश राज का संदर्भ देते हुए उन्होंने जोर देकर कहा था कि फिलहाल जो कानून लागू हैं, ये सजा पर ध्यान केंद्रित करते हैं जबकि प्रस्तावित कानून न्याय को प्रधानता देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


समिति राज्यसभा सचिवालय के अंतर्गत
गृह मामलों से संबंधित स्थायी संसदीय समिति ने तीनों कानूनों में प्रस्तावित बदलाव की जांच के बाद तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा कर दी। समिति राज्यसभा सचिवालय के अंतर्गत आती है। भारतीय दंड संहिता, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम को बदलने वाले विधेयकों में बदलाव इसलिए भी चर्चा में हैं, क्योंकि तीनों कानूनों को भारतीय आपराधिक न्यायशास्त्र की रीढ़ माना जाता है।

लापरवाही के कारण होने वाली मौतों पर कठोरता?
इस महीने की शुरुआत में, संसदीय पैनल ने कई संशोधनों की पेशकश की। तीन रिपोर्टों को अपनाया था, लेकिन उनके हिंदी नामों पर कायम रहे, लगभग 10 विपक्षी सदस्यों ने असहमति नोट प्रस्तुत किए। रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान कानून के बहुत नरम होने की आलोचना के बीच समिति ने लापरवाही के कारण होने वाली मौतों पर और अधिक कठोर दृष्टिकोण अपनाने की सिफारिश की है।

सजा में कमी का भी प्रस्ताव 
समिति ने लोक सेवकों को उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने के दोषी लोगों की सजा में कमी का भी प्रस्ताव दिया है। बता दें कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 353 में अधिकतम दो साल की जेल की सजा का प्रावधान है। समिति इसे घटाकर एक साल करने की मांग कर रही है। इस कानून का इस्तेमाल अक्सर विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ किया जाता है। समिति के कई सदस्यों का मानना है कि आम प्रदर्शनकारियों के साथ नरमी से पेश आना चाहिए।


अलग-अलग लिंग से जुड़े कानून पर समिति की राय
खबरों के मुताबिक समिति ने अन्य सिफारिशों के बीच लिंग-तटस्थ व्यभिचार कानून और पुरुषों, महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के बीच गैर-सहमति वाले यौन संबंधों के लिए दंडात्मक उपायों का भी समर्थन किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed