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'सड़क सुरंग से कश्मीरी नौजवानों का हो सकेगा विकास?'

Tue, 04 Apr 2017 12:23 PM IST
माजिद जहांगीर / श्रीनगर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम
माजिद जहांगीर / श्रीनगर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम Updated Tue, 04 Apr 2017 12:23 PM IST
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'Will the development of Kashmiri youth be possible through road tunnel?'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को जम्मू-कश्मीर राजमार्ग पर भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग का उद्घाटन करने के बाद अपने भाषण में इसे कश्मीर की तकदीर बदलने वाली सुरंग कहा था। प्रधानमंत्री मोदी ने ये भी कहा था कि अब ये कश्मीरी नौजवानों पर है कि वो या तो टेररिज्म का रास्ता चुनें या टूरिज्म का।
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मोदी के इस बयान पर कश्मीर के आम लोगों, राजनीतिक दलों और अलगाववादियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग के 48 वर्षीय खुर्शीद अहमद का कहना है, "सुरंग बनाना अच्छी बात है, लेकिन जिस तरह से मोदी ने कश्मीरियों को आतंकवाद से जोड़ा है, मैं पूछना चाहता हूँ कि कश्मीर में आतंक कौन फैला रहा है?" 
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सुरंग तो मायने रखती है, लेकिन जो असल मसला है उस पर बात क्यों नहीं होती?

'Will the development of Kashmiri youth be possible through road tunnel?'
खुर्शीद ने कहा, "जिस तरह की बात नरेंद्र मोदी ने की है कि कश्मीरी नौजवान टेररिज्म या टूरिज्म चुनें, लेकिन उनकी जो फौज यहां है क्या वो आतंक नहीं फैला रही है। हमारे बच्चों को मार रही है, अंधा बना रही है। मां-बहनों की इज्जत लूट रही है। क्या ये आतंक नहीं है?" कपड़ों की दुकान चला रही 45 साल की निगत का कहना है कि सुरंग तो मायने रखती है, लेकिन जो असल मसला है उस पर बात क्यों नहीं होती?

निगत कहती हैं, "हमारा जो मसला है वो है कश्मीर की आजादी, उस पर बात नहीं होती। यहाँ के नेता और वहाँ के नेता भी बोलते हैं कि मेज पर बैठकर बात होगी, लेकिन ऐसा होता नहीं है। आखिर बात कब होगी? हमने बंदूक भी छोड़ी और फिर पत्थर उठाए, लेकिन तब भी कुछ नहीं हुआ।

टनल से मसला हल नहीं हो सकता। हर मां की गोद उजड़ी हुई है।" ताहम श्रीनगर की रहने वाली 35 साल की साबिया कहती हैं, "इस सुरंग से जम्मू-श्रीनगर का हमारा सफर आसान होगा। कश्मीर आने वाले पर्यटकों को आसानी होगी। ये तो अच्छी बात है।" साबिया जैसे ही खयालात का इजहार 30 साल के जावीद अहमद भी करते हैं।

असली मसला कश्मीरी नौजवानों के दिल जीतने का है।

'Will the development of Kashmiri youth be possible through road tunnel?'
अनंतनाग में होटल चलाने वाले 60 साल के महमूद सादिक कहते हैं कि सुरंग से अगर मसला हल होता तो ऐसा कब का हो गया होता। सादिक कहते हैं, "यहाँ तो इतने शहीद हो रहे हैं। मेरे जैसे 60 साल के बूढ़े इंसान पर भी पत्थरबाजी का मामला दर्ज है।

मोदी जी ने कहा कि कुछ नौजवान पत्थर मारते हैं तो कुछ पत्थरों से रोजगार कमाते हैं। मैं तो कहूँगा कि जो कश्मीरी नौजवान सुरंग बनाने गए वो तो मजदूरी करने गए थे। कश्मीर के इतने लोग जेलों में बंद हैं, उनको अगर रिहा किया जाए तो कश्मीर की तकदीर बदल जाएगी।"

श्रीनगर के 60 साल के मोहम्मद लतीफ कहते हैं कि जो सुरंग बनी है उससे सफर आसान हो जाएगा। कश्मीरी पंडित मानते हैं कि घाटी में विकास का जो काम हो रहा है वो तो ठीक है, लेकिन असली मसला कश्मीरी नौजवानों के दिल जीतने का है।
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मोदी सरकार कश्मीरी नौजवानों का दिल कैसे जीतेगी?

'Will the development of Kashmiri youth be possible through road tunnel?'
श्रीनगर के बर्बर शाह इलाके में रहने वाले संजय टीकू कहते हैं, "असल बात ये है कि मोदी सरकार कश्मीरी नौजवानों का दिल कैसे जीतेगी? कश्मीर के युवा बीते आठ साल से भारत से और भी दूर हो गए हैं और सड़कों पर आ रहे हैं।"

विपक्षी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता डॉक्टर मुस्तफा कमाल कहते हैं कि ये मसला टूरिज्म और टेररिज्म से जुड़ा नहीं है। देश के प्रधानमंत्री ऐसी बात कहें, ये छोटी बात लगती है और इस पर अफसोस ही किया जा सकता है।

अलगाववादी नेता और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मीरवाइज गुट के प्रवक्ता शहीद उल इस्लाम कहते हैं, "आज तक इतना पैसा खर्च किया गया। अगर मसला सिर्फ पैसों का होता तो कश्मीरी नौजवानों में इतनी नाराजगी नहीं पाई जाती।"
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