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क्या 5G से टूटेगा देश का सुरक्षा चक्र, हैकिंग पर किस तरह काबू पाएगी सरकार

Thu, 11 Jul 2019 05:57 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: जितेंद्र भारद्वाज Updated Thu, 11 Jul 2019 05:57 PM IST
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Will security cycle of India break after 5G coming, How to Government Control Hacking
5G Network - फोटो : 5G.co.uk

'5जी' और इसके परीक्षणों को लेकर दुनिया में एक बहस छिड़ गई है। खासतौर पर दक्षिण एशिया के कई देश इस तकनीक से चिंतित हैं। अपने देश की बात करें तो यहां अभी 5जी के ट्रायल पर बनी समिति की रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, उद्योगपतियों, बैंक सेक्टर, परिवहन, ऊर्जा, वित्त, टेलीकॉम और साइबर क्राइम के जानकारों को सुरक्षा का भय सताने लगा है। सभी की चिंता एक ही है, सुरक्षा में सेंध।

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क्या '5जी' आने से भारत का सुरक्षा चक्र टूटेगा, लीकेज या हैकिंग पर किस तरह काबू पाएगी सरकार। इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए amarujala.com ने IIT Chennai में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य प्रो. वी. कामाकोटी से खास बातचीत की है।
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वे विश्व मामलों की भारतीय परिषद (आईसीडब्लूए) में '5जी टेक्नोलॉजी फ्रॉम एन इंडियन पर्सपेक्टिव' विषय पर लेक्चर देने के लिए पहुंचे थे। प्रो. वी. कामाकोटी का कहना है, 5जी तकनीक आर्थिक ही नहीं, बल्कि तमाम दूसरे क्षेत्रों के विकास के लिए भी जरूरी है। इससे बैंकिंग सेक्टर, ट्रांसपोर्ट, पावर, स्पेस और रिमोट सर्जरी जैसे क्षेत्रों में बहुत मदद मिलेगी। 
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एक तरफ इसके सकारात्मक पहलू असीमित हैं तो दूसरी ओर हैकिंग या डाटा चोरी जैसी नकारात्मक बातें भी साथ रहेंगी। कई देश दूरसंचार तकनीक के जरिए एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में तांकझांक करने का प्रयास करते हैं। चीन, अमेरिका, उत्तर कोरिया और जापान सहित कई दूसरे देश अपने अपने तरीके से 5जी को परिभाषित कर रहे हैं। 

चीन को हर हाल में एनएसए यूएस के टूल्स चाहिए। कोई देश डाटा नहीं चुरा पाता तो वह साइटों पर ही अटैक कर देता है। यूएस और चीनी कंपनी हुआवेई का मामला दुनिया के सामने है।

प्रतिबंधों का सामना कर रही दूरसंचार उपकरण कंपनी हुवावे को सरकार और सैन्य अधिकारियों की कंपनी बताने को लेकर चीन, अमेरिका पर अपनी भड़ास निकाल रहा है। अमेरिका का दावा है कि दूरसंचार निर्माता कंपनी हुवावे के चीन की सरकार, सेना और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों से रिश्ते हैं। यही वजह है कि गूगल और माइक्रोसॉफट ने इस पर बैन लगा दिया है।

सुरक्षा को खतरा तो होगा, लेकिन उसे टाला जा सकता है

Will security cycle of India break after 5G coming, How to Government Control Hacking
5G smartphone
प्रो. वी. कामाकोटी कहते हैं, आज के दौर में केवल इस डर से कि फलां तकनीक अपनाने से देश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो जाएगा, उसे नहीं लेंगे, यह संभव नहीं है। हमें खतरा और तकनीक, दोनों को साथ लेकर चलना होगा। मान लीजिये 'ए' देश है, वह अपनी तकनीक से काम कर रहा है; 'बी' देश उसे अपना टारगेट बनाना चाहता है तो वह किसी भी तीसरे देश के उपकरणों के जरिए यह सब कर सकता है।

ऐसी स्थिति में 'ए' राष्ट्र को अपने स्तर पर बचाव के तरीके खोजने होंगे। ऐसी तकनीक के आदान प्रदान में कई बार शर्तों पर बातचीत होती है। जैसे, भारत हुवावे कंपनी के साथ कोई अनुबंध करता है तो इसके लिए उसे पहले चीन के साथ सुरक्षा के मसले पर बात करनी होगी।

खतरों से निपटने के लिए सबसे जरूरी है 'स्वदेशीकरण'

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5G
ऐसे खतरों से निपटने के लिए सबसे जरूरी है, स्वदेशीकरण। 5जी तकनीक, इसके फायदे या नुकसान, जो भी हो, स्वदेशीकरण सबसे अचूक हथियार है। इसके आधार पर 5जी का रोल आउट मॉडल तैयार करें। 

दूसरा, हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर एक ही वेंडर से न लें। इस तकनीक को कमोडिटी हार्डवेयर पर रन करें। अपने देश में ही नैनो सेंसर डिजाइन रिसर्च पर फोकस किया जाए। इंडिया में पीसीबी टेस्टिंग सुविधा हो। इसके लिए 5जी के स्टेंडर्ड असेंसियल पेटेंट्स तैयार करें। राष्ट्रीय स्तर पर सेक्टर वाइज साइबर सिक्योरिटी प्रोग्राम शुरु किए जाएं।ये सब एनसीआईआईपीसी के तहत हो सकता है।
 

हमें खुद का रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करना होगा

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5g smartphone
भारत जैसे देश को अभी 4जी तकनीक का पूर्ण इस्तेमाल कर खुद का रिस्क मेनेजमेंट सिस्टम तैयार करना चाहिए। इस पर आसानी से काम किया जा सकता है। ऐसी तकनीकों को हम केवल इंडस्ट्री के इस्तेमाल या मनोरंजन के लिए न मानें। हमारे पास जो मौजूदा 4जी है, उसकी मदद से एक मजबूत साइबर सिक्योरिटी सिस्टम तैयार किया जा सकता है। हम यह बात तो लगातार कह रहे हैं कि 5जी आने से सुरक्षा कमजोर पड़ेगी। 

कोई भी हैकर या शत्रु राष्ट्र सेकेंड से भी कम समय में हमारा डाटा चुरा सकता है। इसके लिए हमें खुद का सिक्योरिटी सिस्टम तैयार करना होगा। स्वदेशीकरण के जरिए चिप तैयार करनी पड़ेगी। अगर हम अपनी चिप नहीं बना सकते तो हैकर को कैसे रोकेंगे। हार्डवेयर नहीं तो कम से कम ऐसे सॉफ़्टवेयर डिजाइन करें, जिससे हैकिंग को रोका जा सके। भारत के पास आज बेहतरीन सॉफ़्टवेयर डिजाइनर हैं।
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