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Supreme Court: बार काउंसिल चुनाव लड़ने वाले दिव्यांग वकीलों को राहत, कोर्ट ने नामांकन शुल्क में की भारी कटौती

Mon, 05 Jan 2026 05:58 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 05 Jan 2026 05:58 PM IST
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Will ensure adequate representation of specially abled lawyers in state bar councils: SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह सुनिश्चित करेगा कि दिव्यांग वकीलों को राज्य बार काउंसिल के चुनावों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। इसके लिए उन्हें फिलहाल विभिन्न समितियों में शामिल कर प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
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शीर्ष कोर्ट ने कहा कि दिव्यांग वकीलों के बार काउंसिल में प्रतिनिधित्व को संस्थागत बनाने के लिए एक कानून में संशोधन की आवश्यकता हो सकती है। कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से कहा कि ऐसे वकीलों से नामांकन शुल्क 1.25 लाख रुपये की जगह 15 हजार रुपये लिया जाए, जो आगामी चुनाव में भाग लेना चाहते हैं।
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एक जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ को बीसीआई के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील मनन कुमार मिश्रा ने बताया कि वर्तमान कानून के तहत मुख्य काउंसिल में विशेष रूप से सक्षम वकीलों के लिए आरक्षण या समायोजन की कोई व्यवस्था नहीं है।


हालांकि, उन्होंने कोर्ट को आश्वासन दिया कि बीसीआई उन्हें राज्य बार काउंसिल की विभिन्न समितियों में प्रतिनिधित्व देकर उनकी भागीदारी सुनिश्चित कर सकता है। सीजेआई ने कहा कि अदालत की प्राथमिक चिंता यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांग वकीलों का पर्याप्त और प्रभावी प्रतिनिधित्व हो। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया की निर्णय लेने वाली समितियों में उनका प्रभावी प्रतिनिधित्व महसूस हो। 

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वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंग ने नामांकन शुल्क का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग वकीलों से इतना भारी शुल्क लेना उन्हें चुनाव प्रक्रिया से बाहर कर देता है। सीजेआई ने कहा कि दिव्यांग वकीलों के लिए शुल्क में पर्याप्त छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि 1.25 लाख की जगह केवल प्रतीकात्मक राशि ली जाए। जयसिंग ने कहा कि 25 हजार रुपये भी कई वकीलों के लिए बहुत ज्यादा हो सकते हैं। इस पर मनन मिश्रा ने कहा कि बीसीआई इसे और घटाकर 15 हजार रुपये तक कर सकती है, जिसे प्रतीकात्मक राशि माना जाएगा। 



 
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