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Dilip Ghosh: क्या भाजपा का साथ छोड़ेंगे दिलीप घोष, अटकलों की वजह क्या; ममता से मुलाकात से सामने आई अंतर्कलह?

Thu, 01 May 2025 12:13 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 01 May 2025 12:13 PM IST
सार

दिलीप घोष ने इन खबरों को पूरी तरह बेबुनियाद और अफवाह बताया है। उन्होंने कहा कि एक मंदिर के प्रांगण में प्रवेश से पहले निजी विचारों की भिन्नता को बाहर रख दिया जाना चाहिए।

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Will Dilip Ghosh leave BJP what is the reason for speculation meeting with Mamata reveal internal conflict?
दिलीप घोष - फोटो : PTI
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विस्तार

क्या पश्चिम बंगाल भाजपा में कोई अंतर्कलह मची हुई है और क्या राज्य में पार्टी के सबसे बड़े चेहरों में से एक दिलीप घोष विधानसभा चुनाव के पहले पार्टी का साथ छोड़ देंगे? यदि ऐसा होता है तो मुकुल रॉय, बाबुल सुप्रियो, तापसी मंडल, सिरिया परवीन और सुनील सिंह के बाद वे बड़े नेता होंगे, जो भाजपा का साथ छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो जाएंगे। यह भाजपा के लिए बड़ा झटका होगा। 

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दिलीप घोष के बारे में यह चर्चा तब शुरू हुई जब अक्षय तृतीया के दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के द्वारा दीघा में जगन्नाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह के अवसर पर वे अपनी नई नवेली पत्नी के साथ पहुंचे। उन्होंने ममता बनर्जी से व्यक्तिगत मुलाकात भी की। इसके बाद ही पश्चिम बंगाल का सियासी पारा गरम हो गया और इस बात की अटकलें लगाई जाने लगीं कि दिलीप घोष अपनी पत्नी के साथ भाजपा का साथ छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। 
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स्वयं दिलीप घोष ने इन खबरों को पूरी तरह बेबुनियाद और अफवाह बताया है। उन्होंने कहा कि एक मंदिर के प्रांगण में प्रवेश से पहले निजी विचारों की भिन्नता को बाहर रख दिया जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और शुभेंदु अधिकारी ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने इसे उनका निजी जीवन बताते हुए इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। 
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इसलिए हुए थे नाराज 
पश्चिम बंगाल भाजपा के सूत्र बताते हैं कि मामला इतना सीधा-साधा नहीं है। दरअसल, जब से भाजपा ने दिलीप घोष को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाया है, तभी से वे  पार्टी से नाराज चल रहे हैं। इसके बाद पिछले लोकसभा चुनाव में टिकट बंटवारे में भी उनकी उपेक्षा की गई। पिछले कुछ समय में भी जब-जब पार्टी ने कोई बड़ा कार्यक्रम रखा, घोष ने उससे दूरी बनाए रखी है। वे ममता पर हमला करने में आगे अवश्य रहे, लेकिन शुभेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार के कार्यक्रमों से दूर रहे। संभवतः यही कारण है कि अब विधानसभा चुनाव से पहले वे पार्टी से अलग लाइन पकड़ते हुए नजर आ रहे हैं। 

यह भी पढ़ें- West Bengal: भाजपा नेता दिलीप घोष ने खारिज कीं TMC में जाने की अटकलें, कहा- दीघा मंदिर जाने में कुछ गलत नहीं 

घोष ने भाजपा की धार को कुंद किया 
दिलीप घोष की नाराजगी उनकी टिप्पणी में भी दिखाई दे रही है। भाजपा ने एक रणनीति बनाते हुए पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को मुस्लिम तुष्टीकरण करने वाली नेता के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है। लेकिन दिलीप घोष ने दीघा में जगन्नाथ मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर यह कहा कि ममता बनर्जी हिंदू धर्म को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं। यह सीधे तौर पर पार्टी की लाइन के विरोध में है, जबकि एक भाजपा नेता के मुंह से यह बयान ममता बनर्जी को सूट करता है। यह भाजपा का ममता पर किए जा रहे हमलों को भोथरा भी करता है। 


तृणमूल नेता कर रहे स्वागत
भाजपा नेता ने स्वयं तो कोई संकेत नहीं दिया है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के नेता घोष का स्वागत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। मंदिर के उद्घाटन समारोह में भी दिलीप घोष का स्वागत एक मंत्री ने किया था। उसके बाद कुणाल घोष ने दिलीप घोष को भाजपा में उपेक्षित बताया था। माना जा रहा है कि यह दिलीप को अपने पाले में खींचने की कोशिश है और जल्द ही इसका परिणाम सामने आ सकता है।  

'केंद्र के ऊपर है, घोष रहेंगे या जाएंगे?'
दिलीप घोष बड़े जनाधार वाले नेता नहीं हैं, लेकिन एक बड़े नेता के पार्टी छोड़ने से पार्टी कार्यकर्ताओं के आत्मविश्वास पर नकारात्मक असर करता है। पश्चिम बंगाल भाजपा के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि दिलीप घोष पार्टी के बड़े नेता हैं, और अभी उन्होंने सीधे तौर पर ऐसा कोई संदेश नहीं दिया है कि वे पार्टी छोड़ सकते हैं। लेकिन पार्टी में अपनी उपेक्षा से नाराज वे विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी में अपनी पकड़ और भूमिका मजबूत करने की गरज से इस तरह के बयान दे रहे हैं। अब यह पार्टी आलाकमान पर निर्भर करता है कि वह उन्हें कितना महत्त्व देती है और उन्हें रोकने के लिए उन्हें क्या भूमिका सौंपती है। नेता के अनुसार, फिलहाल, एक बात स्पष्ट है कि राज्य में अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का पद रिक्त नहीं है। ऐसे में अब उनके लिए क्या भूमिका हो सकती है, यह देखने वाली बात होगी।

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