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क्या ब्रह्मोस को भी मिलेगा प्रेशराइज्ड गैस मिसाइल कंटेनर?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 15 Apr 2018 12:44 PM IST
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प्रेशराइज्ड गैस मिसाइल कंटेनर नई तकनीक है। पिछली बार गोवा के डेफ एक्सपो में इसने रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर का ध्यान आकर्षित किया था। खुद टेक्नोक्रेट पार्रिकर ने इसमें खासी रुचि दिखाई थी। चेन्नई में आयोजित रक्षा प्रदर्शनी में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस मेक इन इंडिया ने लुभाया।
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बीडीएल के वैज्ञानिकों ने आकाश मिसाइल के लिए इसे निजी कंपनी एटीएल के सहयोग से विकसित किया है। बताते हैं पूरी तरह से देश में विकसित इस प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर में आकाश मिसाइल को रखे जाने के बाद उसकी लाइफ चार गुना बढ़ जाएगी। एटीएल के बिजनेस पार्टनर और अमेरिका की कोरसोल एलएलसी के निदेशक जेडी भूसरी के अनुसार यह तकनीक ब्रह्मोस मिसाइल के प्रमुख डा. सुधीर मिश्रा को भी पसंद आई है।
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जेडी भूसरी के अनुसार डेफ एक्सपो में डा. मिश्रा ने प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर को देखा और इसकी सराहना की। ऐसे में ब्रह्मोस मिसाइल को प्रेशराइज्ड गैस कंटेनर में रखे जाने की संभावना बढऩे के पूरे आसार हैं। एटीएल डेफ एक्सपो में दो बड़े उत्पाद लेकर गई है। पहला स्नैपफिट बंकर। जिसे कहीं भी (पोखरण से लेकर सियाचिन तक)किसी भी स्थिति में महज तीन से चार घंटे के भीतर खड़ा किया जा सकता है।
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कंपनी का दावा है कि 25-30 साल तक सेवाएं देने वाला यह बंकर एसएलआर, एके-47, राकेट लांचर आदि के हमले झेल सकता है। यह फायरप्रूप, तापमान के प्रभाव से रहित, पोर्टेबल भी है। हालांकि अभी कंपनी के इस दावे की किसी रक्षा प्रयोगशाला में पुष्टि नहीं हुई है।
इस बंकर ने सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत और बाद में उपसेनाध्यक्ष जनरल रणबीर सिंह का ध्यान आकर्षित किया। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी पाकिस्तान से लगती सीमा पर सुरक्षा बलों की जरूरत को ध्यान में रखकर इसका जायजा लिया। इतना ही नहीं अर्ध सैनिक बलों के डीआईजी, आईजी को भी नक्सल क्षेत्र की चुनौतियों को ध्यान में रखकर बंकर ने अपनी ओर आकर्षित किया।
रूस की रक्षा कंपनियों ने बनाई भारतीय कंपनियों से सहमति
लार्सन एंड टुब्रो ने मास्को की रोसोबोरोन एक्सपोर्ट के साथ नौसेना के लिए अंडरवाटर प्लेटफार्म को विकसित करने हेतु आपसी सहमति पत्र पर दस्तखत किया। इस परियोजना के लिए अनंत टेक्नोलॉजी और केआरईटी में इसके स्पेयर पाट्र्स विकसित करने में सहमति बनी।
अनंत टेक्नोलॉज़ी ने रसियन कंपनी से आपसी सहमति के तहत सेना के लिए टी-90 और टी-72 टैंक के लिए तकनीकी सहयोग देने का समझौता किया। स्पेस एरा और कंसर्न रेडियो इलेक्ट्रानिक टेक्नोलॉजीज ने सुखोई-30 फाइटर जेट, एमकेआई -8, एमआई-17 और एमआई-35 हेलीकाप्टर की आपरेशनल क्षमता को बनाए रखने में सहयोग देने के लिए आपसी सहमति बनाई है। माना जा रहा है कि इससे रूस की कंपनियों के साथ भारतीय कंपनियों के न केवल सहयोग बढ़ेंगे बल्कि मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत तकनीकी हस्तांतरण भी होगा।
सेना को जारी है टाट्रा ट्रको की खेप
पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह को सेना के लिए होने वाले टाट्रा ट्रकों की आपूर्ति ने कुछ साल पहले खूब धमाल पैदा किया था। तब जनरल ने खुद को 14 करोड़ की रिश्वत दिए जाने का खुलासा किया था। इसको लेकर सेना के पूर्व अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह, बीईएमएल के तत्कालीन प्रमुख नटराजन तक जांच की आंच आई थी। लेकिन बीईएमएल ने इस मामले से किनारा कर लिया है। बीईएमल के प्रमुख डीके होता का कहना है कि वह पुराना दिन था।
हम आज बस इतना जानते हैं कि सेना को इन ट्रकों की आपूर्ति जारी है। होता के अनुसार हम सेना को अत्याधुनिक और उसकी जरूरत का सामान देते हैं। इस समय भी हमारे पास 300 टैट्रा ट्रकों का आर्डर है और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी सीवी आर डी के साथ इसकी आपूर्ति कर रही है। इसी तरह से बीईएमएल अर्जुन टैंक के लिए रिकवरी वेहिकिल 30 सर्वत्र ब्रिज का निर्माण कर रही है। यह मोबाइल ब्रिज कहीं भी सेना की जरूरतों को पूरा कर सकता है। इसके ऊपर से टैंक आदि ले जाए जा सकते हैं।