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वन्य जीव: बदल रहा बाघों का व्यवहार, इंसानी दबाव से बढ़ा टकराव; लगातार बढ़ रहे हमले, पिछले साल 43 लोग हुए शिकार
Sun, 01 Mar 2026 05:41 AM IST
Pavan
अमर उजाला नेटवर्क,अलवर/ नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क,अलवर/ नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Sun, 01 Mar 2026 05:41 AM IST
सार
स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2026 रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमारे देश में बाघों के व्यवहार में बदलाव तेजी से दर्ज किया गया है। इस कड़ी में बाघों की तरफ से इंसानों पर हमले की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, वहीं पिछले साल 43 लोग बाघ के हमलों के शिकार हुए हैं।
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बदल रहा बाघों का व्यवहार
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत में बाघों के व्यवहार में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। प्राकृतिक आवास के क्षरण, बढ़ते मानव हस्तक्षेप, संरक्षण नीतियों की असंतुलित प्राथमिकताओं और लैंटाना कैमारा जैसे आक्रामक पौधों के विस्तार ने बाघों को मानव बस्तियों और पालतू पशुओं के और करीब ला दिया है। इसके परिणामस्वरूप मानव-बाघ संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की जा रही है, जो वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
यह भी पढ़ें - बंगाल में आज से BJP की 'परिवर्तन यात्रा': चुनाव को लेकर पार्टी की तैयारी; कोलकाता में पीएम मोदी करेंगे शिरकत
यह दावा सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) और डाउन टू अर्थ द्वारा अलवर के निमली में जारी स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2026 रिपोर्ट में किया गया है। विश्लेषण के अनुसार जनवरी से जून 2025 के बीच देशभर में टाइगर रिजर्व के आसपास कम से कम 43 लोगों की मौत बाघ हमलों के में हुई। वर्ष 2024 की इसी अवधि में यह संख्या 44 थी। 2025 की 43 घटनाओं में से चार मामलों में बाघों ने मृतकों के शरीर के कुछ हिस्से खा लिए। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि बाघ सामान्यतः आदतन नरभक्षी नहीं होते। वे प्रायः तब मनुष्यों पर हमला करते हैं जब वे बूढ़े हो जाते हैं, घायल हो जाते हैं या उनका प्राकृतिक शिकार आधार कम हो जाता है।
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मवेशी, मुआवजा और बदलता आर्थिक समीकरण
रिपोर्ट बताती है कि बाघ ऐतिहासिक रूप से मवेशियों का शिकार करते रहे हैं। आकार में बड़े होने के कारण मवेशी उच्च कैलोरी का स्रोत होते हैं। बांधवगढ़ और ताडोबा जैसे क्षेत्रों में बाघ अब रिजर्व के बाहर लैंटाना-प्रधान इलाकों को दिन के विश्राम स्थल और शिकार क्षेत्र के रूप में अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।जब बाघ मवेशियों का शिकार करते हैं तो पशुपालकों को अक्सर पर्याप्त मुआवजा मिलता है। इससे एक जटिल स्थिति पैदा होती है। कुछ इलाकों में मवेशी क्षति को लेकर तीखा विरोध नहीं होता, क्योंकि मुआवजा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक हिस्सा बन जाता है।
समुदाय आधारित संरक्षण की जरूरत
रिपोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि यदि मानव-बाघ संघर्ष को नियंत्रित करना है तो स्थानीय समुदाय आधारित संरक्षण रणनीतियों को प्राथमिकता देनी होगी। बाघ-प्रधान क्षेत्रों में अनावश्यक मानव हस्तक्षेप को हतोत्साहित करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि संरक्षण की वर्तमान रणनीतियों में संतुलन लाना होगा।
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यह दावा सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) और डाउन टू अर्थ द्वारा अलवर के निमली में जारी स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2026 रिपोर्ट में किया गया है। विश्लेषण के अनुसार जनवरी से जून 2025 के बीच देशभर में टाइगर रिजर्व के आसपास कम से कम 43 लोगों की मौत बाघ हमलों के में हुई। वर्ष 2024 की इसी अवधि में यह संख्या 44 थी। 2025 की 43 घटनाओं में से चार मामलों में बाघों ने मृतकों के शरीर के कुछ हिस्से खा लिए। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि बाघ सामान्यतः आदतन नरभक्षी नहीं होते। वे प्रायः तब मनुष्यों पर हमला करते हैं जब वे बूढ़े हो जाते हैं, घायल हो जाते हैं या उनका प्राकृतिक शिकार आधार कम हो जाता है।
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मवेशी, मुआवजा और बदलता आर्थिक समीकरण
रिपोर्ट बताती है कि बाघ ऐतिहासिक रूप से मवेशियों का शिकार करते रहे हैं। आकार में बड़े होने के कारण मवेशी उच्च कैलोरी का स्रोत होते हैं। बांधवगढ़ और ताडोबा जैसे क्षेत्रों में बाघ अब रिजर्व के बाहर लैंटाना-प्रधान इलाकों को दिन के विश्राम स्थल और शिकार क्षेत्र के रूप में अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।जब बाघ मवेशियों का शिकार करते हैं तो पशुपालकों को अक्सर पर्याप्त मुआवजा मिलता है। इससे एक जटिल स्थिति पैदा होती है। कुछ इलाकों में मवेशी क्षति को लेकर तीखा विरोध नहीं होता, क्योंकि मुआवजा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक हिस्सा बन जाता है।
समुदाय आधारित संरक्षण की जरूरत
रिपोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि यदि मानव-बाघ संघर्ष को नियंत्रित करना है तो स्थानीय समुदाय आधारित संरक्षण रणनीतियों को प्राथमिकता देनी होगी। बाघ-प्रधान क्षेत्रों में अनावश्यक मानव हस्तक्षेप को हतोत्साहित करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि संरक्षण की वर्तमान रणनीतियों में संतुलन लाना होगा।