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अल नीनो ने बढ़ाई चिंता: समुद्र के भीतर कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से 8 डिग्री तक ज्यादा; भारत पर क्या असर?
Fri, 04 Sep 2026 08:12 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 04 Sep 2026 08:12 AM IST
सार
प्रशांत महासागर में असामान्य गर्मी ने अल नीनो को लेकर चिंता बढ़ा दी है। समुद्र के भीतर कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से 8 डिग्री तक ज्यादा पहुंच गया है और 2026 के अंत में इसके चरम पर पहुंचने का अनुमान है। भारत में इसका असर सिर्फ मानसून की कमी तक सीमित नहीं रहेगा। बारिश के पैटर्न में कितना बदलाव आ सकता है? पढ़िए रिपोर्ट
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
प्रशांत महासागर का असाधारण रूप से गर्म होता पानी दुनिया के मौसम के लिए बड़ी चेतावनी बन गया है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा है कि अल नीनो सक्रिय हो चुका है और आने वाले महीनों में इसके बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचने की आशंका है।
इसके फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना करीब 100 फीसदी है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह 2026 के अंत में चरम पर पहुंच सकता है। डब्ल्यूएमओ के अनुसार अल नीनो की तीव्रता मापने वाले नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2.6 डिग्री सेल्सियस तक अधिक पहुंच चुका है। जुलाई के अंत से अगस्त के मध्य तक साप्ताहिक तापमान सामान्य से 2.2 से 2.6 डिग्री अधिक दर्ज किया गया। समुद्र के भीतर कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से 8 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा ऊपर रहा। यह गर्मी अल नीनो के और मजबूत होने का संकेत दे रही है।
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भारत में सिर्फ मानसून की कमी का खतरा नहीं
भारत के लिए इस बार सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अल नीनो का असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होगा। इसे केवल कमजोर मानसून के खतरे के रूप में देखना सही नहीं होगा। बारिश की मात्रा के साथ उसका वितरण और तीव्रता भी बदल सकती है। 100 से अधिक वर्षों के वर्षा आंकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि अल नीनो के दौरान दक्षिण-पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी भारत जैसे अपेक्षाकृत सूखे क्षेत्रों में कुल बारिश और भारी बारिश की घटनाएं घट सकती हैं।
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इसके फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना करीब 100 फीसदी है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह 2026 के अंत में चरम पर पहुंच सकता है। डब्ल्यूएमओ के अनुसार अल नीनो की तीव्रता मापने वाले नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2.6 डिग्री सेल्सियस तक अधिक पहुंच चुका है। जुलाई के अंत से अगस्त के मध्य तक साप्ताहिक तापमान सामान्य से 2.2 से 2.6 डिग्री अधिक दर्ज किया गया। समुद्र के भीतर कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से 8 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा ऊपर रहा। यह गर्मी अल नीनो के और मजबूत होने का संकेत दे रही है।
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भारत में सिर्फ मानसून की कमी का खतरा नहीं
भारत के लिए इस बार सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अल नीनो का असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होगा। इसे केवल कमजोर मानसून के खतरे के रूप में देखना सही नहीं होगा। बारिश की मात्रा के साथ उसका वितरण और तीव्रता भी बदल सकती है। 100 से अधिक वर्षों के वर्षा आंकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि अल नीनो के दौरान दक्षिण-पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी भारत जैसे अपेक्षाकृत सूखे क्षेत्रों में कुल बारिश और भारी बारिश की घटनाएं घट सकती हैं।