विधानसभा चुनाव: भाजपा की राह रोकने के लिए राहुल गांधी की कांग्रेस ने किया पश्चिम बंगाल का बलिदान!
- कांग्रेस का असम, केरल, तमिलनाड, पुडुचेरी पर फोकस, ताकि भाजपा का खाता न खुलने पाए
- जीते तो मुस्कराएंगे राहुल गांधी, हारी तो भाजपा के लिए बढ़ेगी साख की चिंता
विस्तार
कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। बदलाव में पार्टी का बड़ी राजनीतिक कुर्बानी भी शामिल है। इसके लिए राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी के कुछ प्रमुख रणनीतिकारों को मनाया। पार्टी का कोई नेता राहुल या प्रियंका जैसा नेता पश्चिम बंगाल में अभी भी चुनाव प्रचार को धार नहीं दे रहा है। पूरा चुनाव प्रचार, रणनीति सांसद, और लोकसभा में पार्टी के नेता रहे अधीर रंजन चौधरी पर ही निर्भर है। कांग्रेस वहां वामदलों और फुरफुरा शरीफ की पार्टी आईएसएफ के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। कुल मिलाकर इसका मकसद पश्चिम बंगाल में भाजपा को रोकना है।
कांग्रेस के रणनीतिकार महासचिव का कहना है कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में जीत के बड़े-बड़े दावे किए हैं। गृहमंत्री अमित शाह, अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम लगातार 200 से अधिक सीटें लाने का दावा कर रही है, लेकिन भाजपा से अधिक सीटें कांग्रेस पार्टी जीतकर लाएगी। कांग्रेस के नेता इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बोलना चाहते। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल में यूपीए बहुत अच्छा चुनाव लड़ रही है। चुनाव नतीजे आने का इंतजार कीजिए।
असम में कांग्रेस का राजनीतिक हाल जानिए
कांग्रेस के असम में प्रभारी जितेन्द्र सिंह हैं। राहुल गांधी की टीम के सदस्य। राहुल गांधी को मजबूती देने के लिए ही प्रियंका गांधी वाड्रा ने वहां अपनी सक्रियता बढ़ाई। प्रियंका गांधी वाड्रा को असम तक लाने में महिला कांग्रेस की प्रमुख सुष्मिता देव ने बड़ी भूमिका निभाई। सुष्मिता देव कहती हैं कि चुनाव मतदान पूरा होने तक कांग्रेस राज्य में 65-70 सीटें पा जाने की स्थिति में पहुंच जाएगी। वह इसका एक बड़ा श्रेय जितेन्द्र सिंह के कुशल चुनाव प्रबंधन को दे रही हैं।
सुष्मिता का कहना है कि असम में खुद उन्हें (सुष्मिता को) बराक घाटी से प्रचार के लिए निकालना जितेन्द्र सिंह की वजह से संभव हो पाया। गौरव गगोई, बोरा, बरदलोई सभी के साथ लगातार संवाद करते हैं और तालमेल बिठाने में सफल हैं। राहुल और प्रियंका गांधी भी असम को लेकर काफी सक्रिय हैं। बताते हैं एआईयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल को कांग्रेस ने पहले ही हिदायत, सलाह देकर सावधानी बरतने के लिए तैयार किया।
असम कांग्रेस के चुनाव प्रचार में लगे सूत्रों की मानें तो भाजपा का सीएए, एनआरसी और उसे लेकर लोगों में छाया भय, जितना उसे फायदा पहुंचा रहा है, उससे अधिक नुकसान करने में लगा है। ऊपरी असम, निचले असम, बराक घाटी में स्थिति अलग-अलग है। दूसरे भाजपा ने अपने गठबंधन के साथी को बाहर करके और नए गठबंधन के साथी को जोड़कर रणनीतिक चूक की है। इसका कांग्रेस को फायदा मिल रहा है।
केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी में होगी दिलचस्प लड़ाई
आखिरी दिनों में मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटने को मजबूर हुए नारायण सामी अब फोन पर पूरा आत्मविश्वास दिखा रहे हैं। सामी की पहले आवाज में इतना जोश नहीं था। सामी कहते हैं कि राहुल गांधी के तमिलनाडु में प्रचार करने, पुडुचेरी आने से स्थिति तेजी से सुधरी है। राज्य की जनता को पता है कि भाजपा ने उन्हें पुडुचेरी का विकास और काम नहीं करने दिया। जनता में भी सहानुभूति का लाभ मिलने की उम्मीद है।
केरल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष एम रामचंद्रन का कहना है कि केरल में भाजपा दहाई सीट पार कर जाए तो बड़ी बात है। रामचंद्रन कहते हैं कि चुनाव मतदान होने दीजिए। कांग्रेस बहुत मजबूती से चुनाव लड़ रही है और हम सरकार बनाएंगे।
तमिलनाडु में भी कांग्रेस के भीतर एक छोटी सी नाराजगी है। कुछ कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पार्टी ने डीएमके के आगे कुछ अधिक समझौता कर लिया। हालांकि पार्टी के नेता एसवी रमणी ने कहा कि कुछ लोगों की यह नाराजगी हो सकती है। लेकिन ऐसा नहीं है। रमणी का मानना है कि इस बार तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन सत्ता में आ रहा है।