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नशे की खुराक क्यों लेते हैं कुछ फिल्म स्टार, गांजे से बनाई जा रही डिप्रेशन से उबरने की दवाई

Mon, 23 Nov 2020 10:47 PM IST
गौरव पाण्डेय अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 23 Nov 2020 10:47 PM IST
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Why some film starts do drugs, anti depression medicine is being made by Marijuana
हर्ष लिंबाचिया और भारती सिंह - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

गांजे के सेवन और इसकी 86 ग्राम मात्रा रखने के आरोप में धरी गईं कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति हर्ष लिंबाचिया को जमानत मिल गई है। इसके पहले भी कई बड़े फिल्म स्टार अवैध ड्रग्स सेवन के मामले की चपेट में आ चुके हैं। जानकार बताते हैं कि फिल्म स्टार्स को नशे की चपेट में लाने के लिए कई बार उनके साथी कलाकार और करीबी लोग ही जिम्मेदार होते हैं। वे स्वयं कलाकार को किसी शूटिंग या परफॉर्मेंस के पहले नशा लेने के लिए प्रेरित करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि नशे की ये खुराक उनमें आत्मविश्वास को बढ़ावा देगी जिससे उनके प्रदर्शन में सुधार आएगा।

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
इंडियन साइकिएट्रिक सोसाइटी के चेयरमैन डॉ. मृगेश वैष्णव ने अमर उजाला को बताया कि गांजे में मौजूद टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (THC) के कारण इसे लेने वाले व्यक्ति में कुछ देर के बाद आत्मविश्वास बढ़ता महसूस होता है। इसके साथ-साथ कुछ देर के लिए खुशी की अनुभूति होती है और रक्त प्रवाह बढ़ने से ऊर्जा का संचार होता महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को लगता है कि इससे उनके स्टेज परफॉर्मेंस में बेहतरी आएगी। यही कारण है कि वे किसी कार्यक्रम के पहले गांजा लेने के लिए प्रेरित होते हैं।
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लेकिन होता है ये असर
अगर 0.3 मात्रा में टीएचसी शरीर के अंदर जाता है तो यह ज्यादा नुकसान नहीं करता है, लेकिन नशे के शिकार लोग इसकी ज्यादा से ज्यादा मात्रा का सेवन करना शुरू कर देते हैं जिसके कारण उनमें शारीरिक विकार आने लगते हैं। नशे का असर खत्म होने के बाद इसके आदी लोगों में वही परेशानियां ज्यादा तेजी से दिखाई पड़ने लगती हैं जिनसे बचने के लिए उसने गांजे का सेवन शुरू किया था। यानी ऐसे लोगों में नशे का असर खत्म होने पर चिंता बढ़ने लगती है, आत्मविश्वास में कमी आने लगती है। 
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लोग बहुत ज्यादा आक्रामक या भावनात्मक हो जाते हैं और कभी क्रोध में कोई नुकसान करते हैं तो कभी रोने लगते हैं। नशे के शिकार लोगों की यह सबसे बुरी स्थिति होती है। इसकी सबसे ज्यादा खतरनाक बात यह है कि नशे के आदी लोग नशा उतरने के बाद शारीरिक रूप से स्वयं को बेहद कमजोर महसूस करने लगते हैं। अपने आप में ऊर्जा भरने के लिए उन्हें और ज्यादा नशे की जरूरत पड़ने लगती है। इस प्रकार वे नशे से उबरने के बाद फिर नशे के जाल में फंस जाते हैं और इसे छोड़ने में असहाय महसूस करते हैं।


हालांकि, किसी भी नशे से एक एक्सपर्ट मनोचिकित्सक की मदद से कुछ ही समय में मुक्ति पाई जा सकती है। इसके लिए कुछ दवाइयों को लेने की आवश्यकता पड़ती है।

चिंता से उबरने की दवा बना रहे डॉक्टर
गांजे के टीएचसी की न्यून और नियंत्रित मात्रा लोगों को चिकित्सकीय मदद भी कर सकती है। इसकी मदद से लोगों को चिंता, अवसाद से उबारने के लिए विशेष दवा का निर्माण भी किया जा रहा है और दवा ट्रायल के तीन स्टेज पार कर चुकी है। लेकिन इसके लिए परीक्षणों का कुछ दौर अभी बाकी है। गांजे के इसी असर को देखते हुए कुछ देशों में इसे प्रतिबंधित बिक्री वाली चीजों में शामिल कर दिया गया है यानी वहां अपनी पहचान देकर सीमित मात्रा में इसे वैध दुकानों से प्राप्त किया जा सकता है। 

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