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क्यों ना हो जवाहर बाग कांड की CBI जांच: हाईकोर्ट

Wed, 06 Jul 2016 09:22 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Wed, 06 Jul 2016 09:22 AM IST
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Why shouldn't transfer inquiry of Jawahar bhag to CBI: Court
जवाहर बाग - फोटो : PTI

मथुरा के जवाहर बाग में हुई घटना की जांच सीबीआई से कराने को लेकर दाखिल जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि इस घटना की जांच सीबीआई को सौंपने में उसे क्या आपत्ति है। प्रदेश सरकार को 14 जुलाई तक अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।

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अवनीश उपाध्याय और एक अन्य जनहित याचिका में जवाहर बाग कांड की जांच सीबीआई या एसआईटी से कराने की मांग की गई है। याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति आरएन कक्कड़ की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
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याचिका में कहा गया है कि जवाहर बाग की घटना में सत्तारूढ़ दल और सरकार में शामिल कई लोगों के अलावा दूसरे प्रदेशों के नक्सली समूहों की संलिप्तता की बात भी सामने आई है। ऐसे में इसकी जांच सीबीआई से कराना आवश्यक है। सरकार घटना में शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को मुआवजा देने में भी भेदभाव कर रही है।

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राजनीतिक शह के कारण ही पुलिस बेबस हो गई

Why shouldn't transfer inquiry of Jawahar bhag to CBI: Court

 याची अधिवक्ता का कहना था कि जवाहर बाग घटना के मास्टर माइंड रामवृक्ष यादव को सरकार ने मात्र 14 दिन के लिए धरना देने की अनुमति दी थी। इसके बाद वहां पूरा नगर बस गया। असलहे जमा हो गए। यह सब राजनीतिक संरक्षण के बिना मुमकिन नहीं है। राजनीतिक शह के कारण ही पुलिस बेबस हो गई।

हाईकोर्ट ने यदि पार्क खाली कराने का आदेश न दिया होता तो स्थिति और भी भयावह होने वाली थी। घटना में दो पुलिसकर्मियों सहित 27 लोगों के मरने की बात आ रही है। यह आंकड़ा भी विश्वसनीय नहीं है। सीबीआई जांच से स्पष्ट हो सकेगा कि कुल कितनी मौतें हुई हैं। अधिवक्ता योगेश अग्रवाल ने एसआईटी जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकार ने जांच के लिए जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा को न्यायिक आयोग बनाया है। मगर आयोग को कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।

वह सिर्फ जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। जांच एजेंसी से जांच कराने पर उसे मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने का अधिकार होगा। कोर्ट ने महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह से जानना चाहा कि इस मामले की जांच क्यों न सीबीआई से कराई जाए। महाधिवक्ता ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति की है। उन्होंने कहा कि याचिका मात्र मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है जो विश्वसनीय नहीं मानी जा सकती है।

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