{"_id":"65f3cf673f41e902bb06d90a","slug":"why-parsis-christians-caa-eligible-but-not-muslims-amit-shah-explains-everything-2024-03-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"CAA: सीएए में मुसलमानों को पात्र नहीं बनाने पर उठे सवाल, तो अमित शाह ने पेश किए चौंकाने वाले आंकड़े","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
CAA: सीएए में मुसलमानों को पात्र नहीं बनाने पर उठे सवाल, तो अमित शाह ने पेश किए चौंकाने वाले आंकड़े
Fri, 15 Mar 2024 10:07 AM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Fri, 15 Mar 2024 10:07 AM IST
सार
सीएए लागू करने को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। इसमें एक अहम सवाल यह है कि सीएए के तहत पारसी और ईसाई पात्र क्यों हैं? इसमें मुस्लिमों को पात्र क्यों नहीं बनाया गया है? ऐसे में गृह मंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू देकर सभी सवालों के जवाब दिए।
विज्ञापन
अमित शाह ने पेश किए चौंकाने वाले आंकड़े
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने से इसके कारण पड़ने वाले असर को भांपते हुए कई राजनीतिक दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। विपक्षी नेता सीएए में मुसलमानों को शामिल नहीं करने को लेकर लगातार निशाना साध रहे हैं। बढ़ते विरोध को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सीएए का उद्देश्य पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करना है, जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए थे।
दरअसल, सीएए लागू करने को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। इसमें एक अहम सवाल यह है कि सीएए के तहत पारसी और ईसाई पात्र क्यों हैं? इसमें मुस्लिमों को पात्र क्यों नहीं बनाया गया है? ऐसे में गृह मंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू देकर सभी सवालों के जवाब दिए।
वह क्षेत्र मुस्लिम आबादी के कारण...
पूछा गया कि पारसी और ईसाई तो भारत का हिस्सा नहीं है तो क्यों उन्हें पात्र बनाया जा रहा है। इस पर उन्होंने कहा, 'वह क्षेत्र मुस्लिम आबादी के कारण आज भारत का हिस्सा नहीं है। यह उनके लिए दिया गया था। मेरा मानना है कि यह हमारी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है कि हम उन लोगों को आश्रय दें जो अखंड भारत का हिस्सा थे और धार्मिक उत्पीड़न का सामना किया है।' बता दें, अखंड भारत एक संयुक्त भारत की अवधारणा है जो आधुनिक अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका और तिब्बत तक फैला हुआ है।
विज्ञापन
पाकिस्तान में हैरान करने वाला अंतर
गृहमंत्री ने सवाल करते हुए कहा, 'विभाजन के समय पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 23 फीसदी थी। अब केवल 3.7 फीसदी हिंदू रह गए हैं। बाकि शेष लोग कहां चले गए? इतने लोग यहां नहीं आए हैं। जबरन धर्मांतरण हुआ, उन्हें अपमानित किया गया, उनके साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों की तरह व्यवहार किया गया। वे कहां जाएंगे? क्या हमारी संसद और राजनीतिक दलों को इस पर निर्णय नहीं लेना चाहिए?'
बांग्लादेश और अफगानिस्तान का भी यही हाल
उन्होंने कहा कि 1951 में बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 22 फीसदी थी। 2011 में यह घटकर 10 फीसदी रह गई। शेष लोग कहां गए? उन्होंने आगे कहा कि वहीं अफगानिस्तान में 1992 में करीब दो लाख सिख और हिंदू थे। अब केवल 500 बचे हैं। क्या उन्हें अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीने का अधिकार नहीं है? भारत जब एक था तो हमारा था। वे हमारे लोग हैं। हमारे भाई-बहन और माताएं हैं।
मुस्लिम भी नागरिकता के लिए कर सकते हैं आवेदन
शिया, बलूच और अहमदिया मुसलमानों जैसे प्रताड़ित समुदायों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'दुनिया भर में इस ब्लॉक को मुस्लिम ब्लॉक माना जाता है। साथ ही मुस्लिम भी यहां नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। संविधान में प्रावधान है। उन्होंने कहा कि सीएए बिना किसी वैध दस्तावेज के सीमा पार करने वाले तीन देशों के उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के लिए एक विशेष अधिनियम है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेगी।'
यह पूछे जाने पर कि जिनके पास कोई दस्तावेज नहीं है, शाह ने कहा, 'हम उन लोगों के लिए समाधान निकालेंगे, जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं। हालांकि, मेरे अनुमान के अनुसार, उनमें से 85 फीसदी से अधिक के पास दस्तावेज हैं।'
यह है सीएए
नागरिकता संशोधन विधेयक 11 दिसंबर, 2019 को संसद द्वारा पारित किया गया था। एक दिन बाद ही इस विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति मिल गई थी। सीएए के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता लेने में आसानी होगी। ऐसे अल्पसंख्यक, 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हों।
विज्ञापन
दरअसल, सीएए लागू करने को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। इसमें एक अहम सवाल यह है कि सीएए के तहत पारसी और ईसाई पात्र क्यों हैं? इसमें मुस्लिमों को पात्र क्यों नहीं बनाया गया है? ऐसे में गृह मंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू देकर सभी सवालों के जवाब दिए।
विज्ञापन
वह क्षेत्र मुस्लिम आबादी के कारण...
पूछा गया कि पारसी और ईसाई तो भारत का हिस्सा नहीं है तो क्यों उन्हें पात्र बनाया जा रहा है। इस पर उन्होंने कहा, 'वह क्षेत्र मुस्लिम आबादी के कारण आज भारत का हिस्सा नहीं है। यह उनके लिए दिया गया था। मेरा मानना है कि यह हमारी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है कि हम उन लोगों को आश्रय दें जो अखंड भारत का हिस्सा थे और धार्मिक उत्पीड़न का सामना किया है।' बता दें, अखंड भारत एक संयुक्त भारत की अवधारणा है जो आधुनिक अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका और तिब्बत तक फैला हुआ है।
विज्ञापन
पाकिस्तान में हैरान करने वाला अंतर
गृहमंत्री ने सवाल करते हुए कहा, 'विभाजन के समय पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 23 फीसदी थी। अब केवल 3.7 फीसदी हिंदू रह गए हैं। बाकि शेष लोग कहां चले गए? इतने लोग यहां नहीं आए हैं। जबरन धर्मांतरण हुआ, उन्हें अपमानित किया गया, उनके साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों की तरह व्यवहार किया गया। वे कहां जाएंगे? क्या हमारी संसद और राजनीतिक दलों को इस पर निर्णय नहीं लेना चाहिए?'
बांग्लादेश और अफगानिस्तान का भी यही हाल
उन्होंने कहा कि 1951 में बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 22 फीसदी थी। 2011 में यह घटकर 10 फीसदी रह गई। शेष लोग कहां गए? उन्होंने आगे कहा कि वहीं अफगानिस्तान में 1992 में करीब दो लाख सिख और हिंदू थे। अब केवल 500 बचे हैं। क्या उन्हें अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीने का अधिकार नहीं है? भारत जब एक था तो हमारा था। वे हमारे लोग हैं। हमारे भाई-बहन और माताएं हैं।
मुस्लिम भी नागरिकता के लिए कर सकते हैं आवेदन
शिया, बलूच और अहमदिया मुसलमानों जैसे प्रताड़ित समुदायों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'दुनिया भर में इस ब्लॉक को मुस्लिम ब्लॉक माना जाता है। साथ ही मुस्लिम भी यहां नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। संविधान में प्रावधान है। उन्होंने कहा कि सीएए बिना किसी वैध दस्तावेज के सीमा पार करने वाले तीन देशों के उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के लिए एक विशेष अधिनियम है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेगी।'
यह पूछे जाने पर कि जिनके पास कोई दस्तावेज नहीं है, शाह ने कहा, 'हम उन लोगों के लिए समाधान निकालेंगे, जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं। हालांकि, मेरे अनुमान के अनुसार, उनमें से 85 फीसदी से अधिक के पास दस्तावेज हैं।'
यह है सीएए
नागरिकता संशोधन विधेयक 11 दिसंबर, 2019 को संसद द्वारा पारित किया गया था। एक दिन बाद ही इस विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति मिल गई थी। सीएए के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता लेने में आसानी होगी। ऐसे अल्पसंख्यक, 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हों।