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...मुश्किल है विजय माल्या को भारत लाना, जानिए क्यों?

Wed, 19 Apr 2017 11:03 AM IST
amarujala.com- submitted by: आनंद
amarujala.com- submitted by: आनंद Updated Wed, 19 Apr 2017 11:03 AM IST
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Why is it difficult to bring Vijay Mallya to India?
भारत ने युनाइटेड स्पिरिट्स के पूर्व चेयरमैन और किंगफिशर कंपनी के मालिक विजय माल्या को ब्रिटेन से भारत लाने की कोशिश शुरू की थी और इसमें उसे बड़ी कामयाबी मिली। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक स्कॉटलैंड यार्ड ने माल्या को लंदन में गिरफ्तार किया है। इस मामले में विदेश मंत्रालय के जरिए भारत ने दिल्ली में ब्रिटिश उच्चायुक्त को एक आग्रह सौंपा था।
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माल्या बीते साल मार्च में देश छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। लेकिन उन्हें भारत लाना इतना आसान नहीं है। और इसकी वजह है भारत-ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण संधि की जटिल प्रक्रिया। ब्रिटिश सरकार के मुताबिक बहुराष्ट्रीय कनवेंशन और द्विपक्षीय संधियों के तहत ब्रिटेन दुनिया के करीब 100 मुल्कों के साथ प्रत्यर्पण संधि रखता है।
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इनमें भारत कैटेगरी 2 के टाइप बी वाले मुल्कों में शामिल है।

Why is it difficult to bring Vijay Mallya to India?
ब्रिटिश सरकार की वेबसाइट में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया से जुड़ा पूरा ब्योरा है। इसके मुताबिक भारत जिस श्रेणी में है, उसमें शुमार देशों से आने वाले आग्रह पर फैसला ब्रिटेन का विदेश मंत्रालय और अदालतें, दोनों करते हैं। इसकी प्रक्रिया काफी लंबी है।

ये है पूरी प्रक्रिया-

- विदेश मंत्री से आग्रह किया जाएगा, जो इस बात का फैसला करता है कि इसे सर्टिफाई किया जाए या नहीं
- जज निर्णय करता है कि गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया जाए या नहीं
- इसके बाद शुरुआती सुनवाई होगी
- फिर बारी आएगी प्रत्यर्पण सुनवाई की
- विदेश मंत्री फैसला करता है कि प्रत्यर्पण का आदेश दिया जाए या नहीं
- आग्रह करने वाले देश को क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) को आग्रह का शुरुआती मसौदा सौंपने के लिए कहा जाता है, ताकि बाद में कोई दिक्कत पेश ना आए
- पहले ब्रिटिश गृह मंत्रालय की इंटरनेशनल क्रिमिनलिटी यूनिट इस आग्रह पर विचार करती है। अगर दुरुस्त पाया जाता है, तो इसे आग्रह अदालत को बढ़ा दिया जाता है।
- अगर अदालत सहमत होती है कि पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराई गई है, तो गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाएगा। इसमें व्यक्ति विशेष से जुड़ी सारी जानकारी
- गिरफ्तारी के बाद शुरुआती सुनवाई और प्रत्यर्पण सुनवाई होती है। सुनवाई पूरी होने के बाद जज संतुष्ट होता है तो मामले को विदेश मंत्रालय को बढ़ा दिया जाता है।

Why is it difficult to bring Vijay Mallya to India?
इसके बावजूद जिसके प्रत्यर्पण पर बातचीत हो रही है, वो शख़्स मामला विदेश मंत्रालय को भेजने के जज के फैसले पर अपील कर सकता है। मामले पर विचार के बाद विदेश मंत्रालय फैसला लेता है। तीन सूरत ऐसी है, जिनके होने पर प्रत्यर्पण नहीं किया जा सकेगा:

- अगर प्रत्यर्पण के बाद व्यक्ति के खिलाफ सजा-ए-मौत का फैसला आने का डर हो तो
- अगर आग्रह करने वाले देश के साथ कोई विशेष इंतजाम हो तो
- अगर व्यक्ति को किसी तीसरे मुल्क से ब्रिटेन में प्रत्यर्पित किया गया हो तो
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Why is it difficult to bring Vijay Mallya to India?
खास बात ये है कि विदेश मंत्रालय को मामला भेजने के दो महीने के भीतर फैसला करना होता है। ऐसा ना होने पर व्यक्ति रिहा करने के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि विदेश मंत्री अदालत से फैसला देने की तारीख आगे बढ़वा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद भी व्यक्ति के पास हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार रहता है।

कुल मिलाकर माल्या के भारत लौटने का रास्ता काफी जटिल और लंबा है। पिछले साल मई में भारत सरकार ने ब्रिटेन से कहा था कि माल्या को लौटा दिया जाए क्योंकि उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया है। ब्रिटिश सरकार का कहना था कि उनके यहां रहने के लिए किसी के पास वैध पासपोर्ट होना जरूरी नहीं, लेकिन क्योंकि माल्या के खिलाफ गंभीर आरोप है, इसलिए उनके प्रत्यर्पण पर विचार किया जाएगा।
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