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Trump Threat: 'चीन पर ऐसा दबाव क्यों नहीं बना रहे ट्रंप?' भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी पर विशेषज्ञ के सवाल

Tue, 05 Aug 2025 07:42 AM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 05 Aug 2025 07:42 AM IST
सार

राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से भारत के रूस तेल खरीदने पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी पर विशेषज्ञ ने सवाल पूछा है। रॉबिंदर सचदेव ने कहा कि अगर अमेरिकी टैरिफ बढ़ाया गया तो भारत को 20 से 30 अरब डॉलर तक का निर्यात नुकसान हो सकता है। 'ट्रंप 50 फीसदी तक टैरिफ बढ़ा सकते हैं। अगर भारत को दबाव में लाया जा रहा है, तो चीन को क्यों नहीं?'

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Why is he not pressing down on China with same intensity? Foreign Affairs Expert On Trump threats to India
रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के विशेषज्ञ - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है और उसे खुले बाजार में भारी मुनाफे में बेच रहा है, इसलिए अमेरिका भारत पर टैरिफ यानी शुल्क में भारी बढ़ोतरी करेगा। इस पर विदेश मामलों के विशेषज्ञ रॉबिंदर सचदेव ने सवाल उठाया है कि ट्रंप भारत पर तो सख्ती कर रहे हैं, लेकिन चीन के खिलाफ वैसी ही सख्ती क्यों नहीं दिखा रहे?
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अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या कहा था?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ सोशल' पर लिखा, 'भारत न सिर्फ भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है, बल्कि उसे खुले बाजार में मुनाफे के लिए बेच भी रहा है। उन्हें इस बात की परवाह नहीं कि यूक्रेन में कितने लोग मारे जा रहे हैं। इसी वजह से, मैं भारत पर लगने वाले टैरिफ को काफी बढ़ाऊंगा।'
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ट्रंप की धमकी पर विशेषज्ञ की प्रतिक्रिया
विदेश मामलों के जानकार रॉबिंदर सचदेव ने बताया, 'ट्रंप बार-बार भारत और उसके रूसी तेल खरीद को लेकर बयान दे रहे हैं। यह विषय अब उनके लिए अहम हो गया है।' उन्होंने कहा कि ट्रंप की यह नीति सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है- जापान, स्विट्जरलैंड, यूरोपीय संघ जैसे कई देशों को भी इसका सामना करना पड़ रहा है। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि चीन पर ट्रंप वैसा ही दबाव क्यों नहीं बना रहे, जबकि चीन भी रूस से उतना ही तेल खरीद रहा है।


चीन या भारत- रूसी तेल खरीद में कौन आगे?
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआईआई) के अनुसार, 2024 में चीन ने रूस से करीब 62.6 अरब डॉलर का तेल खरीदा, जबकि भारत ने 52.7 अरब डॉलर का। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, 'चीन रूस से सबसे अधिक तेल खरीदने वाला देश है, लेकिन ट्रंप उस पर कुछ नहीं कह रहे। संभवतः इसके पीछे भू-राजनीतिक रणनीति है।'

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भारत का जवाब- 'तेल नीति राष्ट्रीय हित में है'
भारत सरकार ने ट्रंप के बयान के जवाब में कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोमवार को साफ कहा, 'भारत की ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित पर आधारित है। रूस से तेल खरीद आवश्यक है ताकि भारतीय उपभोक्ताओं को सस्ता और स्थिर ऊर्जा मिल सके।' मंत्रालय ने अमेरिका और यूरोपीय देशों की आलोचना को अनुचित और बेबुनियाद बताया। भारत ने ये भी कहा कि वह अपने आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।

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