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भ्रष्टाचार मामले में पूर्व निदेशकों के खिलाफ जांच से कदम पीछे क्यों खींच रही सीबीआई: कोर्ट

Tue, 29 Sep 2020 03:52 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Tue, 29 Sep 2020 03:52 AM IST
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why is cbi Hesitating To Investigate Against The Former Directors In The Corruption Case
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई की खिंचाई करते हुए कहा है कि वह अपने दो पूर्व निदेशकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के कथित मामलों की जांच से अपने कदम पीछे क्यों खींच रही है? कोर्ट ने कहा, ऐसा लगता है कि सीबीआई खुद से जुडे़ मामलों की जांच आगे बढ़ाने के लिए इच्छुक नहीं है।

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 विशेष जज संजीव अग्रवाल ने मांस निर्यातक मोइन अख्तर कुरैशी एवं अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में सुनवाई करते हुए यह बात कही और जांच एजेंसी से कहा कि वह इस मामले में नई स्टेटस रिपोर्ट 27 अक्तूबर तक दाखिल करे।
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मामले में कुरैशी के साथ सीबीआई के दो पूर्व निदेशकों एपी सिंह और रंजीत सिन्हा की भूमिका जांच के दायरे में है। अदालत ने जांच एजेंसी से कहा कि क्या सिन्हा के नाम की भी जांच की जा रही है और अगर ऐसा है तो क्या इस मामले में उनसे भी पूछताछ की गई है और अगर नहीं तो क्यों?
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जज ने कहा, सीबीआई ने संभावित संदिग्धों के यहां छापे मारकर या हिरासत में लेकर पूछताछ करने जैसे आजमाए हुए तौर तरीकों को अपना इस मामले को अंजाम तक क्यों नहीं पहुंचाया? अदालत ने कहा कि इस मामले में सीबीआई के पूर्व निदेशक एपी सिंह की जांच क्यों नहीं की गई?

जांच रोकने वाले आलोक वर्मा की भूमिका क्याें नहीं जांची गई?
जज ने सीबीआई से सवाल किया कि क्या पूर्व निदेशक आलोक वर्मा की उस भूमिका की भी जांच की गई, जिसमें उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर जांच रोक दी या जांच को तार्किक नतीजे तक नहीं पहुंचने दिया। अदालत ने सीबीआई से इन बिंदुओं पर उसे जानकारी देने को कहा।

अनंत काल तक जांच, मतलब एफआईआर खुद अपनी मौत मर जाए
 इससे पहले कोर्ट ने सीबीआई से इस मामले की जांच की अंतिम रिपोर्ट देने की समयसीमा बताने को कहा था।  सीबीआई ने कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर कहा कि जांच पूरी करने के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई जा सकती है।


इस हलफनामे पर जज ने कहा, क्या इसका मतलब यह है कि जांच अनिश्चित समय तक चलेगी, ताकि एफआईआर खुद अपनी मौत मर जाए। इस बारे में एजेंसी के सभी जवाब अस्पष्ट और टाल-मटोल वाले हैं।

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