{"_id":"6aa974c41b5006089a0d240b","slug":"cybersecurity-cisf-to-counter-online-threats-to-nuclear-sector-personnel-to-receive-special-ai-training-2026-09-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"साइबर सुरक्षा: न्यूक्लियर सेक्टर पर ऑनलाइन खतरे से निपटेगी सीआईएसएफ, AI\/डीपफेक पर जवान लेंगे विशेष प्रशिक्षण","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
साइबर सुरक्षा: न्यूक्लियर सेक्टर पर ऑनलाइन खतरे से निपटेगी सीआईएसएफ, AI/डीपफेक पर जवान लेंगे विशेष प्रशिक्षण
Tue, 15 Sep 2026 10:09 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 15 Sep 2026 10:09 PM IST
विज्ञापन
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ)
- फोटो : अमर उजाला
देश के महत्वपूर्ण और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को तकनीकी रूप से और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने 'राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस' (15 सितंबर) के अवसर पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते आधुनिक और तकनीक-आधारित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बल की क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।
विज्ञापन
इसके तहत, साइबर सुरक्षा में विशेष प्रशिक्षण और राजस्थान के बहरोड़ स्थित सीआईएसएफ ट्रेनिंग सेंटर में ड्रोन तकनीक का एक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित किया जाएगा। न्यूक्लियर सेक्टर पर साइबर खतरे से निपटने के लिए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/डीपफेक क्लाउड और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी जैसे गंभीर विषयों पर सीआईएसएफ जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
विज्ञापन
साइबर सुरक्षा में एडवांस ट्रेनिंग (सी3आईहब के साथ), यह पहल हाल ही में आयोजित 'डीजीपी/आईजीपी सम्मेलन-2024' में प्रधानमंत्री के विजन और अर्धसैनिक बलों में विशेष 'साइबर कमांडो' तैयार करने के केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देशों के बिल्कुल अनुरूप है। आईआईटी कानपुर के सी3आईहब (आईएचयूबी एनटीआईएचएसी फाउंडेशन) के साथ हुए इस समझौते के तहत सीआईएसएफ को निःशुल्क प्रशिक्षण मिलेगा। इसके तहत तीन साल के फ्रेमवर्क के तहत छह सप्ताह का आवासीय साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होगा। हर बैच में 40 सीआईएसएफ जवानों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
विज्ञापन
जवानों को एविएशन, पावर और न्यूक्लियर सेक्टर पर मंडराते साइबर खतरों, क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल फोरेंसिक, इंसिडेंट रिस्पॉन्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग, डीपफेक, आईओटी, क्लाउड और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी जैसे गंभीर विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा कई सेक्टर्स के लिए 'क्राइसिस सिमुलेशन' भी आयोजित होगा। इस समझौते पर सीआईएसएफ के आईजी (एयरपोर्ट सेक्टर-I) सेंथिल अवुडई कृष्णा राज एस. (आईपीएस) और सी3आईएचयूबी की सीईओ डॉ. तनिमा हाजरा ने हस्ताक्षर किए।
एमओयू 2 के तहत सीआईएसएफ के आरटीसी बहरोड़ (राजस्थान) में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक का एक अत्याधुनिक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित करने के लिए किया गया है। यह पांच साल का फ्रेमवर्क है। इसमें मुख्य फोकस इस केंद्र में यूएवी ऑपरेशंस, ड्रोन फोरेंसिक और मानव रहित प्रणालियों की साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। संदिग्ध ड्रोन्स का विश्लेषण, रडार और माइक्रो-डॉपलर डिटेक्शन, काउंटर-यूएएस सिस्टम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों के ऑपरेशंस पर साझा शोध किया जाएगा। इसके तहत अत्याधुनिक सिमुलेटर्स, फोरेंसिक लैब और तकनीकी ढांचा भी विकसित होगा। यह पहल 'ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया' के साथ सीआईएसएफ के हालिया समझौते को और भी मजबूती प्रदान करती है।
इस समझौते पर सीआईएसएफ के डीआईजी डॉ. सी धनंजय नाइक और आईआईटी कानपुर के डीन (आरएंडडी) प्रो. जयधरन जी. राव ने हस्ताक्षर किए हैं। इस दौरान सेंथिल अवुडई कृष्णा राज एस., सवितोज सिंह गिल (एआईजी, एनसीआर जोन) और आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. नवरोज मौजूद रहे। ये दोनों समझौते सीआईएसएफ के उस मजबूत और विस्तृत नेटवर्क का हिस्सा हैं, जिसमें पहले से ही आईआईटी मद्रास, आईआईटी रोपड़, आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया जैसे देश के शीर्ष शैक्षणिक और तकनीकी संस्थान शामिल हैं। बहरोड़ का यह नया सेंटर ड्रोन सुरक्षा के क्षेत्र में निरंतर ट्रेनिंग और रिसर्च का एक प्रमुख राष्ट्रीय मंच बनेगा। यह पहल न केवल बल को तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगी, बल्कि स्वदेशी तकनीकी समाधान विकसित कर देश के क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखने के 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को भी साकार करेगी।