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Khabron ke Khiladi: दिल्ली में वादे पूरे करने में क्यों देरी कर रही सरकार, 'खबरों के खिलाड़ी' ने बताई इसकी वजह
Sat, 15 Mar 2025 05:01 PM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sat, 15 Mar 2025 05:01 PM IST
सार
दिल्ली में होली पर मुफ्त सिलेंडर के वादे को लेकर सियासत तेज है। इसके अलावा 2500 रुपयों को लेकर भी विपक्ष सत्ताधारी भाजपा पर हमलावर है। खबरों के खिलाड़ी में इस सप्ताह इसी मुद्दे पर चर्चा हुई...
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खबरों के खिलाड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा ने सरकार बना ली। चुनाव से पहले भाजपा द्वारा किए गए बड़े-बड़े वादों को पूरा करने का दबाव अब रेखा गुप्ता सरकार पर बनने लगा है। आम आदमी पार्टी लगातार इन वादों पर सत्ता पक्ष को घेरने में लगी हुई है। विपक्षी पार्टी अब सवाल कर रही है कि होली तो बीत गई। होली पर मुफ्त सिलेंडर के वादे का क्या हुआ? इसी तरह महिलाओं के लिए 2500 रुपये के वादे पर भी विपक्ष सरकार को घेर रहा है। इन्हीं मुद्दे पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, समीर चौगांवकर, अवधेश कुमार, राकेश शुक्ल, राजकिशोर, अजय सेठिया और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
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समीर चौगांवकर: आम आदमी पार्टी अब विपक्ष में है। आतिशी नेता प्रतिपक्ष हैं उनका काम है सरकार से सवाल पूछना। आतिशी भी मुख्यमंत्री रही हैं, अरविंद केजरीवाल भी 10 साल मुख्यमंत्री रहे हैं। इसलिए सवाल पूछने से पहले आप को यह भी बताना चाहिए कि जो वादे हमने किए थे वो हमने पूरे किए और भाजपा वादे पूरे करने की स्थिति में नहीं है। रेखा गुप्ता अभी मुख्यमंत्री बनी हैं और मुख्यमंत्री बनते ही सारे वादे पूरे हो जाएंगे ये उम्मीद करना भी गलत होगा। यह कोई जादू की छड़ी नहीं है कि उसे घुमाएंगे और सारे वादे पूरे हो जाएंगे।
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अवधेश कुमार: मुफ्तखोरी के नाम पर लोगों को भ्रष्ट बनाने, आलसी बनाने के विरोध में लोगों ने भाजपा को वोट दिया है। जिस देश में परिश्रम करने वाला वर्ग कामचोर हो जाए, आलसी हो जाए वो देश कभी भी महाशक्ति नहीं बन सकता है। पराजय के बावजूद आम आदमी पार्टी ने अपना विजन बड़ा करने पर काम नहीं किया है।
अनुराग वर्मा: अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में रेवड़ी राजनीति का जो प्रयोग किया, उसने दिल्ली की पूरी व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया। भाजपा ने उसे और बढ़ा दिया। जो व्वस्थाएं ध्वस्त हुई हैं उसे हमें यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि वो रातों रात ठीक हो जाएंगी। पर्सेप्शन मैनेजमेंट में यमुना के मुद्दे पर भाजपा ठीक काम करती हुई दिख रही है। दिल्ली में भाजपा ने जो वादे किए हैं उन्हें पूरा करना भाजपा की मजबूरी है। वो वादे कब पूरे करेंगे, वो अलग बात है।
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राजकिशोर: 27 साल से भाजपा विपक्ष में ही थे, उससे बाहर निकलने में समय लगेगा। पहले तो लोगों को बताना पड़ेगा कि आपका कितना नुकसान हुआ है और यह भाजपा बताएगी। दो तीन चीजों में आमूलचूल परिवर्तन होगा और इसकी शुरुआत हो चुकी है। सड़कों पर यह काम शुरू हो गया है। जो काम सड़कों पर हो रहा है वही काम राजनीति में भी शुरू हो गया है। दिल्ली का जो पूरा रिवर्स गियर लगा था वो अरविंद केजरीवाल की सियासत की वजह से लगा था। साफ हवा, पानी और बिजली इन सब पर काम करना होगा। मेरे पास जो जानकारी है इस दिशा में एक पूरा प्लान तैयार किया जा रहा है।
अजय सेठिया: आतिशी बहुत ज्यादा हमलावर हैं। सरकार जिस दिन बनी वो उसी दिन से हमलावर हो गईं। आम आदमी पार्टी को लगता है कि वो इस वजह से हारी क्योंकि प्रधानमंत्री ने उन रेवड़ियों की घोषणा कर दी जो उन्होंने की थी, लेकिन दिल्ली का यह चुनाव रेवड़ियों पर नहीं था। मैंने पहले ही कहा था आम आदमी पार्टी सरकार जा रही है। कोई भी घोषणा पत्र तुरंत पूरा नहीं होता है। पहले तो घोषणा पत्र की चर्चा तक नहीं हुआ करती थी। पांच साल में उसकी 10 से 20 फीसदी बातें पूरी होती थी। फ्री बीज को सोशल वेलफेयर में लाया जा रहा है। मैं समझता हूं कि मुफ्त की रेवड़ियों की समाप्ति का दौर भी शुरू हो गया है।
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रामकृपाल सिंह: केजरीवाल मूलत: एक गैरराजनैतिक शख्स थे। मैं उन्हें आज भी गैर राजनीतिक शख्स मानता हूं। दिल्ली की जनता ने किस बात पर वोट दिया है ये मुझे नहीं मालूम है, लेकिन जिस शख्स ने राजनीतिक बदलाव की बात करके सत्ता में जगह पाई थी, उसके बाद शीशमहल और आधे मंत्रियों के जेल जाने के बाद यह तय था वो सत्ता से बाहर जा रहे हैं। सवाल इस बात का है कि कांग्रेस या भाजपा इनकी कमिया भी रहेंगी, लेकिन यह तय है कि अगर आप काम नहीं करेंगे तो जनता माफ नहीं करती है। भाजपा हमेशा से पात्रता की बात करती रही है। कौन इसका पात्र होगा यह तह होगा तो यह वाकई में सोशल वेलफेयर स्कीम होगी।
राकेश शुक्ल: केजरीवाल की तरफ से आतिशी यह जिम्मेदारी निभा रही हैं कि केजरीवाल के मंच पर आने से पहले मंच को साधने की कोशिश कर रही हैं। दिल्ली के तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों की तरफ से घोषणा पत्र आए थे। यहां की जनता ने तीनों में से भाजपा के घोषणा पत्र में विश्वास किया। बाजरा में हम जो प्रोडक्ट लेने जाते हैं तो उसमें भी एक स्टार लगाकर लिखा होता है कि नियम शर्तें लागू, हम उसे नहीं पढ़ते हैं। इन पार्टियों के घोषणा पत्र में भी इसी तरह के स्टार लगे थे जिसे जनता ने नहीं पढ़ा।