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'टैक्स पॉलिसी पर बहस जरूरी': वित्त मंत्री की व्यापारियों से अपील- अपने बिजनेस से पहले देश के बारे में सोचें
Wed, 16 Sep 2026 02:14 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, बंगलूरू
पीटीआई, बंगलूरू
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Wed, 16 Sep 2026 02:14 PM IST
सार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स पॉलिसी पर स्वतंत्र रिसर्च और व्यापक सार्वजनिक बहस की जरूरत बताई। उन्होंने टैक्स प्रोफेशनल्स से क्षेत्रीय और सेक्टर हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की अपील की। साथ ही TDS-TCS नियमों में बदलाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का भी जिक्र किया।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि टैक्स पॉलिसी पर स्वतंत्र रिसर्च को सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि टैक्स प्रोफेशनल्स को क्षेत्रीय-विशेष के हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।
वित्त मंत्री ने क्या कहा?
सीतारमण बंगलूरू में 'इंटरनेशनल टैक्स रिसर्च एंड एनालिसिस फाउंडेशन' की ओर से 'न्यू एज टैक्सेशन' (नए दौर की टैक्स व्यवस्था) पर आयोजित आठवें इंटरनेशनल टैक्स कॉन्फ्रेंस में बोल रही थीं।उन्होंने कहा, टैक्स पॉलिसी पर एक समझदारी भरी बहस में सिर्फ किसी खास सेक्टर या क्षेत्र के हितों से आगे बढ़कर सोचना चाहिए।' उन्होंने टैक्स प्रोफेशनल्स से अपील की कि वे 'सेक्टर-विशेष की सोच से ऊपर उठें और देश को सबसे पहले रखें।'
सीतारमण ने कहा कि सरकार ने जान-बूझकर टीडीएस (सोर्स पर टैक्स कटौती) और टीसीएस (सोर्स पर टैक्स वसूली) से जुड़े नियमों को तर्कसंगत बनाया है। इनकी सीमाएं बढ़ाई हैं और अनावश्यक आपराधिक परिणामों को कम किया है।
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इंटरनेशनल टैक्सेशन पर क्या कहा?
इंटरनेशनल टैक्सेशन के मुद्दे पर वित्त मंत्री ने कहा कि भारत ने मॉरीशस, सिंगापुर और साइप्रस के साथ अपनी टैक्स संधियों पर फिर से बातचीत की, ताकि कैपिटल गेन्स (पूंजीगत लाभ) पर सोर्स पर टैक्स लगाने का अपना अधिकार वापस हासिल किया जा सके।
सीतारमण ने कहा कि विकास और तरक्की की राह में भारत के सामने अपनी चुनौतियां हैं, लेकिन मुश्किल वैश्विक माहौल के बावजूद भारत बेहतर स्थिति में है। उन्होंने टैरिफ (आयात शुल्क) से जुड़ी धमकियों, चल रहे तीन युद्धों, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी जटिलताओं और कच्चे तेल व फर्टिलाइजर की कीमतों के असर को चुनौतियों के तौर पर गिनाया। इसके साथ ही कहा कि कच्चा तेल और फर्टिलाइजर देश के सबसे बड़े आयात में शामिल हैं।
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वित्त मंत्री ने क्या कहा?
सीतारमण बंगलूरू में 'इंटरनेशनल टैक्स रिसर्च एंड एनालिसिस फाउंडेशन' की ओर से 'न्यू एज टैक्सेशन' (नए दौर की टैक्स व्यवस्था) पर आयोजित आठवें इंटरनेशनल टैक्स कॉन्फ्रेंस में बोल रही थीं।उन्होंने कहा, टैक्स पॉलिसी पर एक समझदारी भरी बहस में सिर्फ किसी खास सेक्टर या क्षेत्र के हितों से आगे बढ़कर सोचना चाहिए।' उन्होंने टैक्स प्रोफेशनल्स से अपील की कि वे 'सेक्टर-विशेष की सोच से ऊपर उठें और देश को सबसे पहले रखें।'
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सीतारमण ने कहा कि सरकार ने जान-बूझकर टीडीएस (सोर्स पर टैक्स कटौती) और टीसीएस (सोर्स पर टैक्स वसूली) से जुड़े नियमों को तर्कसंगत बनाया है। इनकी सीमाएं बढ़ाई हैं और अनावश्यक आपराधिक परिणामों को कम किया है।
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इंटरनेशनल टैक्सेशन पर क्या कहा?
इंटरनेशनल टैक्सेशन के मुद्दे पर वित्त मंत्री ने कहा कि भारत ने मॉरीशस, सिंगापुर और साइप्रस के साथ अपनी टैक्स संधियों पर फिर से बातचीत की, ताकि कैपिटल गेन्स (पूंजीगत लाभ) पर सोर्स पर टैक्स लगाने का अपना अधिकार वापस हासिल किया जा सके।
सीतारमण ने कहा कि विकास और तरक्की की राह में भारत के सामने अपनी चुनौतियां हैं, लेकिन मुश्किल वैश्विक माहौल के बावजूद भारत बेहतर स्थिति में है। उन्होंने टैरिफ (आयात शुल्क) से जुड़ी धमकियों, चल रहे तीन युद्धों, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी जटिलताओं और कच्चे तेल व फर्टिलाइजर की कीमतों के असर को चुनौतियों के तौर पर गिनाया। इसके साथ ही कहा कि कच्चा तेल और फर्टिलाइजर देश के सबसे बड़े आयात में शामिल हैं।