कोरोना से बचने के लिए घरेलू मास्क या मेडिकल मास्क? जानें क्या कहती हैं गाइडलाइंस
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दुनियाभर में कोरोना महामारी ने 19 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। कोरोना से बचने के लिए अलग अलग स्वास्थ्य संगठनों ने कई गाइडलाइंस जारी की। इन गाइडलाइंस में मास्क पहनने और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने जैसी क्रियाओं को करने के लिए कहा गया लेकिन मास्क पहनने को लेकर समय दर समय गाइडलाइंस में बदलाव होता रहा। कई स्वास्थ्य महकमों ने स्वस्थ लोगों के मास्क पहनने पर सवाल खड़े किए तो कई संगठनों ने मास्क पहनने को सभी के लिए अनिवार्य किया।
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दुनियाभर में कोरोना महामारी ने 19 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। कोरोना से बचने के लिए अलग अलग स्वास्थ्य संगठनों ने कई गाइडलाइंस जारी की। इन गाइडलाइंस में मास्क पहनने और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने जैसी क्रियाओं को करने के लिए कहा गया लेकिन मास्क पहनने को लेकर समय दर समय गाइडलाइंस में बदलाव होता रहा। कई स्वास्थ्य महकमों ने स्वस्थ लोगों के मास्क पहनने पर सवाल खड़े किए तो कई संगठनों ने मास्क पहनने को सभी के लिए अनिवार्य किया।
चीन, हॉन्ग-कॉन्ग और ताइवान के अधिकारियों ने भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनने को जरूरी बताया जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना था कि ऐसा जरूरी नहीं कि हर किसी को मास्क पहनने की आवश्यकता है। अमेरिका ने अप्रैल की शुरुआत में अपने लोगों को कपड़े के बने मास्क पहनने को कहा। कोरोना की वजह से मेडिकल मास्क में कमी दिखी, स्वास्थ्य कर्मचारियों को मेडिकल मास्क की ज्यादा जरूरत थी।
स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए मेडिकल मास्क कम ना रह जाए इसके लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जनता से घर में बने मास्क पहनने को कहा। लेकिन मास्क को लेकर लगातार गाइडलाइंस में बदलाव होता गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आम लोगों के सर्जिकल मास्क ना पहनने पर ज्यादा जोर दिया।
मास्क पहनने पर अलग अलग गाइडलाइंस क्यों?
कुछ शोध मानते हैं कि कोरोना से बचने के लिए मास्क पहनना मददगार साबित हो सकता है। मास्क पहनने से एंफ्लुएंजा और SARS जैसे वायरस के फैलने का खतरा कम हो जाता है। कोरोना भी फैलने वाली बीमारी है, जो हाथ मिलाने या हवा में मौजूद ड्रॉपलेट के मुंह में जाने से हो सकता है। हालांकि कोरोना के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें मास्क पहनने का ज्यादा फायदा नहीं दिखा है।
यही कारण है कि कोरोना से बचने के लिए मास्क पहनने पर अलग अलग गाइडलाइंस है। मास्क पहनने के बाद भी कई लोगों में कोरोना के लक्षणों को देखा गया है।
मेडिकल मास्क पहनने की मनाही क्यों?
मेडिकल मास्क में भारी कमी को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से एडवाइजरी जारी की गई कि गैर संक्रमित लोग घर में बने मास्क पहने। इसके अलावा सेंटर ऑफ डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने भी लोगों से घरों में बने मास्क पहनने की अपील की। सीडीसी ने कहा कि जहां तक हो आम लोग किसी सूती कपड़े या स्कार्फ का मास्क बनाकर पहनें ताकि जरूरतमंद स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए मेडिकल मास्क की उपलब्धता बनी रहे।
मास्क पहनने से क्या मदद मिलेगी?
अगर कोई संक्रमित व्यक्ति मास्क पहनकर खांसता या छींकता है तो ड्रॉपलेट हवा में गिरने की बजाय मास्क में रहेंगी जिससे दूसरे व्यक्ति तक संक्रमण के फैलने का खतरा कम हो जाएगा। हालांकि इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपना पक्ष साफ रखा है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मौजूदा समय में इस बात का कोई सबूत नहीं है कि स्वस्थ व्यक्ति के सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने से इंफेक्शन होने का खतरा कम हो जाएगा।
स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए क्या हैं गाइडलाइंस?
सीडीसी ने सीमित सामानों पर भी गाइडलाइंस जारी कर कहा है कि स्वास्थ्य कर्मचारी सावधानियों के साथ जरूरी मेडिकल सामानों का इस्तेमाल करें। हालांकि अमेरिका के कई अस्पतालों में मेडिकल स्टाफ के लिए घर पर बने मास्क का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या हैं मास्क पहनने के नकारात्मक पहलू?
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि मास्क पहनने से लोग अपने चेहरे पर हाथ ज्यादा लगाएंगे जिससे कोरोना वायरस के फैलने के ज्यादा खतरा बना रहेगा। कई स्वास्थ्य संगठन इस बात ज्यादा जोर देते हैं कि अगर मास्क पहन रहे हैं तो उसे ढंग से पहनें, अगर किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो तुरंत मास्क को बदल दें। मास्क पहनने के साथ साथ हाथों को साफ रखें। मास्क को एक कपड़े या अखबार में ढककर फेंकें।
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि सर्जिकल मास्क जैसे मास्क जो सिर्फ एक बार के इस्तेमाल के लिए बने उन्हें बार बार ना पहनें।