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SC: 'आप हाईकोर्ट क्यों नहीं जाते?', संपत्ति ध्वस्तीकरण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Thu, 20 Feb 2025 06:38 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Thu, 20 Feb 2025 06:38 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति के ध्वस्तीकरण को लेकर शीर्ष अदालत के फैसले की अवमानना करने पर महाराष्ट्र के अधिकारियों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि आप हाईकोर्ट क्यों नहीं जाते हैं? हम यहां से हर चीज की निगरानी नहीं कर सकते। 
 

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'Why don't you go to the High Court?', SC refuses to hear the petition related to property demolition
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति के ध्वस्तीकरण को लेकर शीर्ष अदालत के फैसले की अवमानना करने पर महाराष्ट्र के अधिकारियों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट जाने के लिए कहा। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि आप हाईकोर्ट क्यों नहीं जाते हैं? हम यहां से हर चीज की निगरानी नहीं कर सकते। 

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इस पर याचिकाकर्ता के वकील के दावा किया कि महाराष्ट्र के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के 13 नवंबर 2024 के फैसले में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन किया है। उन पर अवमानना की कार्रवाई की जाए। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में  नोटिस दिए बिना संपत्ति पर कोई भी तोड़फोड़ न करने और पीड़ित पक्ष को 15 दिन का नोटिस देने के लिए कहा था। 
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कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से जब मंजूरी योजना दिखाने के लिए कहा, तो वकील ने कहा हमें इसके लिए निर्देश लेने होंगे। इस पर पीठ ने कहा कि हम मौजूदा याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है। अगर याचिकाकर्ता चाहे तो वह अपने अधिकार क्षेत्र वाले हाईकोर्ट का रुख कर सकता है। अगर आप हमें मंजूरी योजना दिखाते तो हम इस पर विचार कर सकते थे। 
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याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि याचिका उसकी संपत्ति से कुछ किलोमीटर दूर किए गए संपत्तियों के ध्वस्तीकरण से जुड़ी है। जिसे हाईकोर्ट ने पूरी तरह से अवैध बताया था। याचिकाकर्ता संपत्ति का स्वामी है और उसने वहां एक टिनशेड लगाया था। अधिकारियों ने याचिककर्ता को केवल एक दिन का नोटिस दिया है। 


मामले में पीठ ने पाया कि कोर्ट ने नवंबर 2024 के आदेश में कहा है कि फैसला सार्वजनिक सड़क पर बनी संपत्तियों के ध्वस्तीकरण पर लागू नहीं होगा। 

ध्वस्तीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश क्या हैं?

  • ध्वस्तीकरण के आदेश पारित होने के बाद भी, ध्वस्तीकरण के आदेश को चुनौती देने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए।
  • उन लोगों भी जगह खाली करने के लिए पूरा समय दिया जाना चाहिए जो ध्वस्तीकरण आदेश का विरोध नहीं करना चाहते हैं।
  • ये निर्देश किसी सार्वजनिक स्थान जैसे सड़क, गली, फुटपाथ, रेल लाइन या किसी नदी या जल निकाय पर कोई अवैध निर्माण होने पर लागू नहीं होंगे। 
  • पूर्व नोटिस दिए बिना कोई भी तोड़फोड़ नहीं की जानी चाहिए। जिसका जवाब नोटिस देने के 15 दिनों में दिया जाना चाहिए। नोटिस को डाक से भी भेजना होगा और निर्माण पर भी चिपकाया जाना चाहिए। 
  • जो भी अधिकारी ध्वस्तीकरण के लिए नियुक्त किया जाएगा उसे अभियुक्त के मतों की सुनवाई करनी होगी। ऐसी बैठक के विवरण को रिकॉर्ड किया जाएगा।
  • तोड़फोड़ की कार्यवाही की वीडियोग्राफी की जाएगी। ध्वस्तीकरण की रिपोर्ट नगर आयुक्त को भेजी जानी चाहिए।
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