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सुप्रीम कोर्ट: केंद्र सरकार से पूछा- राजीव गांधी के हत्यारे को 36 साल जेल में रहने के बाद भी रिहाई क्यों नहीं?

Wed, 27 Apr 2022 08:04 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 27 Apr 2022 08:04 PM IST
सार

पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि वह एक सप्ताह में सरकार से निर्देश हासिल करें अन्यथा कोर्ट पेरारिवलन को रिहा करने की मांग मंजूर कर लेगी।

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Why cant Rajiv Gandhi case convict be released after serving 36 years in prison SC to Centre Supreme Court News
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से पूछा कि राजीव गांधी हत्या मामले में 36 साल जेल में गुजारने वाले एजी पेरारिवलन को रिहा क्यों नहीं किया जा रहा। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार के इस अजीब कदम का भी संज्ञान लिया कि दोषी की रिहाई से संबंधित राज्य मंत्रिमंडल की सिफारिश को तमिलनाडु के राज्यपाल ने राष्ट्रपति को भेज दिया। वहीं, तमिलनाडु सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि कानून में जिस बात का समाधान है उसे भी केंद्र उलझा रहा है। जस्टिस एलएन राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया राज्यपाल का फैसला गलत और संविधान के विपरीत लगता है क्योंकि वह राज्य मंत्रिमंडल की सिफारिश मानने के लिए बाध्य हैं। उनके फैसले ने संविधान से तय संघीय ढांचे को चोट पहुंचाया है।

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पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि वह एक सप्ताह में सरकार से निर्देश हासिल करें अन्यथा कोर्ट पेरारिवलन को रिहा करने की मांग मंजूर कर लेगी। नटराज ने कहा कि खास परिस्थितियों में राज्यपाल के बदले राष्ट्रपति ही दया याचिका पर फैसला लेने में सक्षम प्राधिकारी हैं, खासकर तब जब मौत की सजा को उम्रकैद में बदला गया हो। इस पर कोर्ट ने कहा कि जब कम समय जेल में गुजारने वालों को रिहा किया जा सकता है तो पेरारिवलन की रिहाई पर केंद्र सहमत क्यों नहीं है। 
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राज्यपाल का कदम संघीय ढांचे पर प्रहार
पीठ ने कहा, हम आपको बचकर निकलने का रास्ता दे रहे हैं। यह एक अजीब तर्क है। आपका यह कहना कि राज्यपाल के पास संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत दया याचिका पर फैसला करने का अधिकार नहीं है, संघीय ढांचे पर प्रहार है। आखिर किस प्रावधान के तहत राज्यपाल राज्य मंत्रिमंडल के फैसले को राष्ट्रपति को भेज सकते हैं? यदि राज्यपाल मंत्रिमंडल की सिफारिश से सहमत नहीं हैं तो वह ज्यादा से ज्यादा इसे मंत्रिमंडल को वापस भेज सकते हैं। 
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संविधान को फिर से लिखना होगा
जस्टिस गवई ने कहा, यदि केंद्र का तर्क मान लिया जाए तो संविधान को फिर से लिखना होगा कि अनुच्छेद 161 के तहत कुछ खास मामलों को राष्ट्रपति को भेजा जा सकता है। राज्यपाल ने पिछले साढ़े तीन साल से जो कदम उठाया है वह अजीब है।

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