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भारत में आखिर क्यों है 'सरकारी दामाद' बनने की होड़?
बीबीसी हिंदी
Updated Fri, 08 Jun 2018 05:45 PM IST
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भारत में सरकारी नौकरी करने वाले को सरकारी दामाद कहते हैं। क्या वजह है आखिर इसकी? क्यों सरकारी नौकरी को हमारे देश में इतनी तरज़ीह दी जाती है? बीबीसी ने इस बात को समझने की कोशिश की।
हमारी मुलाकात अनीश तोमर से हुई। अनीश ने भारत सरकार में नौकरी के लिए अर्जी दी है। उन्हें नौकरी के लिए आवेदन की प्रक्रिया रट सी गई है। सरकारी नौकरी पाने की ये अनीश की सातवीं कोशिश है। मुक़ाबला बेहद कांटे का रहता है। एक-एक पद के लिए हजारों अर्जियां दी जाती हैं।
इस बार तो रेलवे में नौकरी हासिल करने के लिए अनीश का मुकाबला अपनी पत्नी से भी होगा। रेलवे की ये नौकरी बहुत निचले दर्जे की है। फिर भी इसके लिए सैकड़ों लोग अप्लाई करेंगे।
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अनीश ने पिछली बार जिन सरकारी नौकरियों के लिए अर्जी दी थी, उनका भी यही हाल था। अनीश को इसका कोई शिकवा नहीं है। पिछली बार उन्होंने सरकारी टीचर के लिए अर्जी दी थी। इससे पहले वन विभाग में गार्ड के लिए अनीश ने अप्लाई किया था। दोनों ही बार उनके हाथ नाकामी लगी।
अनीश बताते हैं कि वन विभाग में सुरक्षा गार्ड के लिए वो फिजिकल टेस्ट पास नहीं कर पाए थे।
सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह
28 बरस के अनीश इस वक्त राजस्थान के भीलवाड़ा में एक हेल्थकेयर कंपनी में मार्केटिंग का काम कर रहे हैं। भीलवाड़ा छोटा सा शहर है। ये कपड़ा उद्योग के लिए मशहूर है। अनीश को इस प्राइवेट नौकरी में 25 हजार रुपए महीने सैलरी मिलती है। अनीश पर काम का बोझ बहुत ज्यादा है। वो बताते हैं कि कई बार तो रात के वक्त उन्हें फोन कॉल्स अटेंड करनी पड़ती है।
छोटे शहर से आने वाले अनीश जैसे लाखों भारतीय हैं, जो सरकारी नौकरी पाने के लिए बेकरार हैं। भारत में सरकारी नौकरी का मतलब है, आमदनी की गारंटी, सिर पर छत और मुफ्त में मेडिकल सुविधाएं। इसके अलावा सरकारी नौकरी करने वाले और उसके परिजनों को घूमने या कहीं आने-जाने के लिए पास भी मिलता है।
2006 में छठें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद भारत में सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह भी निजी सेक्टर की नौकरियों से मुकाबले में आ गई थी। इसके अलावा सरकारी नौकरी की दूसरी सुविधाएं भी हैं।
जिस नौकरी के लिए अनीश ने अर्जी दी है, उसमें उन्हें 35 हजार रुपए महीने तक सैलरी मिल सकती है। बाक़ी सुविधाएं जो मिलेंगी, सो अलग। यही वजह है कि भारत में सरकारी नौकरियां निकलने पर हजारों, कई बार लाखों लोग एक साथ आवेदन कर देते हैं। रेलवे और पुलिस की नौकरी के लिए तो बड़े पैमाने पर लोग अप्लाई करते हैं।
हजार की भर्ती, लाखों आवेदक
अनीश को रेलवे की नौकरी हासिल करने के लिए काबिलियत के साथ-साथ किस्मतवाला भी होना पड़ेगा। एक पद के लिए करीब 200 लोगों ने आवेदन किया है। रेलवे ने करीब 30 बरस के अंतराल के बाद इसी साल एक लाख नौकरियां निकाली थीं। इनमें ट्रैकमैन, कुली और इलेक्ट्रिशियन की नौकरियां हैं।
एक लाख नौकरियों के लिए करीब दो करोड़ तीस लाख लोगों ने अर्जी दी। ऐसा नहीं है कि अर्जियों की ये बाढ़ सिर्फ रेलवे की नौकरियों के लिए आती है। इसके कुछ ही हफ्तों बाद मुंबई पुलिस में 1,137 सिपाहियों की भर्ती के लिए दो लाख लोगों ने अप्लाई किया था। जबकि सिपाही मुंबई पुलिस का सबसे छोटा पद है।
2015 में यूपी में सचिवालय में क्लर्क के 368 पदों के लिए दो करोड़ तीस लाख आवेदन आए थे। यानी एक पद के लिए 6,250 अर्जियां! इतने ज्यादा लोगों ने आवेदन दे दिया था कि सरकार को भर्ती को रोकना पड़ा। क्योंकि सभी लोगों के इंटरव्यू लेने में ही चार साल लग जाने थे।
बहुत सी ऐसी नौकरियों के लिए खूब पढ़े-लिखे लोग भी अप्लाई करते हैं। इंजीनियरिंग या एमबीए की पढ़ाई करने वाले भी क्लर्क और चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन करते हैं। जबकि ऐसे छोटे पदों के लिए आपका दसवीं पास होना और साइकिल चलाना आना चाहिए, बस।
रेलवे ने जो एक लाख नौकरियां निकाली हैं, उनमें न्यूनतम पात्रता दसवीं पास होने की है। आखिर क्या वजह है कि इतने बड़े पैमाने पर और ज्यादा पढ़े-लिखे युवा सरकारी नौकरियों के लिए होड़ लगाते हैं।
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हमारी मुलाकात अनीश तोमर से हुई। अनीश ने भारत सरकार में नौकरी के लिए अर्जी दी है। उन्हें नौकरी के लिए आवेदन की प्रक्रिया रट सी गई है। सरकारी नौकरी पाने की ये अनीश की सातवीं कोशिश है। मुक़ाबला बेहद कांटे का रहता है। एक-एक पद के लिए हजारों अर्जियां दी जाती हैं।
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इस बार तो रेलवे में नौकरी हासिल करने के लिए अनीश का मुकाबला अपनी पत्नी से भी होगा। रेलवे की ये नौकरी बहुत निचले दर्जे की है। फिर भी इसके लिए सैकड़ों लोग अप्लाई करेंगे।
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अनीश ने पिछली बार जिन सरकारी नौकरियों के लिए अर्जी दी थी, उनका भी यही हाल था। अनीश को इसका कोई शिकवा नहीं है। पिछली बार उन्होंने सरकारी टीचर के लिए अर्जी दी थी। इससे पहले वन विभाग में गार्ड के लिए अनीश ने अप्लाई किया था। दोनों ही बार उनके हाथ नाकामी लगी।
अनीश बताते हैं कि वन विभाग में सुरक्षा गार्ड के लिए वो फिजिकल टेस्ट पास नहीं कर पाए थे।
सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह
28 बरस के अनीश इस वक्त राजस्थान के भीलवाड़ा में एक हेल्थकेयर कंपनी में मार्केटिंग का काम कर रहे हैं। भीलवाड़ा छोटा सा शहर है। ये कपड़ा उद्योग के लिए मशहूर है। अनीश को इस प्राइवेट नौकरी में 25 हजार रुपए महीने सैलरी मिलती है। अनीश पर काम का बोझ बहुत ज्यादा है। वो बताते हैं कि कई बार तो रात के वक्त उन्हें फोन कॉल्स अटेंड करनी पड़ती है।
छोटे शहर से आने वाले अनीश जैसे लाखों भारतीय हैं, जो सरकारी नौकरी पाने के लिए बेकरार हैं। भारत में सरकारी नौकरी का मतलब है, आमदनी की गारंटी, सिर पर छत और मुफ्त में मेडिकल सुविधाएं। इसके अलावा सरकारी नौकरी करने वाले और उसके परिजनों को घूमने या कहीं आने-जाने के लिए पास भी मिलता है।
2006 में छठें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद भारत में सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह भी निजी सेक्टर की नौकरियों से मुकाबले में आ गई थी। इसके अलावा सरकारी नौकरी की दूसरी सुविधाएं भी हैं।
जिस नौकरी के लिए अनीश ने अर्जी दी है, उसमें उन्हें 35 हजार रुपए महीने तक सैलरी मिल सकती है। बाक़ी सुविधाएं जो मिलेंगी, सो अलग। यही वजह है कि भारत में सरकारी नौकरियां निकलने पर हजारों, कई बार लाखों लोग एक साथ आवेदन कर देते हैं। रेलवे और पुलिस की नौकरी के लिए तो बड़े पैमाने पर लोग अप्लाई करते हैं।
हजार की भर्ती, लाखों आवेदक
अनीश को रेलवे की नौकरी हासिल करने के लिए काबिलियत के साथ-साथ किस्मतवाला भी होना पड़ेगा। एक पद के लिए करीब 200 लोगों ने आवेदन किया है। रेलवे ने करीब 30 बरस के अंतराल के बाद इसी साल एक लाख नौकरियां निकाली थीं। इनमें ट्रैकमैन, कुली और इलेक्ट्रिशियन की नौकरियां हैं।
एक लाख नौकरियों के लिए करीब दो करोड़ तीस लाख लोगों ने अर्जी दी। ऐसा नहीं है कि अर्जियों की ये बाढ़ सिर्फ रेलवे की नौकरियों के लिए आती है। इसके कुछ ही हफ्तों बाद मुंबई पुलिस में 1,137 सिपाहियों की भर्ती के लिए दो लाख लोगों ने अप्लाई किया था। जबकि सिपाही मुंबई पुलिस का सबसे छोटा पद है।
2015 में यूपी में सचिवालय में क्लर्क के 368 पदों के लिए दो करोड़ तीस लाख आवेदन आए थे। यानी एक पद के लिए 6,250 अर्जियां! इतने ज्यादा लोगों ने आवेदन दे दिया था कि सरकार को भर्ती को रोकना पड़ा। क्योंकि सभी लोगों के इंटरव्यू लेने में ही चार साल लग जाने थे।
बहुत सी ऐसी नौकरियों के लिए खूब पढ़े-लिखे लोग भी अप्लाई करते हैं। इंजीनियरिंग या एमबीए की पढ़ाई करने वाले भी क्लर्क और चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन करते हैं। जबकि ऐसे छोटे पदों के लिए आपका दसवीं पास होना और साइकिल चलाना आना चाहिए, बस।
रेलवे ने जो एक लाख नौकरियां निकाली हैं, उनमें न्यूनतम पात्रता दसवीं पास होने की है। आखिर क्या वजह है कि इतने बड़े पैमाने पर और ज्यादा पढ़े-लिखे युवा सरकारी नौकरियों के लिए होड़ लगाते हैं।
इसकी कई वजहें हैं
जॉब सिक्योरिटी पहली वजह है। सरकारी सुविधाएं दूसरी वजह हैं। और एक बड़ी वजह ये भी है कि सरकारी नौकरी करने वाले को खूब दहेज मिलता है। यानी शादी के बाजार में सरकारी नौकरी करने वाले की ऊंची कीमत लगती है।
2017 में आई बॉलीवुड फिल्म न्यूटन में इस बात को बखूबी दिखाया गया है। इसमें अभिनेता राजकुमार राव सरकारी नौकरी करते हैं, जिससे उन्हें शादी करने में सहूलियत होती है।
फिल्म में राजकुमार राव के पिता कहते हैं, 'लड़की का बाप ठेकेदार है और तुम एक सरकारी नौकर। तुम्हारी जिंदगी संवर जाएगी'। फिर उनकी मां कहती है कि, 'लड़की वालों ने दहेज में 10 लाख रुपये और एक मोटरसाइकिल देने को भी कहा है'।
न्यूटन फिल्म ऑस्कर मे भारत की आधिकारिक फिल्म थी। भारत में रेलवे की नौकरी को बहुत अहमियत दी जाती है। अगर आप अमरीका में रहते हैं, तो लंबे सफर के लिए सड़क के रास्ते जाने का खयाल आएगा। लेकिन भारत में लंबे सफर ज्यादातर रेलगाड़ी से तय करते हैं।
2017 में छपे एक लेख के मुताबिक, भारत में रेल के एसी कोच में जितने मुसाफिर चलते हैं, उतने देश की सारी एयरलाइन के कुल मुसाफिर नहीं हैं। उत्तर भारत के गोरखुर, झांसी और मध्य प्रदेश के इटारसी जैसे शहरों की तरक्की की बुनियाद रेलवे रही है।
सामंतवादी समाज का नजरिया
रेलवे भर्ती बोर्ड के अमिताभ खरे कहते हैं, 'भारत का समाज सामंतवादी रहा है। जहां पर सरकारी नौकरी करने वाले को समाज में बड़े सम्मान से देखा जाता था। वो मानसिकता आज भी कायम है'।
आईएएस और दूसरी सिविल सर्विसेज़ को तो और भी ऊंचा दर्जा हासिल है। यूपी और बिहार जैसे राज्यों से हर साल बड़ी तादाद में युवा सिविल सर्विसेज में कामयाबी हासिल करते हैं। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि हर साल करीब 15 हजार रेलवे कर्मचारी अपने शहर में वापस ट्रांसफर किए जाने की अर्जी देते हैं। इनमें से ज्यादातर अर्जियां यूपी और बिहार से आती हैं।
इतने ज्यादा सरकारी नौकरीपेशा लोग होने के बावजूद उत्तरी भारत गरीबी और अशिक्षा का शिकार है। सरकारी नौकरी पाने के बाद लोगों के पास अपने शहर या गांव के करीब रहने का मौका मिल जाता है। इसके अलावा बढ़ती आबादी और नौकरी की कमी की वजह से भी हमारे देश में सरकारी नौकरी के लिए बहुत मारा-मारी है।
नौकरियों के लिए मारामारी
डीटी नाम के एक युवा को 25वीं बार कोशिश करने पर रेलवे सुरक्षा बल में नौकरी मिली। इससे पहले उसने सेना और आईटीबीपी की नौकरी के लिए भी आवेदन किया था। डीटी के साथी सिपाही जेएस भी पिछले 4 साल से तमाम सरकारी नौकरियों के लिए अर्जियां दे रहे हैं। वहीं इस साल आईएएस का इम्तिहान टॉप करने वाले गूगल के पूर्व कर्मचारी अणुदीप दुरीशेट्टी ने सातवीं कोशिश के बाद आईएएस का इम्तिहान पास किया।
सरकारी नौकरी के लिए अर्जी देना पारिवारिक मामला भी बन जाता है। जेएस की पत्नी गाजियाबाद में रहती हैं। वो सरकारी टीचर की नौकरी के लिए तैयारी कर रही हैं। जेएस कहते हैं कि बीवी को नौकरी मिलने के बाद वो ट्रांसफर की कोशिश करेंगे।
अनीश की पत्नी प्रिया कहती हैं कि उनका उसी नौकरी के लिए अर्जी देने का मलतब है कि परिवार के दो लोग अप्लाई कर रहे हैं। क्या पता किसकी किस्मत चमक जाए? प्रिया कहती हैं कि इस नौकरी की शुरुआती सैलरी ही बहुत अच्छी है। नौकरी लगने से परिवार का मान-सम्मान बढ़ जाएगा।
(कहानी के अंत में डीटी और जेएस, जो दो पात्र हैं, वो नहीं चाहते थे कि इस कहानी में उनका पूरा नाम इस्तेमाल किया जाये।)
2017 में आई बॉलीवुड फिल्म न्यूटन में इस बात को बखूबी दिखाया गया है। इसमें अभिनेता राजकुमार राव सरकारी नौकरी करते हैं, जिससे उन्हें शादी करने में सहूलियत होती है।
फिल्म में राजकुमार राव के पिता कहते हैं, 'लड़की का बाप ठेकेदार है और तुम एक सरकारी नौकर। तुम्हारी जिंदगी संवर जाएगी'। फिर उनकी मां कहती है कि, 'लड़की वालों ने दहेज में 10 लाख रुपये और एक मोटरसाइकिल देने को भी कहा है'।
न्यूटन फिल्म ऑस्कर मे भारत की आधिकारिक फिल्म थी। भारत में रेलवे की नौकरी को बहुत अहमियत दी जाती है। अगर आप अमरीका में रहते हैं, तो लंबे सफर के लिए सड़क के रास्ते जाने का खयाल आएगा। लेकिन भारत में लंबे सफर ज्यादातर रेलगाड़ी से तय करते हैं।
2017 में छपे एक लेख के मुताबिक, भारत में रेल के एसी कोच में जितने मुसाफिर चलते हैं, उतने देश की सारी एयरलाइन के कुल मुसाफिर नहीं हैं। उत्तर भारत के गोरखुर, झांसी और मध्य प्रदेश के इटारसी जैसे शहरों की तरक्की की बुनियाद रेलवे रही है।
सामंतवादी समाज का नजरिया
रेलवे भर्ती बोर्ड के अमिताभ खरे कहते हैं, 'भारत का समाज सामंतवादी रहा है। जहां पर सरकारी नौकरी करने वाले को समाज में बड़े सम्मान से देखा जाता था। वो मानसिकता आज भी कायम है'।
आईएएस और दूसरी सिविल सर्विसेज़ को तो और भी ऊंचा दर्जा हासिल है। यूपी और बिहार जैसे राज्यों से हर साल बड़ी तादाद में युवा सिविल सर्विसेज में कामयाबी हासिल करते हैं। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि हर साल करीब 15 हजार रेलवे कर्मचारी अपने शहर में वापस ट्रांसफर किए जाने की अर्जी देते हैं। इनमें से ज्यादातर अर्जियां यूपी और बिहार से आती हैं।
इतने ज्यादा सरकारी नौकरीपेशा लोग होने के बावजूद उत्तरी भारत गरीबी और अशिक्षा का शिकार है। सरकारी नौकरी पाने के बाद लोगों के पास अपने शहर या गांव के करीब रहने का मौका मिल जाता है। इसके अलावा बढ़ती आबादी और नौकरी की कमी की वजह से भी हमारे देश में सरकारी नौकरी के लिए बहुत मारा-मारी है।
नौकरियों के लिए मारामारी
डीटी नाम के एक युवा को 25वीं बार कोशिश करने पर रेलवे सुरक्षा बल में नौकरी मिली। इससे पहले उसने सेना और आईटीबीपी की नौकरी के लिए भी आवेदन किया था। डीटी के साथी सिपाही जेएस भी पिछले 4 साल से तमाम सरकारी नौकरियों के लिए अर्जियां दे रहे हैं। वहीं इस साल आईएएस का इम्तिहान टॉप करने वाले गूगल के पूर्व कर्मचारी अणुदीप दुरीशेट्टी ने सातवीं कोशिश के बाद आईएएस का इम्तिहान पास किया।
सरकारी नौकरी के लिए अर्जी देना पारिवारिक मामला भी बन जाता है। जेएस की पत्नी गाजियाबाद में रहती हैं। वो सरकारी टीचर की नौकरी के लिए तैयारी कर रही हैं। जेएस कहते हैं कि बीवी को नौकरी मिलने के बाद वो ट्रांसफर की कोशिश करेंगे।
अनीश की पत्नी प्रिया कहती हैं कि उनका उसी नौकरी के लिए अर्जी देने का मलतब है कि परिवार के दो लोग अप्लाई कर रहे हैं। क्या पता किसकी किस्मत चमक जाए? प्रिया कहती हैं कि इस नौकरी की शुरुआती सैलरी ही बहुत अच्छी है। नौकरी लगने से परिवार का मान-सम्मान बढ़ जाएगा।
(कहानी के अंत में डीटी और जेएस, जो दो पात्र हैं, वो नहीं चाहते थे कि इस कहानी में उनका पूरा नाम इस्तेमाल किया जाये।)